
भागलपुर: “आम के आम, गुठलियों के दाम” वाली कहावत अब सच साबित होती दिख रही है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के वैज्ञानिकों ने आम की गुठलियों से पाउडर और बटर ऑयल तैयार करने की नई तकनीक विकसित की है। इस नवाचार से जहां कृषि अपशिष्ट का बेहतर उपयोग संभव होगा, वहीं किसानों और उद्यमियों के लिए आय के नए अवसर भी खुलेंगे।
आधुनिक तकनीक से तैयार हो रहे उत्पाद
बीएयू के वैज्ञानिकों ने इस शोध में रिफ्रैक्टेंस विंडो ड्राइंग (Reflectance Window Drying) और कोल्ड-प्रेस एक्सट्रैक्शन (Cold Press Extraction) तकनीक का उपयोग किया है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर देशभर में लागू करना है।
कैसे शुरू हुआ यह शोध?
नेचर क्लब के सचिव एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. अवधेश पॉल ने बताया कि पहले क्लब के स्वयंसेवक पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से आम सहित विभिन्न फलों की गुठलियां एकत्रित करते थे और पौधारोपण के लिए लोगों को प्रेरित करते थे। इसी दौरान वैज्ञानिकों ने गुठलियों के वैकल्पिक उपयोग पर शोध शुरू किया और कई उपयोगी उत्पाद विकसित करने में सफलता हासिल की।
डॉ. अवधेश पॉल ने कहा:
“फलों की गुठलियों के बेहतर उपयोग पर शोध के दौरान हमने कई उपयोगी उत्पाद विकसित किए हैं। इससे लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है कि जिन्हें अब तक बेकार समझा जाता था, वे भी मूल्यवान संसाधन हैं।”
ऐसे बनता है पाउडर और बटर ऑयल
कृषि वैज्ञानिक डॉ. कंचन कुमारी के अनुसार, आम का गूदा निकालने के बाद बची गुठलियों को पहले सुखाया जाता है। इसके बाद आधुनिक तकनीकों की सहायता से उनका प्रसंस्करण कर पाउडर और बटर ऑयल तैयार किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इन उत्पादों का उपयोग खाद्य उद्योग, कॉस्मेटिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।
किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी मदद
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तकनीक से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में निकलने वाले अपशिष्ट का बेहतर उपयोग होगा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार होगा।
गुठली की गिरी है पोषक तत्वों का भंडार
बागवानी विभाग के चेयरमैन डॉ. अहमार आफताब ने बताया कि आम के कुल वजन का लगभग 10 से 23 प्रतिशत हिस्सा गुठली होती है। पहले इनका उपयोग केवल पौधे तैयार करने के लिए किया जाता था, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने गुठली के अंदर मौजूद गिरी के पोषण और औद्योगिक महत्व को पहचानते हुए उसका नया उपयोग विकसित किया है।
डॉ. अहमार आफताब ने कहा:
“आम की गुठली के अंदर मौजूद गिरी में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसका उपयोग कर तैयार किए गए उत्पाद भविष्य में किसानों और उद्योग दोनों के लिए लाभदायक साबित होंगे।”
यह पहल कृषि अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और मूल्य संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


