
गोपालगंज/फुलवरिया: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने जीवन के 79 वर्ष पूरे कर लिए हैं। जन्मदिन के अवसर पर जहां पटना स्थित राबड़ी आवास पर जश्न का माहौल रहा, वहीं उनके पैतृक गांव फुलवरिया में भी दिनभर राजनीतिक चर्चाओं और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का दौर चलता रहा।
एक समय बिहार की राजनीति के केंद्र रहे लालू प्रसाद यादव आज बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद फुलवरिया के लोगों के दिलों में उनकी लोकप्रियता बरकरार है। गांव के बुजुर्गों का मानना है कि लालू यादव किसी पद, सत्ता या सरकारी सुरक्षा के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने समाज के पिछड़े, दलित और गरीब वर्गों को राजनीतिक पहचान दिलाने का काम किया, जिसे लोग आज भी याद करते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लालू यादव की सबसे बड़ी ताकत हमेशा जनता रही है और आज भी लाखों लोगों का भरोसा उनके साथ जुड़ा हुआ है। गांव के युवाओं का मानना है कि राजद अब भी बिहार की प्रमुख राजनीतिक ताकतों में शामिल है और तेजस्वी यादव उसी विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि कई युवाओं ने यह भी कहा कि लालू यादव की खराब सेहत और गांव नहीं आ पाने की वजह से लोगों में मायूसी जरूर है।
फुलवरिया के मध्य आयु वर्ग के लोगों की राय कुछ अलग नजर आती है। उनका कहना है कि राजनीति में समय के साथ परिस्थितियां बदलती हैं। चारा घोटाले से जुड़े मामलों, स्वास्थ्य समस्याओं और परिवार के भीतर समय-समय पर सामने आए मतभेदों ने राजद और लालू परिवार की राजनीतिक छवि को प्रभावित किया है। उनका मानना है कि जब कोई बड़ा नेता सक्रिय राजनीति से दूर होता है तो उसका असर संगठन पर भी दिखाई देता है।
गांव में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो खुलकर सामने नहीं आना चाहते, लेकिन उनका कहना है कि लालू परिवार का राजनीतिक प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा। उनके अनुसार केंद्र और बिहार दोनों जगह सत्ता से दूरी, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और बदलते राजनीतिक समीकरणों ने विपक्ष की स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
इन सबके बीच सबसे ज्यादा चर्चा तेजस्वी यादव को लेकर हो रही है। ग्रामीणों का मानना है कि तेजस्वी यादव ने पार्टी को नई दिशा देने की कोशिश की है और कई मौकों पर मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाई है। लेकिन लालू प्रसाद यादव जैसी जनस्वीकार्यता, संगठन पर पकड़ और जनाधार हासिल करना अभी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
79वें जन्मदिन पर फुलवरिया का माहौल यह साफ संकेत देता है कि लालू यादव के प्रति सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव आज भी कायम है। हालांकि गांव के लोग यह भी मानते हैं कि आने वाले वर्षों में राजद की राजनीति और लालू की विरासत का भविष्य काफी हद तक तेजस्वी यादव की रणनीति, नेतृत्व क्षमता और चुनावी प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
फिलहाल फुलवरिया की गलियों में एक ही चर्चा है—लालू यादव आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं, लेकिन अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में तेजस्वी यादव कितने सफल साबित होते हैं।


