कहलगांव में विश्व जनसंख्या दिवस पर चला शक्ति संवाद अभियान, 84 विद्यालयों में बाल विवाह रोकने और बेटियों को सशक्त बनाने का संदेश

विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर भागलपुर जिले के कहलगांव अनुमंडल में बालिकाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा और सुरक्षा को केंद्र में रखकर एक बड़े जनजागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। “शक्ति संवाद” नाम से शुरू किए गए इस अभियान के माध्यम से बेटियों को आत्मनिर्भर, जागरूक और आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में एक व्यापक पहल की गई। प्रशासन का मानना है कि यदि समाज को मजबूत और विकसित बनाना है तो सबसे पहले बेटियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूत आधार प्रदान करना होगा।

इस विशेष अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि कहलगांव अनुमंडल के सभी 84 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में एक साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। एक ही दिन इतने बड़े स्तर पर चलाए गए इस अभियान ने शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में नई मिसाल पेश की। विद्यालयों में छात्राओं के साथ संवाद स्थापित करने के लिए विभिन्न विभागों की महिला अधिकारियों और पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने छात्राओं के साथ खुलकर बातचीत की और जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी साझा की।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षा के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। छात्राओं को बताया गया कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वतंत्र पहचान का आधार भी है। अधिकारियों ने छात्राओं को अपने सपनों को सीमित न रखने और जीवन में बड़े लक्ष्य तय करने के लिए प्रेरित किया। उन्हें यह संदेश दिया गया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद निरंतर प्रयास और शिक्षा के माध्यम से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

शक्ति संवाद अभियान के दौरान स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े विषय भी चर्चा के केंद्र में रहे। छात्राओं को संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। किशोरावस्था में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर जागरूकता बढ़ाने और सही समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए भी प्रेरित किया गया।

मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने छात्राओं से इस विषय पर खुलकर बातचीत की और उनसे जुड़ी भ्रांतियों तथा सामाजिक संकोच को दूर करने का प्रयास किया। उन्हें स्वच्छता बनाए रखने, स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां अपनाने और इस विषय पर परिवार तथा समाज में खुली चर्चा को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम में महिला सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे आधुनिक समय के महत्वपूर्ण विषयों को भी शामिल किया गया। छात्राओं को ऑनलाइन धोखाधड़ी, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, निजी जानकारी की सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सतर्क रहने के उपाय बताए गए। इसके साथ ही उन्हें हेल्पलाइन नंबरों, कानूनी अधिकारों और आपातकालीन सहायता सेवाओं की जानकारी भी दी गई ताकि किसी भी कठिन परिस्थिति में वे तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।

करियर मार्गदर्शन और कौशल विकास भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। छात्राओं को विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध करियर विकल्पों, प्रतियोगी परीक्षाओं, तकनीकी शिक्षा और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि बदलते समय में केवल पारंपरिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि तकनीकी और व्यावसायिक कौशल भी सफलता के लिए जरूरी हैं।

अभियान के दौरान बाल विवाह उन्मूलन को सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में रखा गया। छात्राओं और छात्रों को कम उम्र में विवाह के सामाजिक, शारीरिक और मानसिक दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया। यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक समस्या नहीं बल्कि बच्चों के अधिकारों और भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही इस कुरीति को समाप्त किया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान पांच हजार से अधिक छात्राओं का हीमोग्लोबिन परीक्षण भी किया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरियों में खून की कमी एक बड़ी समस्या है, जिसका प्रभाव उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य और भविष्य पर पड़ता है। जांच के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान कर समय पर उपचार और पोषण संबंधी सलाह उपलब्ध कराई जा सकेगी।

इसके अलावा आठ हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने बाल विवाह के खिलाफ शपथ ली और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आयरन की गोलियों का सेवन भी किया। प्रशासन का मानना है कि स्वस्थ और शिक्षित युवा ही राज्य और समाज के विकास की मजबूत नींव बन सकते हैं।

बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन ने बहुस्तरीय रणनीति तैयार की है। प्रत्येक प्रखंड में एक समन्वित टीम का गठन किया गया है, जिसमें शिक्षा, महिला विकास, बाल संरक्षण और सामाजिक कल्याण विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। इन टीमों का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह की घटनाओं की पहचान करना, समय पर हस्तक्षेप करना और प्रभावित परिवारों को जागरूक करना होगा।

विद्यालय स्तर पर भी विशेष व्यवस्था की जा रही है। प्रत्येक स्कूल में बाल विवाह निषेध शिक्षक और सहायक शिक्षक नामित किए जा रहे हैं, जो विद्यार्थियों के बीच जागरूकता फैलाने के साथ-साथ संदिग्ध मामलों की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे स्कूल स्तर पर निगरानी और जागरूकता दोनों को मजबूती मिलेगी।

पंचायत स्तर पर भी विशेष समितियों का गठन किया गया है ताकि समाज की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज, परिवार, शिक्षक और स्थानीय प्रतिनिधियों को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने नाटक, गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से बाल विवाह उन्मूलन और महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया। इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने के साथ-साथ सामाजिक बदलाव की आवश्यकता को भी प्रभावी ढंग से सामने रखा।

कार्यक्रम में मौजूद छात्राओं और नागरिकों ने बाल विवाह के खिलाफ शपथ लेते हुए अपने परिवार, गांव और समाज में इस सामाजिक बुराई को रोकने का संकल्प लिया। यह संकल्प केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल कानून का पालन सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां प्रत्येक बेटी को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान के समान अवसर प्राप्त हों। लक्ष्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहां लड़कियां बिना किसी भय और भेदभाव के अपने सपनों को पूरा कर सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बेटियों को सही अवसर और समर्थन मिले तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। इसी सोच के साथ कहलगांव में शुरू हुआ शक्ति संवाद अभियान एक सामाजिक आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

इस पहल के माध्यम से प्रशासन ने समाज के सभी वर्गों से आगे आकर सहयोग करने की अपील की है। संदेश साफ है कि जब एक बेटी शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनती है, तब केवल उसका जीवन नहीं बदलता बल्कि पूरे परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास का मार्ग भी मजबूत होता है।

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