
बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा 2025 में सामने आए कथित फर्जीवाड़े और परीक्षा धांधली मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। राज्य की सबसे चर्चित भर्ती परीक्षाओं में से एक मानी जा रही इस परीक्षा में अनियमितताओं की जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जांच एजेंसियों को मिले सुरागों के आधार पर पता चला है कि इस मामले में बड़ी संख्या में आरोपी मुंगेर जिले से जुड़े हुए हैं। इसके बाद पटना पुलिस और मुंगेर पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई तेज कर दी है और परीक्षा माफिया नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया गया है।
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, सिपाही भर्ती परीक्षा में धांधली, फर्जी अभ्यर्थियों की मदद से परीक्षा दिलाने और संगठित तरीके से परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोपों में कुल 107 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका संबंध मुंगेर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से बताया जा रहा है। इन आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और कई स्थानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल कुछ अभ्यर्थियों द्वारा नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूली गई और इसके बदले विभिन्न अवैध तरीकों का इस्तेमाल किया गया। इसी कारण इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतों और प्रारंभिक जांच के बाद पटना में संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद जब जांच का दायरा बढ़ाया गया तो कई ऐसे नाम सामने आए जिनकी गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, दस्तावेजों और अन्य जांच माध्यमों के जरिए आरोपियों की पहचान की और फिर संबंधित जिलों को कार्रवाई के लिए सूची उपलब्ध कराई।
जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि गर्दनीबाग थाना कांड संख्या 160/25 में शामिल 45 आरोपी मुंगेर जिले से जुड़े हुए हैं। वहीं सचिवालय थाना कांड संख्या 76/2025 में दर्ज मामले में 62 लोगों का संबंध भी मुंगेर जिले से बताया गया है। इन दोनों मामलों को मिलाकर कुल 107 आरोपी ऐसे पाए गए हैं, जिनके खिलाफ जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है।
मुंगेर पुलिस ने पटना पुलिस से प्राप्त सूची के आधार पर विभिन्न थाना क्षेत्रों में कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस टीमों को अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा गया है और संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। अब तक की कार्रवाई में 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पटना पुलिस को सौंप दिया गया है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है।
हालांकि पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभी भी फरार आरोपियों को पकड़ना है। अधिकारियों के अनुसार 90 से अधिक आरोपी अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं। कई आरोपी अपने घरों से फरार बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ के संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
मुंगेर के पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पटना पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और बाकी के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है। कुछ आरोपी न्यायालय से जमानत प्राप्त कर चुके हैं, जबकि अन्य की तलाश में पुलिस लगातार जुटी हुई है।
एसपी ने यह भी संकेत दिया कि जांच केवल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहेगी। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि परीक्षा धांधली के पीछे कौन लोग सक्रिय थे, किस स्तर पर योजना बनाई गई और किस तरह पूरे नेटवर्क का संचालन किया गया। जांच एजेंसियां उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं जिन्हें इस पूरे रैकेट का संचालक या मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जांच में सॉल्वर गैंग की भूमिका भी सामने आई है। ऐसे गिरोह अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को बैठाने, उत्तर उपलब्ध कराने या अन्य अवैध माध्यमों से परीक्षा परिणाम प्रभावित करने का काम करते हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस मामले में किन-किन लोगों ने आर्थिक लाभ प्राप्त किया और पैसे का लेनदेन किस प्रकार हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। लाखों अभ्यर्थी वर्षों तक मेहनत कर सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं, लेकिन जब संगठित गिरोह पैसे के बल पर चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं तो पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो जाते हैं। यही वजह है कि इस प्रकार के मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग लंबे समय से की जाती रही है।
बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन भी लगातार यह दावा करते रहे हैं कि राज्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी और कदाचार मुक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। परीक्षा केंद्रों पर निगरानी बढ़ाने, तकनीकी संसाधनों का उपयोग करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इसके बावजूद यदि कोई संगठित गिरोह नियमों को तोड़ने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।
वर्तमान मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियों ने परीक्षा माफियाओं के बीच बेचैनी बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस जांच से और भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। जांच का दायरा बढ़ने के साथ-साथ ऐसे लोगों की पहचान भी संभव है, जो अब तक पर्दे के पीछे रहकर पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।
फिलहाल पटना और मुंगेर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई जारी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी तक अभियान नहीं रुकेगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में इस प्रकार की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो। बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़ा यह मामला राज्य में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ी परीक्षा साबित हो रहा है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।


