बिहार में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम होगा और मजबूत, डायल-112 से जुड़ेंगी सार्वजनिक परिवहन सेवाएं

पटना:बिहार में महिलाओं की सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार पुलिस के इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) डायल-112 को अब सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से जोड़ा जाएगा। नई व्यवस्था के तहत ओला, उबर समेत अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का एकीकरण किया जाएगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों, विशेषकर महिलाओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

इसके साथ ही डायल-112 प्रणाली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए मूवमेंट ट्रैकिंग और वन-क्लिक एसओएस (SOS) जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी। इससे खतरे की स्थिति में पीड़ित केवल एक क्लिक के जरिए पुलिस कंट्रोल रूम तक अपनी लोकेशन और सहायता का संदेश पहुंचा सकेगी।

डायल-112 के चार वर्ष पूरे, भविष्य की योजनाओं का ऐलान

पुलिस मुख्यालय के सरदार पटेल भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डायल-112 सेवा के चार वर्ष पूरे होने पर इसकी उपलब्धियों की समीक्षा की गई। कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार, एडीजी (तकनीकी एवं वित्त सेवाएं) अमित लोढ़ा सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

इस अवसर पर अधिकारियों ने बताया कि डायल-112 को अब नेक्स्ट जेनरेशन इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। नई तकनीकों की मदद से प्रतिक्रिया समय घटाने, सेवाओं का विस्तार करने और नागरिकों को अधिक सुरक्षित एवं तेज सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए नई तकनीक

पुलिस के अनुसार, सितंबर 2024 से संचालित ‘सुरक्षित सफर’ पहल के तहत अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं की डिजिटल निगरानी की जा रही है। अब तक सैकड़ों महिलाओं को इस सुविधा के माध्यम से सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने में सहायता मिली है।

नई प्रणाली लागू होने के बाद यदि कोई महिला सार्वजनिक परिवहन से यात्रा के दौरान खतरा महसूस करती है, तो वह एक क्लिक में अलर्ट भेज सकेगी। कंट्रोल रूम को उसकी लाइव लोकेशन मिलेगी और नजदीकी पुलिस टीम तत्काल मौके पर भेजी जाएगी।

गया में बनेगा ‘मिरर इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर’

राजधानी पटना के अलावा अब गया में भी एक ‘मिरर इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर’ स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसी तकनीकी खराबी, प्राकृतिक आपदा या अन्य आपात स्थिति के दौरान डायल-112 सेवाओं को बिना बाधा जारी रखना है। यदि किसी कारणवश मुख्य कंट्रोल सेंटर प्रभावित होता है, तो गया स्थित सेंटर पूरी व्यवस्था संभाल सकेगा।

औसत रिस्पॉन्स टाइम 10 मिनट

कार्यक्रम के दौरान डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि डायल-112 का औसत रिस्पॉन्स टाइम लगभग 10 मिनट तक पहुंच गया है, जो पहले की तुलना में बेहतर है। उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया।

एआई और बॉडी कैमरा तकनीक का होगा इस्तेमाल

बिहार पुलिस आने वाले समय में अपराध नियंत्रण और जांच को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करेगी। एआई की मदद से अपराध के हॉटस्पॉट की पहचान, संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और अपराध विश्लेषण को गति मिलेगी।

इसके अलावा पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा और गश्ती वाहनों पर डैश कैमरा लगाने की भी योजना है। इससे कार्रवाई में पारदर्शिता बढ़ेगी, घटनाओं का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध होगा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।

नागरिकों को मिलेगा सीधा लाभ

नई तकनीक और सार्वजनिक परिवहन के साथ डायल-112 के एकीकरण से आपातकालीन सेवाएं पहले से अधिक तेज, विश्वसनीय और प्रभावी होंगी। सरकार और बिहार पुलिस का उद्देश्य है कि किसी भी संकट की स्थिति में लोगों को कम से कम समय में सहायता मिले और महिलाओं सहित सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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