भागलपुर में विकास परियोजनाओं की समीक्षा, जलापूर्ति, पुल, सीवरेज और बाढ़ सुरक्षा कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

भागलपुर। जिले में चल रही बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने और आम लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार को समाहरणालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी अलंकृता पाण्डेय ने की, जिसमें जलापूर्ति, पुल निर्माण, सीवरेज व्यवस्था, बाढ़ नियंत्रण और अन्य महत्वपूर्ण विकास योजनाओं की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया। समीक्षा के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों को लंबित कार्यों में तेजी लाने, निर्धारित समय सीमा का पालन करने और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में सबसे पहले जिले में संचालित पेयजल योजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने हर घर नल का जल योजना की वर्तमान स्थिति से जिलाधिकारी को अवगत कराया। समीक्षा के दौरान बताया गया कि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) भागलपुर पूर्व प्रमंडल के अंतर्गत कुल 249 वार्डों में से 220 वार्डों में योजना का कार्य पूरा हो चुका है। शेष 29 वार्डों में पाइपलाइन, जलापूर्ति और अन्य आवश्यक कार्य प्रगति पर हैं तथा इन्हें जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

इसी प्रकार पीएचईडी भागलपुर पश्चिम प्रमंडल के अंतर्गत संचालित योजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि यहां कुल 160 टोलों में से 113 टोलों में जलापूर्ति संबंधी कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जबकि बाकी क्षेत्रों में निर्माण कार्य जारी है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में अभी कार्य अधूरा है, वहां तेजी से काम पूरा किया जाए ताकि सभी परिवारों तक स्वच्छ पेयजल की सुविधा पहुंच सके।

बैठक के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 में नए चापाकलों की स्थापना की योजना पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि जिले में 40 नए चापाकल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और इसके लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद बिना किसी अनावश्यक विलंब के कार्य शुरू कराया जाए, ताकि जरूरतमंद क्षेत्रों में समय पर पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

जिलाधिकारी ने विशेष रूप से कहा कि मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए पेयजल व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले के किसी भी गांव या शहरी क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न नहीं होना चाहिए। यदि किसी स्थान से जलापूर्ति संबंधी शिकायत प्राप्त होती है तो उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।

समीक्षा बैठक में शहर की महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं में शामिल भोलानाथ रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण कार्य की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने जानकारी दी कि एसएम कॉलेज से मिर्जानहाट मार्ग तक बन रहे इस आरओबी का फाउंडेशन कार्य लगभग 96 प्रतिशत पूरा हो चुका है, जबकि सब-स्ट्रक्चर का लगभग 76 प्रतिशत निर्माण कार्य संपन्न हो गया है। हालांकि परियोजना से जुड़े एप्रोच रोड का निर्माण अभी बाकी है, जिसके कारण परियोजना निर्धारित समय के अनुसार पूरी नहीं हो सकी है।

आरओबी निर्माण में हो रही देरी पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की और कार्यकारी एजेंसी से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य में आ रही सभी बाधाओं को तत्काल दूर किया जाए और परियोजना को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि यह पुल शहर के यातायात को सुगम बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में सीवरेज और अपशिष्ट जल प्रबंधन परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (बुडको) द्वारा संचालित 45 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और इंटरसेप्शन एंड डायवर्जन (आई एंड डी) परियोजना के तहत कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। समीक्षा में बताया गया कि एसटीपी, मुख्य पंपिंग स्टेशन (एमपीएस) तथा छह इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशनों (आईपीएस) का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि शेष तीन आईपीएस पर कार्य जारी है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शेष कार्य भी निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि शहर में सीवरेज व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक सीवरेज प्रणाली शहर के पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।

बैठक में बाढ़ नियंत्रण और तट कटाव रोकने से संबंधित योजनाओं की भी समीक्षा की गई। विशेष रूप से इस्माइलपुर प्रखंड के बिन्दटोली क्षेत्र में चल रहे एंटी-इरोशन कार्य की प्रगति पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि गंगा नदी के किनारे तट कटाव रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि मानसून के दौरान संभावित खतरे को देखते हुए यह कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए।

उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसलिए तट कटाव रोकने और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े सभी कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने और कार्य की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए।

समीक्षा बैठक के दौरान विभिन्न विभागों से परियोजनाओं की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों से कहा कि विकास योजनाओं की नियमित निगरानी की जाए और जहां भी किसी प्रकार की प्रशासनिक, तकनीकी या अन्य बाधा सामने आए, उसका शीघ्र समाधान किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।

बैठक में अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि प्रत्येक परियोजना की प्रगति का नियमित मूल्यांकन किया जाए और निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा करने के लिए प्रभावी समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं का लाभ समय पर आम लोगों तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

जिला प्रशासन का मानना है कि जलापूर्ति, सड़क, पुल, सीवरेज और बाढ़ सुरक्षा जैसी आधारभूत परियोजनाएं जिले के समग्र विकास की आधारशिला हैं। इन परियोजनाओं के समय पर पूरा होने से न केवल नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि लोगों के जीवन स्तर और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि सभी लंबित परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा कर जनता को शीघ्र लाभ उपलब्ध कराया जाए।

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