भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई मजबूती: 18 अहम समझौतों पर मुहर, रक्षा, परमाणु ऊर्जा और दुर्लभ खनिजों में बढ़ेगा सहयोग

मेलबर्न: भारत और ऑस्ट्रेलिया ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए रक्षा, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, दुर्लभ खनिज, व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 18 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद इन समझौतों को अंतिम रूप दिया गया। इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

बैठक के बाद दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार हो रहा है। दोनों देशों ने मुक्त, सुरक्षित और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग

समझौतों के तहत भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की आपूर्ति का रास्ता और मजबूत होगा। इसका उपयोग भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जाएगा। दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई।

दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर विशेष जोर

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने क्रिटिकल मिनरल्स यानी दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर भी सहमति बनाई है। इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, बैटरी और रक्षा उपकरणों के निर्माण में इन खनिजों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दोनों देशों का लक्ष्य इस क्षेत्र में चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने और वैकल्पिक आपूर्ति तंत्र तैयार करना है।

रक्षा और समुद्री सुरक्षा होगी मजबूत

समझौतों के तहत दोनों देश रक्षा उत्पादन, सैन्य तकनीक, समुद्री सुरक्षा और संयुक्त अभ्यासों में सहयोग बढ़ाएंगे। इसके अलावा रक्षा उपकरणों के विकास, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और सेनाओं के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाएगा। जहाजों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ेगी।

व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक सहयोग को गति देने, निवेश संरक्षण और उद्योगों के बीच साझेदारी मजबूत करने पर भी सहमति जताई। इससे भारतीय कंपनियों को ऑस्ट्रेलिया में और ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत में निवेश के नए अवसर मिलेंगे। व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

शिक्षा, विज्ञान और तकनीक में भी सहयोग

बैठक में उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, डिजिटल तकनीक, साइबर सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों ने विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और तकनीकी संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को नई गति मिलेगी।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों से भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों की आर्थिक और सुरक्षा संबंधी क्षमताओं को नया बल मिलेगा। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्ग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में भी इन समझौतों की अहम भूमिका रहेगी।

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