75 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को घर बैठे मिलेगी संपत्ति निबंधन सेवा, बिहार में शुरू हुई नई डिजिटल व्यवस्था

बिहार में संपत्ति निबंधन प्रक्रिया को पूरी तरह आधुनिक और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने अब 75 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को घर बैठे संपत्ति निबंधन की सुविधा उपलब्ध कराने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत बुजुर्गों को अब रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि पूरी प्रक्रिया उनके घर पर ही पूरी की जा सकेगी।

वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित जिला निबंधन कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अत्याधुनिक डिजिटल और पेपरलेस निबंधन प्रणाली की शुरुआत की गई। इसके साथ ही चार नई सेवाओं को भी औपचारिक रूप से लागू किया गया, जिनमें होम रजिस्ट्रेशन, भूमि से जुड़ी ऑनलाइन जांच, पेपरलेस निबंधन और जीआईएस तकनीक के माध्यम से स्थल निरीक्षण शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन सेवाओं के लागू होने से न केवल निबंधन प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नागरिकों को घर पर ही निबंधन सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट वाहनों को रवाना किया गया। ये विशेष वाहन बुजुर्ग नागरिकों के घर जाकर निबंधन से जुड़ी सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करेंगे। इससे विशेष रूप से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्हें उम्र, स्वास्थ्य या शारीरिक समस्याओं के कारण सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने में कठिनाई होती है।

इस नई व्यवस्था के तहत राज्य के पहले डिजिटल होम रजिस्ट्रेशन का प्रदर्शन भी किया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक वरिष्ठ नागरिक की संपत्ति निबंधन प्रक्रिया को लाइव दिखाया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि तकनीक के माध्यम से अब पूरी प्रक्रिया बेहद आसान और सुविधाजनक हो चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रणाली में दस्तावेजों के सत्यापन से लेकर अंतिम पंजीकरण तक का पूरा काम डिजिटल माध्यम से किया जाएगा।

पहले इस योजना का लाभ केवल 80 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को देने का प्रस्ताव था, लेकिन सरकार ने इसे और व्यापक बनाते हुए आयु सीमा घटाकर 75 वर्ष कर दी है। इस फैसले से राज्य के लाखों बुजुर्गों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाना और सरकारी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा गया कि बिहार तेजी से डिजिटल शासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में अधिक से अधिक सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन तथा पेपरलेस बनाया जाएगा। नई तकनीक का उद्देश्य केवल प्रक्रिया को डिजिटल बनाना नहीं है, बल्कि लोगों का समय बचाना, अनावश्यक भागदौड़ को कम करना और सरकारी कार्यों को अधिक पारदर्शी बनाना भी है।

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि जो लोग रोजगार, व्यवसाय या अन्य कारणों से राज्य से बाहर रहते हैं, उन्हें भी मोबाइल एप्लीकेशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निबंधन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इससे संपत्ति के बंटवारे, खरीद-बिक्री या अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए लोगों को बिहार आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वे दूर बैठे ही अपनी निबंधन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

नई प्रणाली में जीआईएस तकनीक का उपयोग भी एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इसके जरिए भूमि की वास्तविक स्थिति, स्थान और स्वामित्व की जानकारी ऑनलाइन माध्यम से सत्यापित की जा सकेगी। इससे फर्जी दस्तावेजों, गलत दावों और विवादित जमीनों से जुड़े मामलों में कमी आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भूमि खरीदने वाले लोगों के हितों की रक्षा करेगा और संपत्ति लेन-देन में विश्वास बढ़ाएगा।

डिजिटल निबंधन प्रणाली के तहत अब लोगों को अपने दस्तावेज प्राप्त करने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। निबंधन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज सीधे व्हाट्सएप और ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे दस्तावेजों के खोने या क्षतिग्रस्त होने का जोखिम भी कम होगा और लोग कभी भी अपने रिकॉर्ड तक आसानी से पहुंच सकेंगे।

सरकार ने निबंधन कार्यालयों में आने वाले लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी कार्यालयों में बैठने की व्यवस्था, पीने के पानी, स्वच्छ शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

विशेषज्ञों के अनुसार पेपरलेस निबंधन व्यवस्था लागू होने से कागजी प्रक्रियाओं में बड़ी कमी आएगी। इससे समय की बचत होगी और निबंधन कार्य पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से पूरे हो सकेंगे। साथ ही मानवीय हस्तक्षेप कम होने के कारण भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर भी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान राज्य में चल रही अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत हर महीने लाखों लाभार्थियों को सीधे बैंक खातों में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के माध्यम से यह राशि तय समय पर पहुंचाई जाती है, जिससे बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है।

शिक्षा क्षेत्र में चल रहे प्रयासों की चर्चा करते हुए यह भी बताया गया कि 15 जुलाई से राज्य के विभिन्न प्रखंडों में 213 नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत की जाएगी। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों को अपने ही इलाके में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। सरकार का मानना है कि शिक्षा और डिजिटल सेवाओं का विस्तार ही राज्य के समग्र विकास का आधार बनेगा।

कार्यक्रम में डिजिटल निबंधन प्रणाली विकसित करने वाले तकनीकी विशेषज्ञों और सेवा प्रदाताओं को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि होम रजिस्ट्रेशन और पेपरलेस निबंधन जैसी सेवाएं आने वाले वर्षों में सरकारी कामकाज की तस्वीर बदल सकती हैं। इससे नागरिकों और प्रशासन के बीच दूरी कम होगी और सरकारी सेवाएं वास्तव में लोगों के दरवाजे तक पहुंच सकेंगी।

बिहार में शुरू हुई यह नई डिजिटल व्यवस्था केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि शासन प्रणाली को नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर बैठे निबंधन की सुविधा उन्हें सम्मान, सुविधा और आत्मविश्वास प्रदान करेगी। आने वाले समय में यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

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