
आरा/भोजपुर, 24 जून 2026। बिहार के आरा स्थित भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा मोड़ आ गया है। मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी के आवेदन के आधार पर पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। इस कार्रवाई ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
भोजपुर के पुलिस अधीक्षक राज ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की।
पहले ही 5 पुलिसकर्मी हो चुके हैं सस्पेंड
इस मामले में अब तक पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। इनमें—
- तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार मालाकार
- पुलिस अवर निरीक्षक अंकित आर्यन
- पुलिस अवर निरीक्षक हर्षचंद्र कुमार
- सहायक अवर निरीक्षक रामाशंकर यादव
- महिला सिपाही मीरा कुमारी
शामिल हैं।
विभागीय जांच में शुरुआती स्तर पर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे थे।
मां ने लगाए गंभीर आरोप
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने एसपी को दिए आवेदन में कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
उनका कहना है कि भरत भूषण तिवारी बाढ़ विस्थापितों की समस्याओं को लेकर लगातार प्रशासन से संघर्ष कर रहा था और सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाता था।
आवेदन के मुताबिक घटना वाले दिन बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और भरत को अपने साथ चलने के लिए कहा।
“हथियार फेंकने के बाद भी मारी गई गोली”
एफआईआर आवेदन में सबसे बड़ा दावा यह किया गया है कि भरत तिवारी ने फेसबुक लाइव के दौरान अपने हाथ में मौजूद हथियार फेंक दिया था और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।
परिजनों का आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें पकड़कर जमीन पर गिराया और बाद में लगातार गोलियां चलाईं।
आशा देवी के अनुसार उनके बेटे को पांच गोलियां मारी गई थीं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गोली जगदीशपुर पुलिस उपाधीक्षक के आदेश पर चलाई गई।
घटना के बाद परिवार को नहीं दी गई सही जानकारी
आशा देवी ने आवेदन में कहा कि एनकाउंटर के बाद पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई और कई घंटों तक परिवार को सही जानकारी नहीं दी गई।
बाद में शाम के समय सूचना मिली कि भरत तिवारी की मौत हो चुकी है।
इस आरोप ने पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर और सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में पहले से जारी है न्यायिक जांच
भरत तिवारी एनकाउंटर पहले ही बिहार की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में बड़ा मुद्दा बन चुका है।
इस मामले में—
- न्यायिक जांच आयोग गठित किया जा चुका है
- मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है
- मुख्य सचिव, DGP और भोजपुर SP से रिपोर्ट मांगी गई है
साथ ही पुलिस मुख्यालय ने स्वीकार किया है कि शुरुआती कार्रवाई में गंभीर चूक हुई थी।
जांच पर टिकी सबकी नजर
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब यह मामला और अहम हो गया है। विपक्ष लगातार इसे फर्जी एनकाउंटर बता रहा है, जबकि पुलिस अपनी कार्रवाई को कानूनसम्मत बता रही है।
अब सबकी नजर न्यायिक जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अदालत की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।
भरत तिवारी एनकाउंटर केस बिहार की कानून-व्यवस्था और पुलिस जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।


