सरकारी अस्पतालों में ड्यूटी से गायब रहने वाले डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई, निजी अस्पताल रेफर करने पर भी सख्ती के संकेत

पटना, 16 जुलाई: बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सरकारी अस्पतालों में निर्धारित ड्यूटी के दौरान अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही मरीजों को अनावश्यक रूप से निजी अस्पतालों में भेजने या सरकारी सेवा अवधि के दौरान निजी प्रैक्टिस में संलिप्त पाए जाने वाले चिकित्सकों पर भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य के कई जिलों की स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पतालों की कार्यप्रणाली का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। बैठक में सरकारी अस्पतालों में ड्यूटी रोस्टर के पालन, सर्जरी सेवाओं की उपलब्धता, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था, ऑनलाइन स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रबंधन और मरीजों के रेफरल सिस्टम सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

बैठक में विशेष रूप से अरवल, भोजपुर, लखीसराय और सहरसा जिलों के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। संबंधित जिलों के अधिकारियों और सिविल सर्जनों से अस्पतालों की वर्तमान स्थिति, उपलब्ध संसाधनों और चुनौतियों के संबंध में विस्तृत जानकारी ली गई। समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई दिशा-निर्देश भी जारी किए गए।

स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में ड्यूटी रोस्टर व्यवस्था को लेकर विशेष गंभीरता दिखाई है। विभाग का मानना है कि अस्पतालों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित उपस्थिति ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला है। यदि चिकित्सक निर्धारित समय पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करेंगे तो इसका सीधा असर मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ेगा।

इसी को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया गया है कि सभी सरकारी अस्पतालों में ड्यूटी रोस्टर का पालन नियमों के अनुरूप और पूरी सख्ती के साथ सुनिश्चित किया जाए। अस्पताल प्रबंधन को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति पर लगातार निगरानी रखें और किसी भी प्रकार की लापरवाही की जानकारी तुरंत विभाग तक पहुंचाएं।

स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई चिकित्सक बिना स्वीकृत अवकाश के अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित पाया जाता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में निलंबन सहित अन्य विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। विभाग का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में अनुशासन और जवाबदेही को मजबूत करना है।

पिछले कुछ वर्षों में कई बार ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। कई क्षेत्रों में मरीजों को डॉक्टरों के इंतजार में घंटों तक अस्पतालों में बैठना पड़ता है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सख्त निगरानी व्यवस्था से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

बैठक के दौरान मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजे जाने के मामलों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि कोई मरीज चिकित्सकीय आवश्यकता के कारण उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा वाले संस्थान में रेफर किया जाता है तो यह प्रक्रिया नियमों के तहत होनी चाहिए, लेकिन अनावश्यक रूप से मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजना स्वीकार्य नहीं होगा।

यदि किसी चिकित्सक की भूमिका मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने या इसके लिए किसी प्रकार के प्रभाव या दबाव बनाने में सामने आती है तो उसके खिलाफ जांच के बाद कठोर कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम उपयोग होना चाहिए और मरीजों को उन्हीं संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

बैठक में सरकारी सेवा के दौरान निजी प्रैक्टिस के मुद्दे को भी गंभीरता से उठाया गया। विभाग ने दोहराया कि सरकारी ड्यूटी के समय निजी चिकित्सा कार्य में संलग्न रहना नियमों के विरुद्ध है और इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि कोई चिकित्सक सरकारी अस्पताल में ड्यूटी के समय निजी क्लिनिक या अस्पताल में चिकित्सा सेवाएं दे रहा था, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के लिए इस प्रकार की गतिविधियों पर सख्ती जरूरी मानी जा रही है।

हालांकि विभाग ने केवल कार्रवाई पर ही जोर नहीं दिया बल्कि बेहतर कार्य करने वाले चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रोत्साहित करने की भी बात कही। अधिकारियों का मानना है कि सकारात्मक कार्य संस्कृति विकसित करने के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित और पुरस्कृत करना भी उतना ही आवश्यक है।

बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण को लेकर भी चर्चा हुई। अस्पतालों में मरीजों से संबंधित जानकारी और सेवाओं को ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से दर्ज करने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई। डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था से मरीजों की चिकित्सा जानकारी को सुरक्षित रखने और सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलती है।

स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं की प्रविष्टि नियमित और सटीक तरीके से की जाए। इससे न केवल मरीजों को लाभ मिलेगा बल्कि विभाग को भी सेवाओं की निगरानी और मूल्यांकन करने में आसानी होगी।

समीक्षा बैठक में सर्जरी सेवाओं की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। विभाग ने जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से अधिक से अधिक सर्जरी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। अधिकारियों का मानना है कि यदि जिला स्तर पर ही बेहतर सर्जरी सेवाएं उपलब्ध होंगी तो मरीजों को बड़े शहरों या निजी अस्पतालों की ओर जाने की आवश्यकता कम होगी।

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन को लेकर भी समीक्षा की गई। कई जिलों में 24 घंटे और सातों दिन उपलब्ध आपातकालीन सेवाओं के संचालन पर संतोष व्यक्त किया गया, जबकि जिन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता पाई गई वहां आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

विशेष रूप से जिला अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। विभाग का मानना है कि दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों और अन्य आपात स्थितियों में त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। इसके लिए पर्याप्त चिकित्सक, उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराना प्राथमिकता में शामिल है।

समीक्षा के दौरान भोजपुर जिले के अस्पतालों की कार्यप्रणाली को सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा गया। वहां ड्यूटी रोस्टर की निगरानी और चिकित्सकीय सेवाओं के संचालन की व्यवस्था को प्रभावी बताया गया। स्वास्थ्य विभाग ने अन्य जिलों को भी इस प्रकार की व्यवस्था अपनाने की सलाह दी।

अधिकारियों का कहना है कि अस्पतालों की कार्यप्रणाली में सुधार केवल प्रशासनिक निर्देशों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सभी स्तरों पर जिम्मेदारी और समर्पण की आवश्यकता होती है। चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय से ही मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि ड्यूटी रोस्टर का सख्ती से पालन कराया जाता है और अस्पतालों में चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होती है, तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।

बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, नई तकनीकों के उपयोग और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की हालिया सख्ती को इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। विभाग का उद्देश्य स्पष्ट है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले प्रत्येक मरीज को समय पर, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

आने वाले दिनों में इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव दिखाई देता है और स्वास्थ्य सेवाओं में कितना सुधार आता है, इस पर मरीजों और आम लोगों की नजर बनी रहेगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि सरकारी अस्पतालों में अनुशासनहीनता और लापरवाही को अब गंभीरता से लिया जाएगा।

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