श्रावणी मेला 2026 की तैयारियां तेज, कांवरिया पथ से लेकर नमामि गंगे घाट तक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर

भागलपुर। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं और कांवरियों की आस्था का केंद्र बनने वाले इस महापर्व को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने के लिए विभिन्न विभागों को अभी से सक्रिय कर दिया गया है। इसी कड़ी में शनिवार को भागलपुर के समीक्षा भवन में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें मेले की तैयारियों की प्रगति का आकलन किया गया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में श्रावणी मेला के दौरान श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं, कांवरिया पथ की व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य, प्रकाश व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और डिजिटल सेवाओं जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि श्रावणी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक है। इसलिए इसकी तैयारियों में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मेले से जुड़े सभी कार्यों की नियमित और प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति का लगातार मूल्यांकन किया जाए ताकि समय रहते कमियों को दूर किया जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि उनके क्रियान्वयन की निरंतर निगरानी होती रहे।

बैठक में पेयजल व्यवस्था को लेकर विशेष चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने पूछा कि अब तक कितने खराब चापाकलों की मरम्मत की गई है और कितने नए चापाकल लगाए गए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि कांवरिया पथ और श्रद्धालुओं के ठहराव वाले स्थानों पर पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना था कि गर्मी और उमस के मौसम में लाखों श्रद्धालुओं के लिए पानी की व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है।

नगर परिषद द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि सफाई, प्रकाश व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों की नियमित निगरानी की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि नगर निकाय द्वारा किए जा रहे प्रत्येक कार्य की रिपोर्ट तैयार की जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन-सा कार्य पूरा हुआ है और किन कार्यों पर अभी काम बाकी है।

श्रावणी मेला के दौरान जर्मन हैंगर की व्यवस्था भी एक महत्वपूर्ण विषय रही। बैठक में बताया गया कि जहां श्रद्धालुओं के लिए जर्मन हैंगर लगाए जाते हैं, वहां वर्षा के दौरान जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि ऐसे स्थानों को ऊंचा किया जाए ताकि बारिश का पानी वहां न ठहरे और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

कांवरिया पथ की स्वच्छता और सफाई व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन गंभीर नजर आया। जिलाधिकारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरने वाले कांवरिया मार्ग की साफ-सफाई की जिम्मेदारी स्वच्छता प्रेक्षकों को दी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं के आवागमन वाले पूरे मार्ग पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए ताकि धार्मिक यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।

खाद्य सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को खाद्य निरीक्षकों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित करने को कहा। श्रावणी मेला के दौरान बड़ी संख्या में अस्थायी भोजनालय, दुकानें और खाद्य स्टॉल संचालित होते हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता की नियमित जांच आवश्यक होगी ताकि श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

इस बार प्रशासन तकनीक के उपयोग पर भी विशेष जोर दे रहा है। बैठक में श्रावणी मेला एप विकसित करने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर श्रद्धालुओं को बेहतर जानकारी और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। प्रस्तावित मोबाइल एप के माध्यम से श्रद्धालुओं को मार्ग, सुविधाओं, चिकित्सा केंद्रों, विश्राम स्थलों, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

प्रचार-प्रसार को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय भाषा में जिंगल तैयार कराने का भी निर्णय लिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि ऐसे ऑडियो संदेश तैयार किए जाएं जो स्थानीय संस्कृति और आस्था से जुड़े हों तथा श्रद्धालुओं तक आसानी से पहुंच सकें। प्रशासन का मानना है कि स्थानीय भाषा में तैयार सामग्री लोगों के साथ बेहतर जुड़ाव स्थापित करती है।

बैठक में एक नई पहल के रूप में ‘दीदी की रसोई’ की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि इस वर्ष सुलतानगंज कांवरिया पथ पर दीदी की रसोई की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इस पहल का उद्देश्य श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुलभ भोजन उपलब्ध कराना है। साथ ही यह महिला समूहों को रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर भी प्रदान करेगा।

श्रद्धालुओं के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए प्रकाश व्यवस्था को लेकर भी विशेष योजना बनाई जा रही है। जिलाधिकारी ने नमामि गंगे घाट और कृष्णगढ़ चौक पर आकर्षक और पर्याप्त लाइटिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले इन स्थलों को इस प्रकार सजाया जाए कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्राप्त हो।

सांस्कृतिक गतिविधियों को लेकर भी प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बैठक में निर्देश दिया गया कि नमामि गंगे घाट और धांधी बेलारी क्षेत्र में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए अभी से कलाकारों का चयन कर लिया जाए। प्रशासन चाहता है कि धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनें और बिहार की लोक परंपराओं को व्यापक मंच मिले।

जिलाधिकारी ने कहा कि श्रावणी मेला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाला आयोजन है। इसलिए इसकी तैयारियों में सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने और नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रगति की जानकारी देने का निर्देश दिया।

बैठक में उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, अपर समाहर्ता दिनेश राम, अपर समाहर्ता विधि व्यवस्था राकेश रंजन, संयुक्त निदेशक जनसंपर्क नागेंद्र कुमार गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों द्वारा की जा रही तैयारियों की जानकारी दी और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की।

प्रशासन को उम्मीद है कि समय रहते सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी, जिससे श्रावणी मेला 2026 में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुव्यवस्थित वातावरण मिल सकेगा। साथ ही आधुनिक तकनीक, बेहतर सुविधाओं और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से इस बार का आयोजन पिछले वर्षों की तुलना में और अधिक आकर्षक तथा यादगार बनाने का प्रयास किया जाएगा।

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