मोतिहारी में 2 करोड़ की अफीम के साथ अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, STF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 4 गिरफ्तार

मोतिहारी। बिहार में नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पूर्वी चंपारण पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने 10 किलो 540 ग्राम अफीम बरामद करते हुए अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार जब्त अफीम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब दो करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इस कार्रवाई को बिहार में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ हाल के दिनों की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

यह कार्रवाई पूर्वी चंपारण जिले के डुमरियाघाट थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर की गई। पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाकर तस्करों को पकड़ा। जांच एजेंसियों का मानना है कि गिरफ्तार आरोपियों के तार एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं, जिसकी पड़ताल की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार एसटीएफ को सूचना मिली थी कि झारखंड से बिहार की ओर अफीम की एक बड़ी खेप भेजी जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया और एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। इसके बाद संभावित मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई।

जानकारी के आधार पर डुमरियाघाट थाना क्षेत्र के नरसिंह बाबा मंदिर के समीप एनएच-27 पर विशेष वाहन जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान गुजरने वाले वाहनों की गहन तलाशी ली जा रही थी। जांच के दौरान पुलिस की नजर एक सफेद रंग की कार पर पड़ी, जिसकी गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं। इसके बाद वाहन को रोककर विस्तृत तलाशी ली गई।

तलाशी के दौरान पुलिस को कार के भीतर विशेष रूप से तैयार किए गए एक गुप्त स्थान से बड़ी मात्रा में अफीम बरामद हुई। अधिकारियों के अनुसार तस्करों ने कार में तहखाना जैसा ढांचा तैयार किया था, ताकि सामान्य जांच के दौरान मादक पदार्थ का पता न चल सके। लेकिन पुलिस की सतर्कता के कारण उनकी योजना विफल हो गई।

बरामद अफीम का वजन 10 किलो 540 ग्राम बताया गया है। इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की बरामदगी ने यह संकेत दिया है कि यह कोई सामान्य तस्करी का मामला नहीं बल्कि संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। पुलिस का मानना है कि यह खेप बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में आपूर्ति किए जाने की तैयारी में थी।

कार्रवाई के दौरान वाहन में सवार तीन लोगों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान झारखंड के चतरा जिले के निवासी साजन कुमार यादव और मुन्ना कुमार यादव के रूप में हुई है। तीसरे आरोपी की पहचान गया जिले के निवासी अनुज कुमार साव के रूप में की गई है। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।

प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने उस व्यक्ति का नाम बताया जो उन्हें अफीम उपलब्ध कराता था। इसके बाद पुलिस ने उनकी निशानदेही पर एक और कार्रवाई करते हुए पूर्वी चंपारण जिले के गोविंदगंज थाना क्षेत्र के सरैया खास निवासी जितेंद्र चौधरी को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस का दावा है कि जितेंद्र चौधरी इस नेटवर्क में सप्लायर की भूमिका निभा रहा था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि अफीम की यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किन स्थानों पर पहुंचाया जाना था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं।

जांच अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से झारखंड और बिहार के बीच मादक पदार्थों की तस्करी में सक्रिय हो सकता है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क की पूरी संरचना को समझने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि आगे की जांच में कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार अफीम की तस्करी एक अत्यधिक लाभकारी अवैध कारोबार माना जाता है। मादक पदार्थों की मांग और ऊंची कीमतों के कारण अपराधी संगठित नेटवर्क बनाकर विभिन्न राज्यों में इसकी आपूर्ति करते हैं। ऐसे मामलों में केवल तस्करों को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना जरूरी होता है।

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्क सूत्रों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह किन-किन राज्यों में सक्रिय था और इसके अन्य सदस्य कौन हैं।

कार्रवाई के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ डुमरियाघाट थाना में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की जा रही है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।

इस सफलता पर पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी हालत में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार को बढ़ावा नहीं मिलने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाना और समाज को सुरक्षित बनाना है।

एसपी ने स्पष्ट किया कि जिले में नशा तस्करी के खिलाफ लगातार निगरानी रखी जा रही है और खुफिया तंत्र को भी मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस तरह की संयुक्त कार्रवाई जारी रहेगी और अपराधियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।

स्थानीय लोगों ने भी पुलिस और एसटीएफ की इस कार्रवाई की सराहना की है। उनका कहना है कि नशे का कारोबार युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है और ऐसे नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। लोगों का मानना है कि इस तरह की सफल कार्रवाई से अपराधियों के बीच कानून का भय बढ़ेगा।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। जांच एजेंसियां यह जानने में जुटी हैं कि बरामद अफीम की खेप किन क्षेत्रों में भेजी जानी थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

मोतिहारी में हुई यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि बिहार पुलिस और एसटीएफ नशे के खिलाफ अपने अभियान को गंभीरता से आगे बढ़ा रही हैं। अब जांच के अगले चरण पर सभी की नजरें टिकी हैं, जिससे इस अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आ सके।

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