
पटना। बिहार में टोल टैक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और डिजिटल बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने नई टोल टैक्स नीति लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब टोल प्लाजा पर भुगतान किए बिना निकलने या जानबूझकर टोल शुल्क जमा नहीं करने वाले वाहन मालिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं करने पर वाहन मालिकों से दोगुना टोल टैक्स वसूला जाएगा। इसके अलावा लगातार भुगतान नहीं करने वालों के खिलाफ कई प्रशासनिक प्रतिबंध भी लगाए जाएंगे, जिससे वाहन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
सरकार की ओर से जारी नई अधिसूचना के अनुसार सभी संबंधित एजेंसियों और टोल संचालकों को इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य केवल जुर्माना लगाना नहीं, बल्कि टोल वसूली प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाकर राजस्व की पारदर्शिता बढ़ाना और सड़क एवं पुलों के रखरखाव के लिए आवश्यक संसाधन सुनिश्चित करना है।
नई नीति के तहत यदि कोई वाहन चालक टोल प्लाजा पर बिना शुल्क दिए निकल जाता है या किसी कारण से भुगतान नहीं करता है, तो सबसे पहले उसके वाहन के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ई-नोटिस भेजा जाएगा। इस नोटिस के माध्यम से वाहन मालिक को बकाया टोल राशि की जानकारी दी जाएगी और भुगतान के लिए निर्धारित समय भी बताया जाएगा।
सरकार ने वाहन मालिकों को राहत देते हुए 72 घंटे की समय सीमा तय की है। यदि ई-नोटिस मिलने के बाद वाहन मालिक 72 घंटे के भीतर बकाया टोल टैक्स जमा कर देता है, तो उसे केवल मूल टोल राशि का ही भुगतान करना होगा। इस अवधि के दौरान किसी प्रकार का अतिरिक्त जुर्माना या दंडात्मक शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी तकनीकी कारण, जल्दबाजी या अन्य वजह से भुगतान नहीं हो पाया हो, तो वाहन मालिक को अपनी गलती सुधारने का अवसर मिल सके।
हालांकि यदि निर्धारित 72 घंटे के भीतर भी भुगतान नहीं किया जाता है, तो नियम स्वतः सख्त हो जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित वाहन मालिक को मूल राशि के बजाय दोगुना टोल टैक्स जमा करना होगा। विभाग का कहना है कि यह प्रावधान जानबूझकर टोल भुगतान से बचने वाले लोगों को रोकने के लिए लागू किया गया है।
नई नीति में 15 दिनों की समय सीमा भी निर्धारित की गई है। यदि वाहन मालिक ई-नोटिस मिलने के बाद 15 दिनों तक भी बकाया राशि जमा नहीं करता है, तो राज्य में कहीं भी वाहन की जांच के दौरान उसे रोका जा सकता है। इसके बाद मौके पर ही बकाया टोल टैक्स और निर्धारित जुर्माना वसूला जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से लंबे समय तक भुगतान टालने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
सरकार ने लगातार नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन मालिकों के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक कार्रवाई का भी प्रावधान किया है। यदि निर्धारित समय के बाद भी बकाया राशि जमा नहीं होती है, तो वाहन से जुड़ी कई आवश्यक सेवाओं पर रोक लगाई जा सकती है। ऐसी स्थिति में वाहन का बीमा नवीनीकरण, स्वामित्व हस्तांतरण, प्रदूषण प्रमाणपत्र (पीयूसी) बनवाने तथा अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्राप्त करने जैसी सुविधाएं तब तक उपलब्ध नहीं होंगी, जब तक पूरा बकाया और जुर्माना जमा नहीं कर दिया जाता।
नई नीति में वाहन मालिकों के अधिकारों का भी ध्यान रखा गया है। यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके नाम पर जारी किया गया ई-नोटिस गलत है या किसी तकनीकी त्रुटि के कारण उसे भेजा गया है, तो वह निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकता है। यह आपत्ति ई-नोटिस मिलने के 72 घंटे के भीतर दर्ज करनी होगी।
विभाग के अनुसार ऑनलाइन शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारी को अधिकतम पांच दिनों के भीतर पूरे मामले की जांच कर निर्णय लेना होगा। जांच पूरी होने के बाद वाहन मालिक को एसएमएस के माध्यम से परिणाम की जानकारी भेजी जाएगी। यदि निर्धारित समय के भीतर विभाग कोई निर्णय नहीं देता है, तो संबंधित टोल शुल्क स्वतः निरस्त माना जाएगा और इसकी जानकारी पोर्टल पर भी अपडेट कर दी जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य गलत नोटिस मिलने की स्थिति में वाहन मालिकों को त्वरित राहत देना है।
नई टोल नीति फिलहाल उन राज्य राजमार्गों और पुलों पर लागू होगी, जहां व्यावसायिक वाहनों से टोल टैक्स वसूला जाता है। राज्य सरकार पहले ही ऐसे सभी मार्गों और पुलों की सूची जारी कर चुकी है। विभाग का कहना है कि भविष्य में आवश्यकता के अनुसार इस व्यवस्था का दायरा भी बढ़ाया जा सकता है।
पथ निर्माण विभाग का मानना है कि डिजिटल टोल प्रबंधन प्रणाली लागू होने से नकद लेनदेन में कमी आएगी, राजस्व संग्रह अधिक पारदर्शी होगा और टोल चोरी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। इसके अलावा प्रत्येक वाहन का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से बकाया राशि की निगरानी भी आसान होगी।
परिवहन और सड़क अवसंरचना से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कई राज्यों में डिजिटल टोल प्रबंधन प्रणाली पहले से लागू है और इससे राजस्व संग्रह में सुधार के साथ-साथ विवादों में भी कमी आई है। बिहार में भी इस नई व्यवस्था से टोल वसूली प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
अधिकारियों ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे टोल प्लाजा पर निर्धारित शुल्क का समय पर भुगतान करें और यदि किसी कारण से ई-नोटिस प्राप्त होता है तो उसे नजरअंदाज न करें। समय सीमा के भीतर भुगतान करने से अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचा जा सकता है। साथ ही यदि किसी नोटिस को लेकर कोई संदेह हो तो निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर उसका समाधान प्राप्त किया जा सकता है।
नई टोल टैक्स नीति के लागू होने के बाद अब बिहार में टोल भुगतान से जुड़े नियम पहले की तुलना में अधिक सख्त हो गए हैं। सरकार का उद्देश्य सड़क और पुलों के रखरखाव के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने के साथ-साथ टोल संग्रह प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। ऐसे में वाहन मालिकों के लिए जरूरी है कि वे नए नियमों की जानकारी रखें और निर्धारित समय के भीतर टोल शुल्क का भुगतान कर अनावश्यक जुर्माने तथा प्रशासनिक कार्रवाई से बचें।


