
भागलपुर में पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं को तय समय-सीमा में पूरा करने के उद्देश्य से जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (डीडब्ल्यूएसएम) की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। समीक्षा भवन में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता अपर समाहर्ता (विधि-व्यवस्था) सह प्रभारी जिलाधिकारी राकेश रंजन ने की। बैठक में जिले में चल रही पेयजल योजनाओं, हर घर जल अभियान, स्वच्छता कार्यक्रम, जल गुणवत्ता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से सुनिश्चित किया जाए ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बैठक के दौरान जिले में संचालित विभिन्न पेयजल योजनाओं की वर्तमान स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया। जलापूर्ति योजनाओं के संचालन, अनुरक्षण, पंप ऑपरेटरों और अनुरक्षकों के मानदेय भुगतान, बिजली बिलों के नियमित भुगतान तथा जलापूर्ति व्यवस्था में आने वाली बाधाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कई क्षेत्रों में योजनाएं बेहतर ढंग से संचालित हो रही हैं, जबकि कुछ स्थानों पर सुधार की आवश्यकता है। बैठक में निर्देश दिया गया कि जिन इलाकों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है, वहां तत्काल आवश्यक कार्रवाई कर समस्या का समाधान किया जाए।
बैठक में पेयजल संबंधी शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निपटारे पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि शिकायत मिलने के बाद उसका शीघ्र सत्यापन करते हुए निर्धारित समय के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जल गुणवत्ता की नियमित जांच करने और लोगों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने का निर्णय लिया गया। जल गुणवत्ता से जुड़े सभी मानकों का पालन करने और समय-समय पर पानी के नमूनों की जांच कराने के निर्देश भी दिए गए।
हर घर जल योजना की समीक्षा के दौरान योजना के प्रमाणीकरण कार्य की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि जिन क्षेत्रों में जलापूर्ति की व्यवस्था पूरी हो चुकी है, वहां प्रमाणन प्रक्रिया को भी तेजी से पूरा किया जा रहा है। इसके अलावा सुजलम भारत डाटाबेस को अद्यतन रखने तथा सभी योजनाओं से जुड़ी सूचनाओं को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए, ताकि भविष्य की योजनाओं के संचालन और निगरानी में आसानी हो सके।
बैठक में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान और वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्यान्वयन योजना की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि स्वच्छता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों को पंचायत स्तर तक प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। आगामी महीनों में स्वच्छता से जुड़े लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया।
व्यक्तिगत शौचालय निर्माण योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में 24 हजार लाभार्थियों को शौचालय निर्माण का लक्ष्य दिया गया है। इनमें से अब तक 10,952 लाभार्थियों को भुगतान किया जा चुका है। शेष लाभार्थियों की जियो-टैगिंग और भुगतान प्रक्रिया तेजी से जारी है। अधिकारियों ने बताया कि अगले दो महीनों के भीतर सभी लंबित भुगतान पूरे करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि किसी भी पात्र लाभार्थी का भुगतान अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहना चाहिए।
सामुदायिक स्वच्छता परिसरों के निर्माण की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। जिले में प्रस्तावित 10 सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण समय-सीमा के भीतर पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि इन परिसरों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाओं का विस्तार होगा और लोगों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि अब प्रत्येक घर में चार प्रकार के कचरे—गीला, सूखा, मेडिकल और बायो-हैजार्डस अपशिष्ट—को अलग-अलग रखने की व्यवस्था लागू की जा रही है। इस चार-स्तरीय कचरा पृथक्करण प्रणाली को ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में काम चल रहा है।
समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि जिले की लगभग 25 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में चार प्रकार के कचरे के पृथक्करण की व्यवस्था लागू की जा चुकी है। शेष पंचायतों में अतिरिक्त डस्टबिन उपलब्ध कराकर अगले एक महीने के भीतर इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था मजबूत होने से स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
गोराडीह प्रखंड की विशनपुर जिछो ग्राम पंचायत में गोवर्धन योजना के तहत संचालित बायोगैस प्लांट की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि संयंत्र फिलहाल अपनी पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रहा है। इस पर संबंधित एजेंसी को आवश्यक सुधार करने, तकनीकी कमियों को दूर करने तथा प्लांट को पूर्ण क्षमता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही संचालन और अनुरक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया, ताकि जैविक अपशिष्ट का बेहतर उपयोग हो सके।
स्वच्छता पर्यवेक्षकों और स्वच्छता कर्मियों के मानदेय भुगतान की भी समीक्षा की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि नवंबर 2025 तक का भुगतान संबंधित ग्राम पंचायतों को उपलब्ध करा दिया गया है। भविष्य में भुगतान प्रक्रिया नियमित बनी रहे, इसके लिए 15वें वित्त आयोग और राज्य योजना के अभिसरण के माध्यम से पंचायत स्तर पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने कहा कि समय पर मानदेय मिलने से स्वच्छता कार्यों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में सुधार आएगा।
नल-जल योजनाओं की संयुक्त जांच प्रतिवेदनों की समीक्षा के दौरान लंबित मामलों पर भी चर्चा हुई। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई तुरंत की जाए और जिन योजनाओं में तकनीकी या प्रशासनिक कमियां हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। साथ ही सभी लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
बैठक के अंत में अध्यक्षता कर रहे राकेश रंजन ने सभी विभागों और कार्यान्वयन एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पेयजल योजनाओं का संचालन बिना किसी बाधा के जारी रहे, जलापूर्ति संबंधी शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया जाए, जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाए, लंबित भुगतानों का शीघ्र निपटारा किया जाए तथा सभी विकास योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि पेयजल और स्वच्छता से जुड़ी योजनाएं सीधे आम लोगों के जीवन से जुड़ी हैं, इसलिए इनके क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला जल एवं स्वच्छता मिशन से जुड़े पदाधिकारी तथा कार्यान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।


