राजस्व कार्यों में तेजी लाने का निर्देश, लंबित दाखिल-खारिज मामलों के जल्द निपटारे पर प्रशासन का जोर

भागलपुर। जिले में राजस्व प्रशासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शनिवार को जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में राजस्व विभाग से जुड़े विभिन्न कार्यों की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया। बैठक में दाखिल-खारिज, परिमार्जन, भूमि बंदोबस्त, परिमार्जन प्लस और ई-मापी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई तथा अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के निर्देश दिए गए।

बैठक का मुख्य फोकस आम नागरिकों से सीधे जुड़े राजस्व मामलों को समय पर पूरा करना था। जिलाधिकारी ने कहा कि भूमि से संबंधित मामलों के समाधान में अनावश्यक देरी न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करती है, बल्कि आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए प्रत्येक राजस्व अधिकारी और अंचल स्तर के पदाधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी।

समीक्षा के दौरान अपर समाहर्ता दिनेश राम ने विभागीय प्रगति की जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि जिले में दाखिल-खारिज मामलों के निष्पादन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। हाल के दिनों में लगभग 3100 मामलों का निपटारा किया गया है, जिससे लंबित मामलों की संख्या में कमी आई है। हालांकि जिलाधिकारी ने कहा कि अभी भी कई अंचलों में ऐसे मामले लंबित हैं जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर समाप्त करना आवश्यक है।

दाखिल-खारिज प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और परिणामोन्मुख बनाने के लिए जिलाधिकारी ने लंबित मामलों की निगरानी हेतु चार अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित करने का निर्देश दिया। इसके तहत 90 दिन से अधिक पुराने मामले, 75 दिन से अधिक लंबित मामले, 60 दिन से अधिक के मामले तथा 35 दिन से अधिक समय से लंबित मामलों की अलग-अलग समीक्षा की जाएगी। उनका कहना था कि इस वर्गीकरण से अधिकारियों को प्राथमिकता तय करने में आसानी होगी और पुराने मामलों का तेजी से निपटारा संभव हो सकेगा।

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि 17 जून तक जिले के किसी भी अंचल में 60 दिन से अधिक समय से लंबित दाखिल-खारिज का एक भी मामला नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सभी अंचलाधिकारियों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाने का निर्देश दिया। साथ ही चेतावनी भी दी कि निर्धारित अवधि के बाद भी यदि अनावश्यक रूप से मामले लंबित पाए गए तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

राजस्व मामलों के शीघ्र समाधान के लिए जिलाधिकारी ने विशेष शिविरों के आयोजन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन अंचलों में 35 दिन से अधिक पुराने मामले बड़ी संख्या में लंबित हैं, वहां शाम के समय विशेष शिविर आयोजित किए जाएं। इन शिविरों के माध्यम से लंबित आवेदनों की सुनवाई और निष्पादन की प्रक्रिया को गति दी जा सकती है। उनका मानना है कि अतिरिक्त समय देकर काम करने से लोगों को राहत मिलेगी और लंबित मामलों का बोझ भी कम होगा।

बैठक में परिमार्जन से जुड़े मामलों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। भूमि अभिलेखों में त्रुटियों के सुधार से संबंधित यह प्रक्रिया आम नागरिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परिमार्जन से संबंधित लंबित आवेदनों का शीघ्र निपटारा किया जाए और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न होने दी जाए। उन्होंने कहा कि भूमि अभिलेखों की शुद्धता प्रशासनिक व्यवस्था की मजबूती का आधार है।

इसके अलावा भूमि बंदोबस्त से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि भूमि आवंटन और उससे जुड़े रिकॉर्ड का अद्यतन होना बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि भूमि बंदोबस्त से संबंधित सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से पूरी हों ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

बैठक में परिमार्जन प्लस योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। यह पहल भूमि रिकॉर्ड को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अधिकारियों से कहा गया कि इस योजना के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों की नियमित समीक्षा की जाए और तकनीकी तथा प्रशासनिक स्तर पर आने वाली बाधाओं को शीघ्र दूर किया जाए।

समीक्षा बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय ई-मापी सेवा भी रहा। वर्तमान समय में भूमि मापी से संबंधित कार्यों को डिजिटल माध्यम से अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने ई-मापी मामलों की समीक्षा करते हुए पाया कि कुछ क्षेत्रों में अपेक्षित गति से कार्य नहीं हो रहा है। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी अंचलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रत्येक अमीन द्वारा प्रतिदिन कम से कम दो ई-मापी मामलों को स्वीकार करना अनिवार्य होगा। यदि कोई अमीन निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य नहीं कर रहा है तो उसे चिन्हित कर उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाए। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि कार्य में लापरवाही या उदासीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि लंबित ई-मापी मामलों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निष्पादन किया जाए। भूमि मापी से जुड़े मामलों में देरी होने पर नागरिकों को कई तरह की प्रशासनिक और कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए इन मामलों का समयबद्ध निपटारा अत्यंत आवश्यक है।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने डिजिटल सेवाओं के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सकता है। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों को ऑनलाइन प्रक्रियाओं की नियमित निगरानी करनी होगी और नागरिकों को समय पर सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि लोगों को भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों में अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और समय सीमा के भीतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि राजस्व विभाग से जुड़े मामलों में तेजी लाना समय की आवश्यकता है। दाखिल-खारिज, परिमार्जन, भूमि बंदोबस्त और ई-मापी जैसी सेवाओं का सीधा संबंध आम जनता से है, इसलिए इनके निष्पादन में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से समन्वय बनाकर कार्य करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर लंबित मामलों का समाधान सुनिश्चित करने को कहा।

प्रशासन को उम्मीद है कि समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से आने वाले दिनों में राजस्व सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, लंबित मामलों की संख्या घटेगी और आम लोगों को अधिक पारदर्शी तथा त्वरित सेवाएं प्राप्त हो सकेंगी।

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