टीबी मुक्त भारत अभियान 2026 को मिलेगी नई रफ्तार, भागलपुर में जिलाधिकारी ने की समीक्षा बैठक, निक्षय मित्र बनने की अपील

भागलपुर जिले को वर्ष 2026 तक टीबी (क्षय रोग) मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर जिला प्रशासन ने अभियान को और तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसी उद्देश्य से समीक्षा भवन में जिलाधिकारी अलंकृता पाण्डेय की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में टीबी मरीजों के उपचार, पोषण सहायता, जनभागीदारी और निक्षय मित्र अभियान को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही सरकारी विभागों, उद्योगों, सामाजिक संगठनों और बैंकिंग संस्थानों से इस अभियान में सक्रिय सहयोग देने की अपील की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण तभी संभव है, जब सरकारी प्रयासों के साथ समाज भी जिम्मेदारी निभाए। उन्होंने कहा कि सरकार मरीजों को मुफ्त दवाएं उपलब्ध करा रही है, लेकिन केवल दवा से ही मरीज पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सकता। उपचार के दौरान पौष्टिक भोजन भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि बेहतर पोषण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और मरीज को जल्दी स्वस्थ होने में मदद करता है।

इसी सोच के तहत केंद्र सरकार की ओर से निक्षय मित्र पहल शुरू की गई है। इस योजना के माध्यम से समाज के सक्षम लोग, स्वयंसेवी संस्थाएं, उद्योग, कॉर्पोरेट संस्थान, बैंक और अन्य संगठन टीबी मरीजों को गोद लेकर छह महीने तक उन्हें नियमित रूप से पोषण किट उपलब्ध करा सकते हैं। बैठक में इस अभियान को अधिक व्यापक बनाने के लिए सभी संबंधित संस्थानों से आगे आने का आह्वान किया गया।

जिलाधिकारी ने कहा कि निक्षय मित्र बनना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि मानवता की सेवा का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि समाज के अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ते हैं तो हजारों मरीजों को समय पर पोषण सहायता मिल सकेगी, जिससे उनके स्वस्थ होने की संभावना और अधिक बढ़ जाएगी। उन्होंने सभी उद्योग समूहों, व्यापारिक संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों से अपील की कि वे निक्षय मित्र बनकर इस राष्ट्रीय अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

बैठक के दौरान बताया गया कि इच्छुक व्यक्ति या संस्थान ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से निक्षय मित्र के रूप में पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण के बाद वे अपनी क्षमता के अनुसार एक या अधिक टीबी मरीजों को गोद लेकर नियमित पोषण सहायता उपलब्ध करा सकते हैं। पोषण किट वितरित करने वाले निक्षय मित्रों और दानदाताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया जाता है, ताकि समाज में दूसरों को भी इस अभियान से जुड़ने की प्रेरणा मिल सके।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि एक पोषण किट की अनुमानित लागत लगभग 700 से 800 रुपये होती है। इस किट में दाल, सत्तू, मूंगफली, सोयाबीन, गुड़ और अन्य आवश्यक पौष्टिक खाद्य सामग्री शामिल रहती है। यह सामग्री टीबी मरीजों की पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है, ताकि उपचार के दौरान उन्हें पर्याप्त ऊर्जा और आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें।

बैठक में जिले में टीबी की वर्तमान स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस समय भागलपुर जिले में 3,092 टीबी मरीज उपचाररत हैं। सभी मरीजों के इलाज की नियमित निगरानी की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उन्हें समय पर दवाएं और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहें। साथ ही पोषण सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

संभावित टीबी मरीजों की पहचान को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तथा आरबीएसके की टीमें लगातार स्क्रीनिंग अभियान चला रही हैं। जिन लोगों में टीबी के लक्षण दिखाई देते हैं, उनकी तुरंत जांच कराई जा रही है ताकि बीमारी की समय रहते पहचान हो सके और इलाज जल्द शुरू किया जा सके।

बैठक में बताया गया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक जांच सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। मरीजों के लिए एक्स-रे और ट्रूनैट जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे कम समय में टीबी की पुष्टि की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि समय पर जांच और उपचार शुरू होने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं और संक्रमण के फैलाव को भी रोका जा सकता है।

जिलाधिकारी ने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, उद्योग, बैंक, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर काम करें तो जिले को निर्धारित समय सीमा के भीतर टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

बैठक में एनटीपीसी कहलगांव की विशेष सराहना की गई। अधिकारियों ने बताया कि एनटीपीसी वर्तमान में 500 टीबी मरीजों को निक्षय मित्र के रूप में पोषण किट उपलब्ध करा रहा है। प्रशासन ने इसे सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए अन्य संस्थानों से भी इसी तरह आगे आने की अपील की।

इस बैठक में भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए), लायंस क्लब ऑफ इंडिया, अडानी पावर तथा विभिन्न राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। इनमें भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि शामिल रहे। सभी ने अभियान को सफल बनाने के लिए सहयोग का भरोसा दिया।

बैठक में मौजूद सामाजिक संगठनों ने भी टीबी मरीजों के लिए पोषण सहायता, जनजागरूकता और स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने में सहयोग देने की इच्छा व्यक्त की। अधिकारियों ने कहा कि जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को यह समझाना भी जरूरी है कि टीबी एक पूरी तरह इलाज योग्य बीमारी है और समय पर जांच व नियमित दवा लेने से मरीज स्वस्थ जीवन जी सकता है।

जिलाधिकारी ने बैठक के अंत में सभी संबंधित विभागों और संस्थानों को निर्देश दिया कि वे टीबी मुक्त भारत अभियान 2026 को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति की छोटी-सी भागीदारी भी किसी मरीज के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। यदि अधिक से अधिक लोग निक्षय मित्र बनकर आगे आएंगे तो न केवल मरीजों को बेहतर पोषण मिलेगा, बल्कि भागलपुर जिले को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य भी तेजी से पूरा किया जा सकेगा। जिला प्रशासन ने एक बार फिर सभी नागरिकों, सामाजिक संगठनों, उद्योगों और संस्थानों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की, ताकि स्वस्थ, जागरूक और टीबी मुक्त भागलपुर के निर्माण का सपना साकार हो सके।

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