
बिहार में गन्ना उत्पादक किसानों को संगठित कर कृषि और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। सहकारिता विभाग ने प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों की सदस्यता प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से शुरू करते हुए एक विशेष ऑनलाइन वेब पोर्टल लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को पारदर्शी, सरल और समयबद्ध तरीके से सहकारी समितियों से जोड़ना है, ताकि उन्हें गन्ना उत्पादन से लेकर विपणन और भुगतान तक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को बिहार के मुख्य सचिव ने सकरी (मधुबनी) और रैयाम (दरभंगा) क्षेत्र में प्रस्तावित सहकारी चीनी मिलों के लिए गठित होने वाली प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों की सदस्यता हेतु विकसित ऑनलाइन पोर्टल का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे और उन्होंने इस परियोजना को राज्य के किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया।
सहकारिता विभाग का यह नया डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों के लिए सदस्यता प्रक्रिया को काफी आसान बनाने वाला है। इच्छुक किसान पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पोर्टल के माध्यम से किसान घर बैठे आवेदन भर सकेंगे, जरूरी दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे और सदस्यता प्रक्रिया की स्थिति भी ऑनलाइन देख पाएंगे। इससे उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
राज्य सरकार का मानना है कि प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को गन्ना उत्पादन से जुड़े कई प्रत्यक्ष लाभ मिलेंगे। समिति का सदस्य बनने वाले किसानों को उन्नत कृषि आदानों की उपलब्धता, आधुनिक खेती से जुड़ा तकनीकी मार्गदर्शन, मिट्टी परीक्षण की सुविधा और गन्ना विकास से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा राज्य सरकार की नीतियों के अनुरूप गन्ने की खरीद प्रक्रिया और मूल्य भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का भी लक्ष्य रखा गया है।
मुख्य सचिव ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि बिहार सरकार किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उनके अनुसार सकरी और रैयाम में प्रस्तावित सहकारी चीनी मिलें केवल औद्योगिक परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि वे व्यापक सामाजिक-आर्थिक बदलाव का आधार बन सकती हैं। इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, किसानों की आय में सुधार होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल माध्यम से सदस्यता प्रक्रिया शुरू होने से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इससे पात्र किसानों को बिना किसी जटिलता के समिति का सदस्य बनने का अवसर मिलेगा। ऑनलाइन व्यवस्था से आवेदन प्रक्रिया तेज होगी और चयन में निष्पक्षता सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
दोनों प्रस्तावित चीनी मिलों की स्थापना के लिए आवश्यक तकनीकी और आर्थिक अध्ययन पहले ही पूरा किया जा चुका है। ने संभाव्यता प्रतिवेदन और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर विभाग को सौंप दिया है। इन रिपोर्टों के आधार पर आगे की प्रशासनिक और संरचनात्मक प्रक्रिया प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाई जा रही है।
सदस्यता के लिए कुछ आवश्यक पात्रता शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। आवेदन करने वाले किसान की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। इसके साथ ही आवेदक संबंधित आयोजन क्षेत्र का निवासी होना चाहिए और गन्ना उत्पादक होना आवश्यक है। यदि कोई किसान वर्तमान में गन्ना उत्पादन नहीं कर रहा है, तो उसे आगामी दो पेराई मौसम में गन्ना उत्पादन करने की प्रतिबद्धता दिखानी होगी।
भूमि संबंधी मानदंड भी तय किए गए हैं। सामान्य श्रेणी के किसानों के लिए न्यूनतम 100 डिसमिल भूमि पर गन्ना उत्पादन या उत्पादन की प्रतिबद्धता जरूरी है। वहीं आरक्षित श्रेणी और महिला किसानों के लिए यह सीमा 50 डिसमिल निर्धारित की गई है। एक परिवार से केवल एक सदस्य ही आवेदन कर सकेगा, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को सदस्यता का अवसर मिल सके।
इन दोनों चीनी मिलों के लिए गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु व्यापक क्षेत्र को शामिल किया गया है। गन्ना उद्योग विभाग के अनुसार रैयाम प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समिति (प्रस्तावित) के कार्यक्षेत्र में कुल 1018 गांव शामिल किए गए हैं। वहीं सकरी प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समिति (प्रस्तावित) के अंतर्गत 1383 गांवों को शामिल किया गया है। इतने बड़े भौगोलिक क्षेत्र को जोड़ने का उद्देश्य गन्ना उत्पादन की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना और सहकारी मॉडल को मजबूत बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारी मॉडल किसानों के लिए अत्यंत प्रभावी साबित हो सकता है। जब किसान किसी सहकारी संस्था के सदस्य बनते हैं, तो वे उत्पादन, विपणन और मूल्य निर्धारण से जुड़े निर्णयों में भागीदारी हासिल करते हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है।
सहकारिता विभाग ने आवेदन प्रक्रिया में किसानों की सहायता के लिए स्थानीय स्तर पर भी व्यवस्था की है। यदि किसी किसान को ऑनलाइन आवेदन भरने में कठिनाई आती है, तो वह संबंधित प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी या गठित ऑर्गेनाइजर कमेटी से संपर्क कर सकता है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र किसानों को आवेदन प्रक्रिया में पूरी सहायता प्रदान की जाए।
राज्य सरकार ने किसानों से अधिकाधिक संख्या में इस सदस्यता अभियान में शामिल होने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यह पहल केवल सदस्यता अभियान नहीं, बल्कि बिहार के गन्ना उद्योग को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
सदस्यता आवेदन की अंतिम तिथि 30 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। सरकार ने सभी पात्र किसानों से अपील की है कि वे तय समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन अवश्य करें। माना जा रहा है कि यदि यह मॉडल सफल रहा, तो भविष्य में राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की सहकारी औद्योगिक परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा सकता है। बिहार में गन्ना आधारित अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने की दिशा में यह कदम दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।


