जी रामजी योजना को लेकर विशेष बैठक आयोजित, नए नियमों की दी गई विस्तृत जानकारी

भागलपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड में ग्रामीण विकास और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। किसान भवन के सभाकक्ष में आयोजित इस विशेष बैठक का मुख्य उद्देश्य जी रामजी योजना के नए प्रावधानों और नियमों की जानकारी जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित कर्मियों तक पहुंचाना था। बैठक में योजना से जुड़े कई अहम बदलावों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और विकास कार्यों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

बैठक की अध्यक्षता प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी अनुपम मीनू सिंह ने की। इस दौरान प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों से आए मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और जीआरएस सहित कई जनप्रतिनिधि एवं कर्मी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों को योजना के नए स्वरूप, कार्यप्रणाली और इससे मिलने वाले लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को अधिक रोजगार उपलब्ध कराना और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है।

बैठक में बताया गया कि अब मनरेगा के स्थान पर जी रामजी योजना को लागू किया जा रहा है। इस बदलाव को ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार नई योजना के तहत मजदूरों को पहले की तुलना में अधिक कार्य दिवस उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अधिकारियों ने बताया कि पहले मनरेगा के तहत एक मजदूर को साल में 100 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराया जाता था। लेकिन नई जी रामजी योजना के अंतर्गत अब यह अवधि बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। यानी प्रत्येक मजदूर को 25 दिन अतिरिक्त काम का अवसर मिलेगा। यह बदलाव विशेष रूप से उन परिवारों के लिए राहत लेकर आएगा जिनकी आय मुख्य रूप से दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर करती है।

बैठक में मजदूरी दर बढ़ाए जाने की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि पहले मजदूरों को प्रतिदिन 255 रुपये की मजदूरी मिलती थी, जिसे अब बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया है। मजदूरी में यह वृद्धि ग्रामीण श्रमिकों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अतिरिक्त मजदूरी मजदूर परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने में मददगार साबित हो सकती है।

प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी अनुपम मीनू सिंह ने बैठक के दौरान कहा कि योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना भी है। उन्होंने बताया कि जब गांव स्तर पर अधिक लोगों को काम मिलेगा तो स्थानीय बाजारों में क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे ग्रामीण विकास की गति तेज होने की संभावना है।

बैठक के दौरान योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। संबंधित कर्मियों को यह निर्देश दिया गया कि योजना का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचे और कार्यों के चयन में पारदर्शिता बनाए रखी जाए। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस दौरान उपस्थित मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों को यह जिम्मेदारी भी दी गई कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को योजना की जानकारी दें। कई बार जानकारी के अभाव में पात्र लाभार्थी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। इसलिए पंचायत स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में कृषि गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए कार्य संचालन से जुड़ी एक अहम जानकारी भी साझा की गई। अधिकारियों ने बताया कि धान बुआई के मौसम को देखते हुए 10 जुलाई से 30 जुलाई तक योजना के तहत कार्य अस्थायी रूप से बंद रहेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान खेती के महत्वपूर्ण समय में कृषि कार्यों पर पूरा ध्यान दे सकें।

ग्रामीण क्षेत्रों में धान बुआई का समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रमिक खेती से जुड़े कार्यों में लग जाते हैं। ऐसे में योजना के कार्यों को अस्थायी रूप से रोकना व्यावहारिक कदम माना जा रहा है ताकि कृषि और रोजगार दोनों के बीच संतुलन बना रहे।

बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने योजना से जुड़े कई सवाल भी उठाए। उन्होंने कार्य आवंटन, भुगतान प्रक्रिया और चयन मानकों को लेकर जानकारी मांगी। अधिकारियों ने सभी प्रश्नों का विस्तार से उत्तर दिया और भरोसा दिलाया कि योजना को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा।

लेखापाल रूपेश झा, कर्मी राहुल कुमार, मुखिया भैरव यादव, चांद आलम, अनिरुद्ध महतो और पंचायत समिति सदस्य सेनापति राय सहित कई गणमान्य लोग बैठक में उपस्थित रहे। सभी ने योजना को ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जी रामजी योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो यह ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। अधिक कार्य दिवस और बढ़ी हुई मजदूरी से ग्रामीण परिवारों की आय में सुधार होगा, जिससे सामाजिक और आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा।

फिलहाल जगदीशपुर में आयोजित यह बैठक ग्रामीण रोजगार योजनाओं के प्रति प्रशासन की सक्रियता को दर्शाती है। आने वाले दिनों में योजना के क्रियान्वयन पर सबकी नजर रहेगी। यदि इसे पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो यह ग्रामीण मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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