JDU में बड़ी कार्रवाई: पूर्व प्रदेश महासचिव छोटू सिंह 6 साल के लिए निष्कासित, प्रदेश कमेटी को लेकर विरोध पड़ा भारी

पटना: जनता दल (यूनाइटेड) ने संगठन के भीतर अनुशासनहीनता पर बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व प्रदेश महासचिव अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह को पार्टी से 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है। प्रदेश कमेटी में जगह नहीं मिलने के बाद लगातार विरोध और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जताने के बीच यह फैसला लिया गया।

प्रदेश अध्यक्ष ने जारी किया निष्कासन आदेश

जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि दल विरोधी आचरण को देखते हुए छोटू सिंह की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित किया जाता है।

संजय झा के आवास पर हुई थी बहस

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को छोटू सिंह जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पहुंचे थे। वहां प्रदेश कमेटी में शामिल नहीं किए जाने को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई और बातचीत के दौरान बहस भी हुई।

सूत्रों के मुताबिक, छोटू सिंह के रवैये से संजय झा नाराज हो गए और उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि “माहौल बनाने की कोशिश मत कीजिए।”

बताया जा रहा है कि छोटू सिंह ने जवाब में कहा कि माहौल बनाने की कोशिश वे नहीं, बल्कि जदयू एमएलसी संजय गांधी कर रहे हैं। उन्होंने एमएलसी ललन सर्राफ का भी नाम लिया और संगठन में कुछ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए।

नई प्रदेश कमेटी के गठन के बाद बढ़ी नाराजगी

दो दिन पहले जदयू ने अपनी नई प्रदेश कमेटी का गठन किया था। नई कमेटी में 125 से अधिक नेताओं को शामिल किया गया है। पार्टी ने 12 उपाध्यक्ष, 38 महासचिव, 74 सचिव नियुक्त किए हैं। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक प्रकोष्ठों का भी गठन किया गया है।

हालांकि नई सूची जारी होने के बाद कई पुराने नेताओं को संगठन में जगह नहीं मिलने से असंतोष सामने आया। छोटू सिंह भी उन्हीं नेताओं में शामिल थे, जिन्हें इस बार प्रदेश कमेटी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई।

विरोध के बाद हुई सख्त कार्रवाई

प्रदेश कमेटी में स्थान नहीं मिलने के बाद छोटू सिंह लगातार विरोध जता रहे थे। संजय झा के आवास पर हुई बहस के कुछ ही घंटों बाद प्रदेश नेतृत्व ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

जदयू की इस कार्रवाई को संगठन में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे नई प्रदेश कमेटी को लेकर उभरे असंतोष पर पार्टी का सख्त संदेश भी माना जा रहा है।

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