
पटना: बिहार के चर्चित बेऊर केंद्रीय कारा में अनियमितताओं के मामले में गृह विभाग (कारा) ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। विभाग ने जेल के उच्च कक्षपाल सहित तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही जेल अधीक्षक को तीनों अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र गठित कर शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इस मामले में अब तक कुल 13 जेलकर्मियों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जिससे जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
निरीक्षण में मिली थीं गंभीर अनियमितताएं
जानकारी के अनुसार 20 जून को बेऊर जेल में हुए औचक निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच टीम को जेल परिसर में प्रतिबंधित हीटर, कच्चा राशन तथा अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिलने के साथ नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले थे। इसके बाद गृह विभाग ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की।
तीन अधिकारियों पर गिरी गाज
कार्रवाई के तहत उच्च कक्षपाल उमेश कुमार सिन्हा, कक्षपाल निर्मल कुमार पासवान तथा तत्कालीन कक्षपाल शिवशंकर कुमार को निलंबित कर दिया गया है। विभाग ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया है कि तीनों अधिकारियों के विरुद्ध आरोपपत्र तैयार कर जल्द प्रस्तुत किया जाए, ताकि विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके।
पहले भी हो चुकी है कई कर्मचारियों पर कार्रवाई
बेऊर जेल में सामने आई अनियमितताओं के मामले में यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी इस प्रकरण में कई जेलकर्मियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। विभाग के अनुसार अब तक कुल 13 जेलकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक दोषी पाए जाने वाले अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
जांच में सहयोग नहीं करने का भी आरोप
जांच रिपोर्ट के अनुसार औचक निरीक्षण के समय संबंधित अधिकारियों पर जांच टीम को अपेक्षित सहयोग नहीं देने और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप भी लगे हैं। विभाग का मानना है कि जेल के भीतर मिली अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
निलंबन अवधि में रहेगा मुख्यालय निर्धारित
गृह विभाग के आदेश के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान संबंधित अधिकारियों का मुख्यालय मंडल कारा, सीतामढ़ी निर्धारित किया गया है। विभागीय जांच पूरी होने तक उन्हें वहीं से संबद्ध रखा जाएगा और सेवा नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का सख्त संदेश
गृह विभाग का कहना है कि राज्य की जेलों में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बेऊर जेल प्रकरण में जांच अभी जारी है और यदि आगे भी किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।


