भागलपुर में 12 जुलाई को होगा अंगशिखर शिखर सम्मेलन, अंग क्षेत्र के विकास और सांस्कृतिक विरासत पर होगा व्यापक मंथन

भागलपुर: ऐतिहासिक अंग प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक विरासत और समग्र विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से 12 जुलाई 2026 को भागलपुर के टाउन हॉल में “अंगशिखर शिखर सम्मेलन” का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और आयोजकों का दावा है कि यह कार्यक्रम अंग क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

आयोजन से जुड़े साहित्यकार संजय कुमार सुमन ने जानकारी देते हुए बताया कि सम्मेलन का मूल उद्देश्य अंग क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को सशक्त करना, विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक विमर्श करना और सरकार तथा समाज का ध्यान इस क्षेत्र की समस्याओं और संभावनाओं की ओर आकर्षित करना है। उनका कहना है कि लंबे समय से अंग क्षेत्र के विकास, भाषा, संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे अपेक्षित प्राथमिकता नहीं पा सके हैं। ऐसे में यह सम्मेलन भविष्य की दिशा तय करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में भागलपुर, बांका, मुंगेर, खगड़िया, बेगूसराय, कटिहार, पूर्णिया, मधेपुरा सहित अंग क्षेत्र के विभिन्न जिलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा झारखंड के सीमावर्ती इलाकों से भी शिक्षाविद, साहित्यकार, समाजसेवी, उद्यमी, शोधकर्ता, सांस्कृतिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग कार्यक्रम में भाग लेंगे। सम्मेलन के माध्यम से क्षेत्रीय विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर साझा रणनीति तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।

अंगशिखर शिखर सम्मेलन में राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। आयोजकों का मानना है कि अंग क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, कृषि, व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के मामले में समृद्ध होने के बावजूद अपेक्षित गति से विकास नहीं कर पाया है। रोजगार के सीमित अवसर, औद्योगिक विकास की कमी, आधारभूत संरचना की चुनौतियां और युवाओं का पलायन जैसे मुद्दे आज भी इस क्षेत्र के सामने प्रमुख चुनौतियों के रूप में मौजूद हैं। सम्मेलन में इन विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे और संभावित समाधान पर चर्चा करेंगे।

कार्यक्रम में अंगिका भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर भी विशेष फोकस रहेगा। आयोजकों का कहना है कि अंगिका केवल एक भाषा नहीं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सम्मेलन के दौरान भाषा के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और नई पीढ़ी तक इसके प्रभावी प्रसार को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। साथ ही लोक साहित्य, लोक कला, लोक संगीत और पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के उपायों पर भी चर्चा होगी।

सम्मेलन में 12 प्रमुख वक्ता विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। इनमें शिक्षा, विज्ञान, कृषि, उद्योग, साहित्य, संस्कृति, रोजगार, सामाजिक विकास और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहेंगे। वक्ता अंग क्षेत्र के समग्र विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीति, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और सांस्कृतिक पुनर्जागरण से जुड़े मुद्दों पर अपने सुझाव देंगे।

आयोजकों के अनुसार सम्मेलन केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य की कार्ययोजना तैयार करने का भी प्रयास किया जाएगा। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के सुझावों को संकलित कर क्षेत्र के विकास के लिए एक व्यापक दृष्टि-पत्र तैयार करने की योजना है। इस दस्तावेज़ के माध्यम से सरकार, नीति-निर्माताओं और संबंधित संस्थाओं के समक्ष क्षेत्र की प्रमुख आवश्यकताओं और संभावित योजनाओं को रखा जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 100 विशिष्ट व्यक्तित्वों को “अंग गौरव सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, विज्ञान, समाज सेवा, कृषि, उद्योग, चिकित्सा, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित कर उनके योगदान को नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इससे समाज में सकारात्मक कार्यों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा सम्मेलन के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले 50 समर्पित कार्यकर्ताओं को “अंगबीर विशेष सम्मान” प्रदान किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि सामाजिक और सांस्कृतिक अभियानों को सफल बनाने में कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और उनके योगदान को सम्मानित करना आवश्यक है।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन, स्वागत गीत और अतिथियों के अभिनंदन के साथ होगी। इसके बाद विभिन्न विषयों पर विचार गोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसमें विशेषज्ञ और आमंत्रित वक्ता अपने विचार साझा करेंगे। सम्मेलन के अंत में सम्मान समारोह और धन्यवाद ज्ञापन का आयोजन होगा।

आयोजकों ने बताया कि सम्मेलन में युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। उनका मानना है कि क्षेत्र के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण की जिम्मेदारी नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी के बिना पूरी नहीं हो सकती। इसलिए विद्यार्थियों, शोधार्थियों, युवा उद्यमियों और सामाजिक संगठनों को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है ताकि वे अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत कर सकें।

सम्मेलन के माध्यम से अंग क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं, कृषि आधारित उद्योगों के विकास, स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन, रोजगार सृजन, शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और आधारभूत संरचना के विकास जैसे विषयों पर भी चर्चा किए जाने की संभावना है। आयोजकों का मानना है कि यदि इन क्षेत्रों में समन्वित प्रयास किए जाएं तो अंग क्षेत्र आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

संजय कुमार सुमन ने अंग क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, साहित्यकारों, समाजसेवियों, उद्यमियों, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों से सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि अंग क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और समग्र विकास को नई दिशा देने की सामूहिक पहल है।

आयोजकों को उम्मीद है कि 12 जुलाई को आयोजित होने वाला अंगशिखर शिखर सम्मेलन क्षेत्र के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक संवाद का मंच बनेगा। साथ ही सम्मेलन से निकलने वाले सुझाव और विचार भविष्य में अंग क्षेत्र की विकास यात्रा को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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