
भागलपुर। गंगा नदी पर बने ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु को लेकर पिछले कुछ दिनों से विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रही चर्चाओं के बीच जिला प्रशासन और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड ने स्थिति स्पष्ट करते हुए लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। प्रशासन ने कहा है कि विशेषज्ञों द्वारा किए गए ताजा निरीक्षण और तकनीकी जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि विक्रमशिला सेतु पर हल्के वाहनों का परिचालन पूरी तरह सुरक्षित है और पूर्व की तरह सुचारू रूप से जारी रहेगा।
भागलपुर और नवगछिया के बीच संपर्क का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु की स्थिति को लेकर हाल के दिनों में कई तरह की खबरें सामने आई थीं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में सेतु के एक्सपेंशन जॉइंट में गैप बढ़ने की बात कही गई थी, जिसके बाद आम लोगों के बीच चिंता का माहौल बन गया था। हालांकि अब विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट और विभागीय निरीक्षण के बाद प्रशासन ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया है।
मई में क्षतिग्रस्त हुआ था सेतु का एक महत्वपूर्ण हिस्सा
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष 3 मई की मध्यरात्रि में विक्रमशिला सेतु के एक महत्वपूर्ण स्पैन का लगभग 34 मीटर लंबा सस्पेंडेड हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। घटना के बाद तत्काल तकनीकी मूल्यांकन कराया गया और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ एजेंसियों से सहयोग लिया गया।
सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और वैकल्पिक संरचना तैयार करने के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) को जिम्मेदारी सौंपी गई। तकनीकी विशेषज्ञों की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित हिस्से पर बेली ब्रिज निर्माण का निर्णय लिया गया ताकि यातायात को सुरक्षित रूप से संचालित किया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया गया था और इसके बाद युद्धस्तर पर कार्य शुरू किया गया।
चार स्थानों पर बनाए गए बेली ब्रिज
तकनीकी मूल्यांकन के बाद विक्रमशिला सेतु के विभिन्न स्पैन पर कुल चार बेली ब्रिज तैयार किए गए। इन संरचनाओं का उद्देश्य क्षतिग्रस्त हिस्से पर अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करना और यातायात संचालन को निर्बाध बनाए रखना था।
निर्माण कार्य के दौरान विशेषज्ञों द्वारा लगातार सेतु की स्थिति की निगरानी की जाती रही। दृश्य निरीक्षण के माध्यम से विभिन्न हिस्सों का परीक्षण किया गया और संरचनात्मक बदलावों पर विशेष ध्यान दिया गया।
इंजीनियरों की टीम ने बैलेंस्ड कैंटिलीवर स्पैन के एक्सपेंशन जॉइंट की भी जांच की। उस समय लिए गए माप में भागलपुर की ओर कुछ स्थानों पर 90 से 100 मिलीमीटर तक तथा नवगछिया की ओर लगभग 40 से 50 मिलीमीटर तक गैप दर्ज किया गया था।
मीडिया रिपोर्ट के बाद दोबारा हुई जांच
10 जून को कुछ समाचार माध्यमों में एक्सपेंशन जॉइंट के बीच गैप बढ़ने की खबरें प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। लोगों के बीच किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए तत्काल दोबारा तकनीकी निरीक्षण कराने का निर्णय लिया गया।
इसके तहत ड्रोन कैमरों की सहायता से पूरे सेतु की निगरानी की गई। साथ ही फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के माध्यम से विभिन्न हिस्सों की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया गया। आधुनिक तकनीक की मदद से सेतु की बाहरी और आंतरिक संरचना का विस्तृत अध्ययन किया गया।
प्रशासन का कहना है कि किसी भी बड़े पुल या आधारभूत संरचना के मामले में समय-समय पर निरीक्षण सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है। मीडिया में खबरें आने के बाद अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए यह जांच कराई गई ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
आईआईटी पटना की विशेषज्ञ टीम ने किया निरीक्षण
11 जून को तकनीकी निरीक्षण के लिए आईआईटी पटना के विशेषज्ञों की टीम भागलपुर पहुंची। उनके साथ बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के वरिष्ठ अभियंताओं ने भी संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण किया।
विशेषज्ञों ने सेतु के विभिन्न हिस्सों का गहन अध्ययन किया और एक्सपेंशन जॉइंट की दोबारा माप की। निरीक्षण के दौरान पुल के अंदर और बाहर दोनों तरफ मौजूद जॉइंट्स की स्थिति की जांच की गई।
तकनीकी टीम द्वारा किए गए मापन में यह पाया गया कि पहले दर्ज किए गए आंकड़ों और वर्तमान स्थिति में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है। भागलपुर की ओर गैप लगभग 90 से 100 मिलीमीटर तथा नवगछिया की ओर 40 से 50 मिलीमीटर के बीच ही पाया गया, जो पहले की स्थिति के अनुरूप था।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति पूर्व में दर्ज आंकड़ों से मेल खाती है और इसमें किसी प्रकार की असामान्य वृद्धि नहीं हुई है।
हल्के वाहनों के लिए सुरक्षित घोषित किया गया सेतु
निरीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन के बाद आईआईटी पटना की टीम तथा पुल निर्माण निगम के मुख्यालय स्तर के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि विक्रमशिला सेतु पर हल्के वाहनों का परिचालन सुरक्षित है।
विशेषज्ञों ने प्रशासन को सलाह दी कि हल्के वाहनों की आवाजाही पूर्ववत जारी रखी जा सकती है। इसके बाद संबंधित विभागों ने भी स्पष्ट कर दिया कि आम लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है और सेतु पर नियमित यातायात जारी रहेगा।
इस घोषणा के बाद उन लोगों को बड़ी राहत मिली है जो प्रतिदिन भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन के लिए विक्रमशिला सेतु पर निर्भर हैं।
क्षेत्र की जीवनरेखा है विक्रमशिला सेतु
विक्रमशिला सेतु को पूर्वी बिहार की जीवनरेखा माना जाता है। यह पुल भागलपुर को नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और सीमांचल क्षेत्र के अन्य जिलों से जोड़ता है।
हर दिन हजारों लोग रोजगार, व्यापार, शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए इस पुल का उपयोग करते हैं। ऐसे में सेतु की स्थिति को लेकर कोई भी खबर सीधे लाखों लोगों की चिंता का कारण बन जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण पुल की नियमित निगरानी और समय पर मरम्मत बेहद आवश्यक है। प्रशासन और तकनीकी एजेंसियां लगातार इसकी संरचनात्मक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
अफवाहों से बचने की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपुष्ट खबरों और सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करें। किसी भी तकनीकी विषय पर केवल आधिकारिक जानकारी को ही सही माना जाए।
अधिकारियों ने कहा कि विक्रमशिला सेतु की स्थिति पर विशेषज्ञों की टीम लगातार नजर रख रही है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी निरीक्षण जारी रहेगा। फिलहाल उपलब्ध तकनीकी रिपोर्टों और विशेषज्ञों के आकलन के आधार पर हल्के वाहनों का आवागमन पूरी तरह सुरक्षित बताया गया है।
कुल मिलाकर प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि विक्रमशिला सेतु पर हल्के वाहनों की आवाजाही को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। पुल पर यातायात पहले की तरह सामान्य रूप से जारी रहेगा और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।


