पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ताड़ी पीने के आरोप में बर्खास्त कांस्टेबल को मिली राहत, सेवा से हटाने का आदेश रद्द

पटना: पटना हाईकोर्ट ने ताड़ी पीने के आरोप में सेवा से बर्खास्त किए गए एक पुलिस कांस्टेबल को बड़ी राहत देते हुए बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया है। जस्टिस हरीश कुमार की एकलपीठ ने पीटीसी (लेखक/कांस्टेबल) राम प्रवेश सिंह की याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।

हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया बर्खास्तगी का आदेश?

कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच के दौरान ब्रेथ एनेलाइजर रिपोर्ट रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई। इसके अलावा, ब्रेथ एनेलाइजर जांच करने वाले व्यक्ति का भी परीक्षण नहीं कराया गया। ऐसे में शराब सेवन के आरोप को पर्याप्त साक्ष्यों के बिना ही सही मानते हुए कांस्टेबल को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया, जो न्यायसंगत नहीं है।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी कर्मचारी को दंडित करने से पहले आरोपों को ठोस साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध करना आवश्यक है। जांच अधिकारी का दायित्व है कि वह उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय ले।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार गिरि ने कोर्ट को बताया कि राम प्रवेश सिंह नवादा जिले के पाकरीबरावां थाना में पीटीसी (लेखक/कांस्टेबल) के पद पर तैनात थे।

उन पर शराब के नशे में होने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार किया गया और बिहार निषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 37(सी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। उनकी ब्रेथ एनेलाइजर से जांच की गई और बाद में स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने जांच के दौरान उनके मुंह से ताड़ी की गंध आने की बात दर्ज की। इसके बाद उन्हें निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई।

इलाज के लिए ताड़ी पीने का दिया था तर्क

विभागीय जांच के दौरान राम प्रवेश सिंह ने कहा कि उन्होंने डॉक्टर की सलाह पर बीमारी के इलाज के लिए ताड़ी का सेवन किया था। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1986 से पुलिस सेवा में रहते हुए उनका पूरा सेवा रिकॉर्ड बेदाग रहा है और उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें कई प्रशंसा पत्र भी मिल चुके हैं।

सरकार ने किया था विरोध

राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि बिहार में ताड़ी को बिहार निषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 2(16) के तहत देसी/पारंपरिक शराब की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए बर्खास्तगी का आदेश सही था और याचिका खारिज की जानी चाहिए।

कोर्ट ने दी राहत

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पटना हाईकोर्ट ने सरकारी पक्ष की आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि पर्याप्त एवं विश्वसनीय साक्ष्यों के अभाव में बर्खास्तगी का आदेश टिक नहीं सकता। अदालत ने राम प्रवेश सिंह की बर्खास्तगी को निरस्त करते हुए उन्हें बड़ी राहत प्रदान की।

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