वनांचल एक्सप्रेस में आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई, करीब 59 लाख रुपये के 174 संदिग्ध मोबाइल फोन बरामद

मालदा। रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे परिसरों में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियानों के तहत मालदा मंडल की रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। वनांचल एक्सप्रेस में चलाए गए विशेष जांच अभियान के दौरान आरपीएफ ने दो संदिग्ध व्यक्तियों के पास से विभिन्न कंपनियों के 174 पुराने और प्रयुक्त मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत लगभग 59 लाख रुपये बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में इन मोबाइल फोनों के चोरी के होने की आशंका जताई गई है।

इस कार्रवाई को रेलवे सुरक्षा बल की हालिया महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह सफलता खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए अभियान का परिणाम है, जिसमें आरपीएफ की टीम ने सतर्कता और पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए संदिग्धों को पकड़ने में सफलता हासिल की।

विशेष सूचना के बाद शुरू हुआ अभियान

रेलवे सुरक्षा बल को 11 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना में बताया गया था कि एक ट्रेन के माध्यम से बड़ी संख्या में संदिग्ध मोबाइल फोन ले जाए जा रहे हैं। सूचना मिलते ही आरपीएफ अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई की योजना तैयार की और संबंधित टीमों को सक्रिय कर दिया।

इसके बाद आरपीएफ पोस्ट बरहरवा और सीपीडीएस टीम ने संयुक्त रूप से ट्रेन संख्या 13403 वनांचल एक्सप्रेस में जांच अभियान शुरू किया। ट्रेन के विभिन्न डिब्बों की जांच की गई और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी गई।

जांच के दौरान दो व्यक्तियों की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं। टीम ने उन्हें रोककर पूछताछ की और उनके सामान की तलाशी ली। तलाशी के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया।

दो व्यक्तियों के पास मिला भारी मात्रा में मोबाइल फोन

आरपीएफ अधिकारियों द्वारा की गई तलाशी में दोनों व्यक्तियों के पास से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन बरामद हुए। जांच में पता चला कि एक व्यक्ति के पास 85 मोबाइल फोन और दूसरे व्यक्ति के पास 89 मोबाइल फोन मौजूद थे।

कुल मिलाकर दोनों के कब्जे से 174 मोबाइल फोन बरामद किए गए। ये सभी मोबाइल फोन पुराने और इस्तेमाल किए हुए थे। इनमें विभिन्न कंपनियों और मॉडलों के उपकरण शामिल थे।

अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल फोन एक साथ ले जाने को लेकर संदेह उत्पन्न होना स्वाभाविक था। जब उनसे इन उपकरणों के बारे में जानकारी मांगी गई तो वे संतोषजनक जवाब देने में असफल रहे।

कीमत जानकर अधिकारी भी हुए हैरान

बरामद मोबाइल फोनों का मूल्यांकन करने पर उनकी अनुमानित कीमत करीब 58.95 लाख रुपये आंकी गई। इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल फोन और उनकी ऊंची कीमत ने मामले को और गंभीर बना दिया।

प्रारंभिक अनुमान के अनुसार बरामद मोबाइल फोन विभिन्न स्थानों से चोरी किए गए हो सकते हैं। हालांकि वास्तविक स्थिति का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल चोरी से जुड़े नेटवर्क अक्सर पुराने और इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन को विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचाने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों में चोरी के उपकरणों को पहचानना और उनके मूल मालिकों तक पहुंचाना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होती है।

स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज नहीं दिखा सके संदिग्ध

पूछताछ के दौरान दोनों व्यक्तियों से बरामद मोबाइल फोनों के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज मांगे गए। लेकिन वे किसी भी मोबाइल फोन के संबंध में वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके।

इसके अलावा मोबाइल फोन उनके कब्जे में कैसे आए और वे उन्हें कहां ले जा रहे थे, इस संबंध में भी कोई स्पष्ट और संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई। अधिकारियों के अनुसार दोनों व्यक्तियों के जवाबों में कई तरह की विसंगतियां पाई गईं।

इसी आधार पर आरपीएफ ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए सभी मोबाइल फोन जब्त कर लिए। पूरी कार्रवाई गवाहों की उपस्थिति में की गई ताकि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और विधिसम्मत बनी रहे।

आगे की जांच के लिए जीआरपी को सौंपा गया मामला

मोबाइल फोन जब्त करने के बाद दोनों संदिग्ध व्यक्तियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) बरहरवा को सौंप दिया गया। साथ ही जब्त मोबाइल फोन भी जांच एजेंसी के हवाले कर दिए गए हैं।

अब जीआरपी और संबंधित जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि मोबाइल फोन कहां से लाए गए थे, उनका वास्तविक स्वामित्व किसके पास है और इस पूरे मामले में किसी संगठित गिरोह की भूमिका है या नहीं।

जांच के दौरान मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबर और अन्य तकनीकी जानकारियों की भी जांच की जाएगी। इसके आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि इनमें से कितने मोबाइल फोन चोरी या गुमशुदगी के मामलों से जुड़े हुए हैं।

रेलवे में अपराध नियंत्रण के लिए लगातार अभियान

रेलवे सुरक्षा बल पिछले कुछ वर्षों से रेलवे परिसरों और ट्रेनों में अपराध रोकने के लिए विशेष अभियान चला रहा है। इन अभियानों का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और रेलवे संपत्ति को सुरक्षित रखना है।

आरपीएफ द्वारा समय-समय पर ऑपरेशन सतर्क, ऑपरेशन यात्री सुरक्षा और अन्य विशेष अभियानों के तहत निगरानी बढ़ाई जाती है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाती है और आवश्यक कार्रवाई की जाती है।

अधिकारियों का कहना है कि रेलवे नेटवर्क का उपयोग कई बार अवैध गतिविधियों के लिए भी किया जाता है। ऐसे में सतर्कता और लगातार निगरानी बेहद जरूरी हो जाती है। इसी कारण विभिन्न स्टेशनों और ट्रेनों में सुरक्षा जांच को और मजबूत किया गया है।

यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

रेलवे अधिकारियों के अनुसार यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे परिसरों में अपराध नियंत्रण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से आधुनिक तकनीक, खुफिया नेटवर्क और विशेष जांच दलों का उपयोग किया जा रहा है।

हाल के वर्षों में आरपीएफ ने चोरी, तस्करी, अवैध परिवहन और अन्य अपराधों के खिलाफ कई सफल अभियान चलाए हैं। वनांचल एक्सप्रेस में की गई यह कार्रवाई भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

सतर्कता और समन्वय का परिणाम

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह सफलता आरपीएफ कर्मियों की सतर्कता, टीमवर्क और पेशेवर दक्षता का परिणाम है। समय पर मिली सूचना और उसके आधार पर की गई त्वरित कार्रवाई से बड़ी मात्रा में संदिग्ध मोबाइल फोन बरामद किए जा सके।

मालदा मंडल ने स्पष्ट किया है कि रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। लगातार निगरानी, खुफिया सूचनाओं के विश्लेषण और प्रभावी प्रवर्तन उपायों के माध्यम से रेलवे नेटवर्क को सुरक्षित बनाने का प्रयास जारी रहेगा।

वनांचल एक्सप्रेस में की गई यह कार्रवाई न केवल अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि रेलवे सुरक्षा बल किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर बनाए हुए है और कानून के दायरे में रहते हुए त्वरित कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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