गयाजी, राजगीर और नालंदा को मिलेगा नया पर्यटन स्वरूप, अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं और बड़े निवेश की तैयारी तेज

पटना, 14 जून 2026: बिहार सरकार ने राज्य के प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित पर्यटन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में गयाजी, राजगीर, नालंदा, पावापुरी, वाल्मीकिनगर और अन्य महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों के समग्र विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक परिवहन व्यवस्था, धार्मिक कॉरिडोर निर्माण, ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने तथा निवेश आकर्षित करने की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों। उन्होंने कहा कि बिहार का इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत पूरी दुनिया में विशेष महत्व रखती है, इसलिए राज्य के पर्यटन ढांचे को उसी स्तर पर विकसित करना आवश्यक है।

बैठक में पर्यटन विभाग द्वारा विभिन्न विकास योजनाओं और परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति का प्रस्तुतीकरण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिनका उद्देश्य बिहार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूत पहचान दिलाना है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से गयाजी, राजगीर और नालंदा के विकास को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इन तीनों क्षेत्रों का महत्व केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि इनका संबंध विश्वभर के करोड़ों लोगों की आस्था, इतिहास और ज्ञान परंपरा से जुड़ा हुआ है। इसलिए यहां विकसित की जाने वाली सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए।

पर्यटकों की यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए सरकार हेलिकॉप्टर और वायु सेवा को भी पर्यटन विकास की रणनीति में शामिल करने जा रही है। समीक्षा बैठक में निर्देश दिया गया कि मां मुंडेश्वरी मंदिर, करकटगढ़ जलप्रपात और राजगीर के लिए अनुदानित दरों पर हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करने की दिशा में तेजी से काम किया जाए। इसके साथ ही वाल्मीकिनगर के लिए सप्ताहांत में रियायती दरों पर हवाई सेवा शुरू करने की योजना को भी शीघ्र लागू करने का निर्देश दिया गया।

सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी। इससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और परिवहन क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिलेगा।

पर्यटकों को एकीकृत और सुगम यात्रा अनुभव देने के लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम को ‘एंड-टू-एंड’ सेवा शुरू करने का निर्देश दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत पर्यटक के पटना पहुंचने से लेकर पर्यटन स्थल भ्रमण और वापसी तक की संपूर्ण यात्रा को व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि पर्यटकों को अलग-अलग सेवाओं के लिए भटकना न पड़े और उन्हें एक ही मंच पर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर परियोजनाओं को शीघ्र अंतिम रूप देकर निर्माण कार्य शुरू करने का निर्देश दिया। माना जा रहा है कि इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद गयाजी और बोधगया में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा धार्मिक पर्यटन को नया आयाम प्राप्त होगा।

राजगीर को लेकर सरकार की विशेष योजना सामने आई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजगीर का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व विश्व स्तर पर स्थापित है। यहां भगवान बुद्ध, महावीर और कई प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहरें मौजूद हैं। इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए राजगीर को “ग्लोबल सेंटर ऑफ स्पिरिचुअल लर्निंग” के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य तेज किया जाएगा। इसके लिए आधुनिक सुविधाओं, पर्यटन अवसंरचना और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन स्थलों का विकास भी प्रस्तावित है।

नालंदा के पुनर्विकास को लेकर भी सरकार ने महत्वाकांक्षी योजना तैयार करने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नालंदा केवल बिहार की पहचान नहीं बल्कि विश्व की प्राचीन ज्ञान परंपरा का प्रतीक है। इसकी ऐतिहासिक प्रतिष्ठा को और मजबूत करने के लिए एक विशेष एकीकृत विकास पैकेज तैयार किया जाएगा। इस योजना के तहत नालंदा को वैश्विक ज्ञान और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पुनर्स्थापित करने के लिए कई नई परियोजनाओं पर काम होगा।

पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है। सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से पर्यटन स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का तेजी से विकास संभव होगा। साथ ही बेहतर प्रबंधन और सेवा गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।

पावापुरी मंदिर परिसर के विकास को लेकर भी व्यापक योजना तैयार की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जाए। पार्किंग, यात्री सुविधा केंद्र, स्वच्छता व्यवस्था और सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

बैठक में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी विशेष बल दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के गांवों में संस्कृति, लोककला, पारंपरिक जीवनशैली और प्राकृतिक सौंदर्य की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि इन्हें पर्यटन से जोड़ा जाए तो स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इसी उद्देश्य से ग्रामीण पर्यटन पहल शुरू करने की योजना बनाई जा रही है।

इसके अलावा राज्य में होमस्टे नीति को बड़े पैमाने पर लागू करने पर भी जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि होमस्टे मॉडल पर्यटकों को बिहार की पारंपरिक मेहमाननवाजी से परिचित कराएगा और स्थानीय परिवारों के लिए आय का नया स्रोत बनेगा। इससे पर्यटन का लाभ सीधे गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचेगा तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार आध्यात्मिकता, संस्कृति और इतिहास की अमूल्य धरोहरों से समृद्ध राज्य है। यदि इन धरोहरों को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन के साथ विकसित किया जाए तो राज्य पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश देते हुए कहा कि पर्यटन विकास केवल सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम नहीं बल्कि आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का भी महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

सरकार की इन नई पहलों से आने वाले वर्षों में बिहार के पर्यटन क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। गयाजी, राजगीर, नालंदा और अन्य प्रमुख स्थलों पर प्रस्तावित योजनाओं के लागू होने के बाद राज्य देश और दुनिया के पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बन सकता है।

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