बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: किशनगंज में कीचड़ से नहीं गुजर सकी एंबुलेंस, कुर्सी पर बैठाकर डेढ़ किलोमीटर तक मरीज को अस्पताल ले गए ग्रामीण

किशनगंज: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के दावे और हजारों करोड़ रुपये के बजट के बीच किशनगंज जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण इलाकों की बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड की चिल्हनियां पंचायत स्थित कास्त खर्रा गांव में बदहाल सड़क के कारण एक बीमार बुजुर्ग महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को कुर्सी पर बैठाकर करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा।

बारिश ने उजागर की बदहाल सड़क की हकीकत

लगातार बारिश के बाद गांव की कच्ची सड़क पूरी तरह जलमग्न और कीचड़ में तब्दील हो गई। हालात ऐसे हो गए कि कोई भी वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। इससे गांव का मुख्य सड़क से संपर्क लगभग टूट गया और मरीजों को अस्पताल ले जाना बेहद मुश्किल हो गया।

कुर्सी पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाई गई बुजुर्ग महिला

गांव की बीमार वृद्ध महिला अलेतून निशा की तबीयत बिगड़ने पर स्थानीय ग्रामीण तौसीफ आलम और तबरेज आलम ने मानवता की मिसाल पेश की। दोनों ने महिला को एक कुर्सी पर बैठाया और बल्लों के सहारे कीचड़ भरे रास्ते से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से टेंपो की मदद से उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, टेढ़ागाछ में भर्ती कराया गया।

वर्षों से पक्की सड़क की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि कास्त खर्रा गांव में वर्षों से पक्की सड़क और जल निकासी की व्यवस्था की मांग की जा रही है। इस संबंध में कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभागों को आवेदन भी दिए गए, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

हर बारिश में बढ़ जाती है परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार बारिश के मौसम में यही रास्ता पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। इसका सबसे अधिक असर मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों पर पड़ता है। खराब सड़क के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है।

प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक, सांसद, पंचायत प्रतिनिधियों और जिलाधिकारी नवीन कुमार से जल्द पक्की सड़क और जल निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में किसी गंभीर मरीज की जान भी जा सकती है।

बीडीओ ने क्या कहा?

टेढ़ागाछ के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) अजय कुमार ने बताया कि जलजमाव की तत्काल निकासी करा दी गई है और स्थायी समाधान के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

“प्रखंड क्षेत्र के संबंधित इलाके में जलजमाव की समस्या थी, जिसकी तत्काल निकासी करा दी गई है। अब ज्यादा परेशानी नहीं होगी। स्थायी समाधान के लिए कार्ययोजना बनाई गई है और जल्द ही काम शुरू किया जाएगा।”अजय कुमार, बीडीओ, टेढ़ागाछ

विकास के दावों पर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर ग्रामीण बिहार की बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को सामने लाती है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़े बजट और विकास के दावों के बावजूद यदि मरीजों को आज भी कुर्सी पर बैठाकर कीचड़ भरे रास्तों से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है, तो यह व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती है।

  • ये भी पढ़े..

    सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने पर अरविंद केजरीवाल का हमला, बोले- ‘बात करनी चाहिए थी, ज़बरदस्ती नहीं’

    Share Add as a preferred…

    एससी-एसटी आवासीय विद्यालयों की 24 घंटे होगी ऑनलाइन निगरानी, पटना के कमांड कंट्रोल रूम से जुड़े सभी 91 स्कूल

    Share Add as a preferred…