फिल्म निर्माता धर्मेश सांगाणी पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, FEMA जांच में विदेशी संपत्तियों और बैंक खातों से जुड़े अहम दस्तावेज मिले

मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े एक मामले में कारोबारी और फिल्म निर्माता धर्मेश नरेंद्र सांगाणी तथा उनकी कंपनी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने मुंबई स्थित कई परिसरों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं। ईडी का दावा है कि शुरुआती जांच में अघोषित विदेशी संपत्तियों, विदेशों में बैंक खातों और संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं। इस कार्रवाई के बाद कारोबारी और फिल्म जगत में हलचल तेज हो गई है।

ईडी के अनुसार यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत की गई। जांच एजेंसी का कहना है कि तलाशी अभियान के दौरान कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनके आधार पर विदेशों में निवेश, बैंक खातों और कंपनियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच आगे बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि जब्त किए गए डिजिटल उपकरण और दस्तावेज इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

जांच एजेंसी के मुताबिक प्रारंभिक जांच में ऐसे रिकॉर्ड सामने आए हैं, जिनसे कनाडा, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में कथित तौर पर संचालित कुछ बैंक खातों और वित्तीय गतिविधियों की जानकारी मिली है। ईडी का दावा है कि इन खातों और निवेश से जुड़ी पूरी जानकारी नियमानुसार घोषित नहीं की गई थी। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन वित्तीय लेनदेन में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के किन-किन प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है।

ईडी का यह भी कहना है कि जांच के दौरान कनाडा में स्थित एक कंपनी में धर्मेश सांगाणी की कथित हिस्सेदारी से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं। एजेंसी का आरोप है कि इस हिस्सेदारी और उससे जुड़े निवेश की जानकारी निर्धारित नियमों के अनुसार संबंधित प्राधिकरणों को उपलब्ध नहीं कराई गई। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी और अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसी तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर सामने आएंगे।

जांच में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू निर्यात से जुड़ी विदेशी आय को लेकर भी सामने आया है। ईडी के अनुसार विदेशी खरीदारों से प्राप्त होने वाली कुछ निर्यात राशि भारत नहीं लाई गई। एजेंसी का दावा है कि भुगतान अवधि बढ़ाने के लिए अधिकृत डीलर बैंक से आवश्यक अनुमति भी नहीं ली गई। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो इन्हें FEMA के प्रावधानों का उल्लंघन माना जा सकता है। फिलहाल इन सभी बिंदुओं की विस्तार से जांच जारी है।

छापेमारी के दौरान एक और घटनाक्रम ने जांच एजेंसी का ध्यान आकर्षित किया। ईडी का दावा है कि तलाशी के समय धर्मेश सांगाणी ने अपना मोबाइल फोन कथित तौर पर इमारत की 13वीं मंजिल से नीचे फेंक दिया। एजेंसी का आरोप है कि ऐसा डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया। हालांकि जांच टीम ने मोबाइल फोन बरामद कर लिया और अब उसकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। ईडी ने इस पूरे घटनाक्रम को भी जांच का हिस्सा बनाया है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

जांच अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों से प्राप्त डाटा की तकनीकी जांच की जाएगी। इससे वित्तीय लेनदेन, ईमेल, दस्तावेज और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जाएगा, जिससे पूरे नेटवर्क और संभावित लेनदेन की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

धर्मेश सांगाणी कारोबारी होने के साथ-साथ फिल्म और टेलीविजन क्षेत्र से भी लंबे समय से जुड़े रहे हैं। उन्होंने विभिन्न फिल्म और मीडिया परियोजनाओं में निवेश किया है और कई प्रोडक्शन गतिविधियों का हिस्सा रहे हैं। मनोरंजन उद्योग में उनकी पहचान एक निर्माता और व्यवसायी दोनों रूपों में रही है। यही कारण है कि ईडी की कार्रवाई के बाद फिल्म जगत में भी इस मामले को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

धर्मेश सांगाणी अभिनेता और टीवी प्रस्तोता शेखर सुमन के साथ एक फिल्म अकादमी के सह-संस्थापक भी रहे हैं। इसके अलावा वे मीडिया और मनोरंजन से जुड़ी कई अन्य परियोजनाओं में भी सक्रिय रहे हैं। हाल के वर्षों में विभिन्न डिजिटल और टेलीविजन प्रोडक्शन से उनका नाम जुड़ता रहा है।

हालांकि जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान कार्रवाई धर्मेश सांगाणी और उनकी कंपनी से जुड़े वित्तीय मामलों तक सीमित है। एजेंसी की ओर से सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई जानकारी साझा नहीं की गई है, जिसमें अभिनेता शेखर सुमन के खिलाफ किसी प्रकार की जांच या आरोप की पुष्टि की गई हो। इसलिए मौजूदा जांच को केवल धर्मेश सांगाणी और उनके कारोबारी लेनदेन से जुड़े मामलों के संदर्भ में ही देखा जा रहा है।

धर्मेश सांगाणी इससे पहले भी विवादों में रह चुके हैं। वर्ष 2016 में ब्रिटेन में सीमा शुल्क अधिकारियों ने उनके पास से बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण जब्त किए थे। उस समय आरोप था कि आभूषणों की वास्तविक मात्रा घोषित नहीं की गई थी। इसके अलावा वे वित्तीय लेनदेन से जुड़े एक अन्य मामले में अमेरिकी सीमा शुल्क अधिकारियों की जांच के दायरे में भी आ चुके हैं। हालांकि उन मामलों की कानूनी स्थिति अलग-अलग रही है और वर्तमान जांच का उनसे प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं किया गया है।

वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत विदेशों में निवेश, बैंक खाते, विदेशी कंपनियों में हिस्सेदारी और विदेशी आय से जुड़े सभी लेनदेन की जानकारी निर्धारित नियमों के अनुसार देना अनिवार्य होता है। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जांच एजेंसियां दस्तावेजों की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करती हैं।

फिलहाल ईडी जब्त किए गए दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन का विस्तृत विश्लेषण कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन आरोपों की पुष्टि होती है और आगे किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एजेंसी ने अभी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि विदेशी वित्तीय लेनदेन, अंतरराष्ट्रीय निवेश और विदेशी संपत्तियों से जुड़े मामलों में नियामकीय एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ इस प्रकरण में और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की संभावना है। फिलहाल सभी की निगाहें ईडी की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

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