गया में जनप्रतिनिधियों के लिए शुरू हुआ विशेष प्रबोधन कार्यक्रम, सक्षम विधानसभा से समृद्ध बिहार के निर्माण पर जोर

गया स्थित बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान परिसर में बिहार विधानसभा के सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को संसदीय परंपराओं, विधायी जिम्मेदारियों, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसेवा के दायित्वों के प्रति और अधिक जागरूक तथा सक्षम बनाना है। उद्घाटन समारोह में देश और राज्य के कई प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने लोकतंत्र को मजबूत बनाने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता केवल सरकार के कार्यों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की सक्रियता, जवाबदेही और कार्यकुशलता भी उतनी ही आवश्यक होती है। इसी सोच के साथ आयोजित इस प्रबोधन कार्यक्रम में विधायकों को संसदीय कार्यों की बारीकियों, सदन की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाने के बारे में जानकारी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि सक्षम विधायक और सशक्त विधानसभा ही समृद्ध बिहार के निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को केवल चुनाव जीताने के लिए नहीं भेजती, बल्कि अपनी उम्मीदों, समस्याओं और आकांक्षाओं की आवाज बनने के लिए सदन तक पहुंचाती है। ऐसे में प्रत्येक विधायक का कर्तव्य है कि वह अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का गंभीर अध्ययन करे और उन्हें पूरी तैयारी तथा तथ्यों के साथ विधानसभा में रखे।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज के हर वर्ग की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना भी जरूरी है। सदन में प्रभावी भागीदारी के लिए विधानसभा के नियमों, प्रक्रियाओं और संसदीय परंपराओं की जानकारी होना बेहद आवश्यक है। इसी उद्देश्य से इस प्रकार के प्रशिक्षण और प्रबोधन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण होती है। स्वस्थ लोकतंत्र वही माना जाता है जहां विचारों का आदान-प्रदान हो, रचनात्मक आलोचना हो और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सरकार और विपक्ष यदि विकास तथा जनता के हितों को केंद्र में रखकर काम करें, तो राज्य के विकास की गति कई गुना बढ़ सकती है।

मुख्यमंत्री ने विधायकों से विधानसभा सत्रों में अधिक से अधिक समय देने और सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सदन केवल चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि यही वह स्थान है जहां राज्य के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। इसलिए प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य है कि वह अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी गंभीरता और निष्ठा के साथ करे।

अपने संबोधन में उन्होंने विकसित भारत और समृद्ध बिहार के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश को विकास के नए आयाम तक पहुंचाने और बिहार को आर्थिक, सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका भी बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक और डिजिटल व्यवस्था के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में प्रशासनिक और विधायी प्रक्रियाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ेगा। नई तकनीकों के इस्तेमाल से पारदर्शिता बढ़ेगी, कार्यों में तेजी आएगी और आम लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर लगातार काम कर रही है। सार्वजनिक और निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से बस स्टैंड, टाउनशिप और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान सहयोग कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों से इसमें सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करते हुए कहा कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों तक सरकारी सेवाओं और न्याय को पहुंचाने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका सबसे अहम होती है। यदि सभी प्रतिनिधि इस दिशा में सक्रिय रूप से काम करें, तो आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने एक बड़ी घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि 15 जुलाई से बिहार के विभिन्न प्रखंडों में 213 नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत होने जा रही है। इस पहल को राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों को अपने घर के पास ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र केवल इसलिए उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं क्योंकि उनके क्षेत्र में कॉलेज उपलब्ध नहीं होते। नए कॉलेजों की स्थापना से न केवल शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि युवाओं को बेहतर अवसर भी प्राप्त होंगे। इससे राज्य के मानव संसाधन विकास को मजबूती मिलेगी और बिहार की प्रगति में नई ऊर्जा का संचार होगा।

गया में आयोजित यह दो दिवसीय कार्यक्रम नवनिर्वाचित विधायकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें संसदीय मर्यादाओं, विधायी प्रक्रियाओं और जनसेवा की भावना को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों और अनुभवी वक्ताओं द्वारा विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है, जिससे प्रतिनिधियों की कार्यक्षमता और नेतृत्व क्षमता को मजबूत किया जा सके।

उद्घाटन सत्र के बाद उपस्थित सभी प्रमुख अतिथियों, मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों ने सामूहिक तस्वीर भी खिंचवाई। कार्यक्रम में विधानसभा और विधान परिषद से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी, मंत्रिमंडल के सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के प्रबोधन कार्यक्रम भविष्य में जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि विधायक संसदीय प्रक्रियाओं और अपने अधिकारों एवं दायित्वों को बेहतर ढंग से समझेंगे, तो इसका सीधा लाभ जनता और राज्य के विकास को मिलेगा।

गया में शुरू हुआ यह कार्यक्रम केवल एक प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि बिहार की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यही सक्षम नेतृत्व और प्रभावी विधानसभा राज्य को विकास, सुशासन और समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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