
पटना/नई दिल्ली: बिहार को तकनीकी और डिजिटल विकास के नए दौर में ले जाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली में एक प्रमुख वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर राज्य में बड़े निवेश, तकनीकी सहयोग और रोजगार सृजन को लेकर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कंपनी को बिहार में अपना बड़ा तकनीकी केंद्र (टेक हब) स्थापित करने का औपचारिक न्योता दिया।
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली स्थित बिहार भवन में हुई इस हाई-लेवल बैठक में डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण, कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के इस्तेमाल और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे मुद्दों पर गंभीर मंथन हुआ। बिहार सरकार ने प्रतिनिधिमंडल को राज्य की नई औद्योगिक और आईटी नीतियों की जानकारी देते हुए निवेश के लिए उपलब्ध सुविधाओं और बेहतर माहौल का भी प्रस्तुतीकरण किया।
बिहार में बनेगा टेक हब तो खुलेंगे रोजगार के नए दरवाजे
सरकार का मानना है कि यदि कंपनी बिहार में अपना बड़ा तकनीकी केंद्र स्थापित करती है तो इससे राज्य के हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। साथ ही बिहार देश के उभरते टेक्नोलॉजी राज्यों की सूची में तेजी से अपनी पहचान बना सकेगा।
बैठक में युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देने, डिजिटल स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने और सरकारी सेवाओं को तकनीक के जरिए अधिक पारदर्शी एवं आसान बनाने पर भी चर्चा हुई।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में तकनीक का होगा बड़ा इस्तेमाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार तकनीक आधारित विकास मॉडल पर तेजी से काम कर रही है। डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट हेल्थ सिस्टम और आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच विकास की दूरी कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
दिल्ली दौरे के बीच हुई अहम बैठक
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं, जहां वे एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इसी दौरान हुई यह मुलाकात बिहार के तकनीकी भविष्य और निवेश संभावनाओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या बदल सकता है बिहार का भविष्य?
यदि यह निवेश जमीन पर उतरता है तो बिहार में आईटी सेक्टर, स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल डेवलपमेंट को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है। इससे राज्य के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने की जरूरत भी कम हो सकती है।


