बिहार ने हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए केंद्र से मांगा सहयोग, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, बैटरी स्टोरेज और सोलर योजनाओं पर हुई अहम बैठक

पटना। बिहार में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को गति देने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं। ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (बीएसपीएचसीएल) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक एवं ऊर्जा सचिव अजय यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सचिव संतोष कुमार सारंगी से मुलाकात कर राज्य की विभिन्न हरित ऊर्जा परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस), प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना, पीएम-कुसुम योजना, ग्रीन हाइड्रोजन नीति और राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के क्षेत्रीय परिसर की स्थापना जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों को प्राथमिकता से उठाया गया।

बैठक के दौरान बिहार सरकार ने राज्य में 3305 मेगावाट क्षमता वाले ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के विकास के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक स्वीकृति और वित्तीय सहयोग का अनुरोध किया। अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना राज्य में तेजी से विकसित हो रही सौर ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पादित बिजली को प्रभावी ढंग से ग्रिड तक पहुंचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) के विकास का भी प्रस्ताव रखा गया, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनाया जा सके।

ऊर्जा विभाग के अनुसार बिहार के जमुई, बांका, लखीसराय, औरंगाबाद तथा कैमूर जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा परियोजनाओं की संभावनाएं मौजूद हैं। इन क्षेत्रों में भविष्य में स्थापित होने वाले सौर ऊर्जा संयंत्रों से उत्पादित बिजली के प्रभावी उपयोग के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क और ऊर्जा भंडारण प्रणाली की आवश्यकता होगी। इसी उद्देश्य से ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजना को प्राथमिकता दी जा रही है।

बैठक में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के विस्तार पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बिहार सरकार ने केंद्र को बताया कि राज्य में लगभग 58 लाख कुटीर ज्योति उपभोक्ता हैं, जबकि वर्तमान में केवल लगभग 2.5 लाख उपभोक्ताओं को 1.1 किलोवाट क्षमता वाले रूफटॉप सौर संयंत्र लगाने की स्वीकृति मिली है। राज्य सरकार का मानना है कि योजना का लाभ अधिक से अधिक गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों तक पहुंचना चाहिए।

इसी उद्देश्य से बिहार सरकार ने पहले चरण में 10 लाख कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं को प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। बैठक में इस प्रस्ताव को शीघ्र मंजूरी देने का अनुरोध किया गया ताकि अधिक से अधिक परिवार सौर ऊर्जा से जुड़ सकें और बिजली के खर्च में कमी ला सकें।

बैठक के दौरान पीएम-कुसुम योजना (फेज-2) के अंतर्गत राज्य के 1,000 कृषि फीडरों के सोलराइजेशन पर भी चर्चा हुई। इस योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करना और किसानों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना है। अधिकारियों ने बताया कि कृषि फीडरों के सौरकरण से किसानों को नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी और कृषि उत्पादन लागत में भी कमी आएगी।

औरंगाबाद जिले में प्रस्तावित 150 मेगावाट क्षमता वाले एसईसीआई सोलर पार्क को लेकर भी बैठक में विचार-विमर्श हुआ। यह परियोजना राज्य की सबसे महत्वपूर्ण सौर ऊर्जा परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है। इसके माध्यम से बड़ी मात्रा में स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा और बिहार की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

बैठक में बिहार ग्रीन हाइड्रोजन नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा की गई। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन स्वच्छ ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। बिहार सरकार इस क्षेत्र में भी निवेश आकर्षित करने और नई औद्योगिक संभावनाएं विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।

इसके अलावा राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई) का क्षेत्रीय परिसर बिहार में स्थापित करने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। राज्य सरकार का मानना है कि यदि एनआईएसई का क्षेत्रीय केंद्र बिहार में स्थापित होता है तो इससे सौर ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण, तकनीकी विकास और स्थानीय मानव संसाधन के कौशल विकास को नई गति मिलेगी।

ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार ने बैठक के बाद कहा कि बिहार सरकार स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार आने वाले वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है।

ऊर्जा सचिव अजय यादव ने कहा कि प्रस्तावित परियोजनाओं के क्रियान्वयन से राज्य की ऊर्जा अवसंरचना और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और बैटरी ऊर्जा भंडारण जैसी परियोजनाएं भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही हैं। इससे न केवल बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बनेगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों को इन परियोजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से बिजली उत्पादन की लागत कम होगी, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

बैठक के दौरान केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी तथा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने बिहार सरकार द्वारा प्रस्तुत सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और बिहार के प्रस्तावों का नियमानुसार परीक्षण कर आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन परियोजनाओं को समय पर मंजूरी मिलती है तो बिहार की ऊर्जा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, बिजली वितरण व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहायता मिलेगी।

बिहार सरकार ने विश्वास जताया है कि केंद्र सरकार के सहयोग से ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, सौर ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य हरित ऊर्जा योजनाओं को नई गति मिलेगी। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को अधिक टिकाऊ तरीके से पूरा कर सकेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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