
मोकामा। बिहार के मोकामा इलाके से भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है। सामियागढ़ थाना क्षेत्र के थानाध्यक्ष सौरभ कुमार को कथित तौर पर 27 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई निगरानी विभाग की टीम ने थाना परिसर में ही की। गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और पूरे मामले को लेकर इलाके में चर्चा तेज हो गई।
जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी। प्रहलादपुर निवासी मनोज कुमार ने निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सामियागढ़ थानाध्यक्ष सौरभ कुमार द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोपों की सत्यता की जांच शुरू की।
निगरानी विभाग की टीम ने शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की प्रारंभिक स्तर पर पुष्टि की। इसके बाद पूरी कार्रवाई की योजना तैयार की गई। इसी क्रम में निगरानी विभाग की टीम सामियागढ़ थाना पहुंची और कथित तौर पर 27 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए थानाध्यक्ष सौरभ कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
थाना परिसर में हुई गिरफ्तारी से मचा हड़कंप
सबसे खास बात यह रही कि गिरफ्तारी की कार्रवाई किसी सुनसान स्थान या बाहरी इलाके में नहीं, बल्कि थाना परिसर में ही की गई। निगरानी विभाग की टीम ने पूरी तैयारी के साथ कार्रवाई को अंजाम दिया। जैसे ही थानाध्यक्ष के रिश्वत लेने की पुष्टि हुई, टीम ने उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
घटना की पुष्टि निगरानी विभाग के डीएसपी अरुणोदय पांडे ने की। उन्होंने बताया कि सामियागढ़ थाना अध्यक्ष सौरभ कुमार को 27 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है। कार्रवाई के दौरान निगरानी विभाग की टीम ने सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा किया और आरोपी पुलिस अधिकारी को हिरासत में ले लिया।
इस कार्रवाई में निगरानी विभाग के डीएसपी अरुणोदय पांडे के साथ डीएसपी आदित्य राज भी मौजूद थे। दोनों अधिकारी निगरानी विभाग में वरीय पुलिस उपाधीक्षक के पद पर तैनात बताए जा रहे हैं। इनके अलावा कार्रवाई के लिए निगरानी विभाग के कई सब इंस्पेक्टर भी टीम में शामिल थे।
शिकायत के बाद निगरानी विभाग ने बिछाया जाल
बताया जा रहा है कि प्रहलादपुर निवासी मनोज कुमार की शिकायत के बाद निगरानी विभाग ने पहले मामले की जांच की। शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की पुष्टि होने के बाद ही कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद टीम ने कथित रिश्वत की रकम के साथ थानाध्यक्ष को पकड़ने की रणनीति तैयार की।
निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। कार्रवाई के दौरान टीम ने शिकायत में बताए गए आरोपों के आधार पर कदम उठाया। कथित तौर पर 27 हजार रुपये की रिश्वत की रकम लेते ही थानाध्यक्ष को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया। थाना परिसर में निगरानी विभाग की कार्रवाई की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों और पुलिसकर्मियों के बीच भी हलचल देखने को मिली।
मोकामा थाना की टीम भी मौके पर पहुंची
निगरानी विभाग की कार्रवाई के दौरान मोकामा थाना की टीम भी मौके पर पहुंची थी। गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गिरफ्तार थानाध्यक्ष को मोकामा लाया गया। यहां उनकी मेडिकल जांच कराई गई। इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए निगरानी विभाग की टीम उन्हें अपने साथ पटना ले गई।
बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी पुलिस अधिकारी को नियमानुसार आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष पेश किया जाएगा। निगरानी विभाग की ओर से मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग के भीतर भी मामला चर्चा का विषय बन गया है। एक थानाध्यक्ष की थाना परिसर से ही रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तारी ने पुलिस व्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
गिरफ्तार थानाध्यक्ष ने आरोपों को बताया साजिश
वहीं, गिरफ्तारी के बाद सामियागढ़ थानाध्यक्ष सौरभ कुमार ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने दावा किया कि प्रहलादपुर निवासी मनोज कुमार ने उन्हें जानबूझकर फंसाया है। गिरफ्तार थानाध्यक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता खुद अवैध खनन की गतिविधियों में शामिल है और उसने उन्हें बदनाम करने तथा फंसाने के उद्देश्य से यह पूरा मामला तैयार किया।
सौरभ कुमार ने अपने बचाव में कहा कि उनके खिलाफ की गई शिकायत एक साजिश का हिस्सा है। हालांकि, निगरानी विभाग ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए उन्हें कथित तौर पर रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार किया है। अब इस मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान ही यह स्पष्ट होगा कि घटनाक्रम के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल निगरानी विभाग की कार्रवाई के बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच एजेंसी शिकायत, कथित रिश्वत की रकम और गिरफ्तारी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि शिकायतकर्ता और गिरफ्तार पुलिस अधिकारी के बीच पहले से किसी तरह का विवाद था या नहीं।
मामले में गिरफ्तार थानाध्यक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच का हिस्सा बनाए जाने की संभावना है। यदि शिकायतकर्ता के खिलाफ अवैध खनन से जुड़े किसी मामले में पहले से कार्रवाई या जांच चल रही थी, तो उसका भी रिकॉर्ड खंगाला जा सकता है। दूसरी ओर, निगरानी विभाग की कार्रवाई में सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
मोकामा के सामियागढ़ थाना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वतखोरी के आरोपों को लेकर निगरानी विभाग सख्त कार्रवाई कर रहा है। हालांकि, इस मामले में गिरफ्तार थानाध्यक्ष ने खुद को निर्दोष बताते हुए शिकायतकर्ता पर साजिश के तहत फंसाने का आरोप लगाया है।
अब निगरानी विभाग की आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल 27 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में थानाध्यक्ष सौरभ कुमार की गिरफ्तारी मोकामा क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। निगरानी विभाग की टीम उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए पटना ले गई है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है।


