
नालंदा। बिहार में संगठित अपराध, भू-माफियागिरी और अवैध संपत्ति के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत शनिवार को नालंदा जिले में एक बड़ा ऑपरेशन चलाया गया। पटना के चर्चित अपराधियों की सूची में शामिल कुख्यात भू-माफिया संजय कुमार उर्फ संतोष डॉन के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू), स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और नालंदा पुलिस की संयुक्त टीम ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी और अपराध जगत से जुड़े लोगों के बीच खलबली मच गई।
जानकारी के अनुसार यह अभियान शनिवार सुबह शुरू हुआ और कई घंटों तक लगातार जारी रहा। सुरक्षा एजेंसियों ने संतोष डॉन और उससे जुड़े लोगों के कुल 25 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई पूरी योजना और रणनीति के तहत की गई थी ताकि किसी भी आरोपी को भागने का मौका न मिल सके।
बताया जा रहा है कि छापेमारी की शुरुआत सुबह करीब नौ बजे हुई थी। संयुक्त टीम ने सबसे पहले संतोष डॉन के पैतृक गांव खिदरचक सहित विभिन्न स्थानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की। दिनभर चले इस अभियान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने कई मकानों, परिसरों और संदिग्ध ठिकानों की गहन तलाशी ली। शाम तक यह अभियान जारी रहा और विभिन्न स्थानों से कई महत्वपूर्ण सामग्रियां बरामद की गईं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। खिदरचक गांव को लगभग पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। बड़ी संख्या में जिला पुलिस बल, एसटीएफ के जवान और विशेष सुरक्षा इकाइयों को तैनात किया गया था। गांव में आने-जाने वाले रास्तों पर भी निगरानी रखी जा रही थी ताकि कोई संदिग्ध गतिविधि न हो सके।
इस अभियान की एक खास बात यह रही कि सुरक्षा एजेंसियों ने आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया। पूरे इलाके की निगरानी ड्रोन कैमरों की सहायता से की गई। हवाई निगरानी के जरिए अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि कोई व्यक्ति कार्रवाई के दौरान मौके से फरार न हो सके। ड्रोन के माध्यम से पूरे क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई।
सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान संतोष डॉन के परिवार से जुड़े कुछ लोगों को भी हिरासत में लिया गया है। जानकारी के मुताबिक हिरासत में लिए गए लोगों में उसकी मां, भाभी, चचेरा भाई और एक अन्य पारिवारिक सदस्य शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इन सभी से पूछताछ शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि जांच के दौरान उनसे नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हो सकती हैं।
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार बरामद दस्तावेजों में भूमि से जुड़े कागजात, संपत्ति के रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल उपकरणों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, स्टोरेज डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की फोरेंसिक जांच कराई जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि नेटवर्क किस प्रकार काम करता था और किन लोगों से संपर्क बनाए गए थे।
बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान एक वाहन और नकदी भी बरामद की गई है। हालांकि अधिकारियों की ओर से बरामदगी का विस्तृत आधिकारिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। जांच एजेंसियां सभी सामग्रियों का सत्यापन और विश्लेषण कर रही हैं।
संतोष डॉन का नाम पिछले कई वर्षों से बिहार में भू-माफियागिरी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में चर्चा में रहा है। उस पर आरोप है कि उसने विभिन्न क्षेत्रों में जमीन से जुड़े विवादों में हस्तक्षेप किया और कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से कई संपत्तियों पर कब्जा करने का प्रयास किया। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के आधार पर ही होगी।
जांच अधिकारियों के अनुसार संतोष डॉन और उसके सहयोगियों के खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उस पर हत्या, रंगदारी, अवैध कब्जा और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े दर्जनों मामले दर्ज बताए जाते हैं। इसी वजह से वह लंबे समय से कानून प्रवर्तन एजेंसियों के रडार पर था।
इस कार्रवाई का संबंध उन मामलों से भी जोड़ा जा रहा है जिनमें प्रभावशाली लोगों पर हमले और भूमि विवाद शामिल रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या विभिन्न आपराधिक घटनाओं के बीच कोई आपसी संबंध है। इसी कारण इस छापेमारी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संगठित अपराध के खिलाफ ऐसी कार्रवाई तभी प्रभावी होती है जब केवल अपराधियों को पकड़ने के बजाय उनके पूरे आर्थिक और सामाजिक नेटवर्क को भी तोड़ा जाए। आर्थिक अपराध इकाई की भागीदारी इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह एजेंसी वित्तीय लेन-देन और अवैध संपत्ति की जांच में विशेषज्ञता रखती है।
स्थानीय लोगों के बीच भी इस कार्रवाई की व्यापक चर्चा है। कई लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और व्यापक तरीके से आगे बढ़ती है तो भूमि विवाद और अवैध कब्जे से जुड़े कई मामलों की सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं कुछ लोग इस कार्रवाई को अपराध के खिलाफ सरकार की सख्ती का संकेत मान रहे हैं।
फिलहाल जांच एजेंसियों ने मामले को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि जब्त दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ के आधार पर आगे और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। कई अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
नालंदा में चलाया गया यह संयुक्त अभियान बिहार में संगठित अपराध और भू-माफियागिरी के खिलाफ अब तक की बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और संभावित खुलासों पर टिकी हुई है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।


