
भागलपुर: भागलपुर जिले के सबौर थाना क्षेत्र में हुए चर्चित हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा करते हुए तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार अपराधियों के पास से एक देसी कट्टा और एक जिंदा कारतूस भी बरामद किया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई को हत्या के मामले में बड़ी सफलता माना जा रहा है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भागलपुर के निर्देश पर जिले भर में वांछित अपराधियों, अवैध हथियार, शराब और मादक पदार्थों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत सबौर थाना पुलिस ने हत्या के इस मामले की गहन जांच कर आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
पुलिस के अनुसार 6 और 7 जून 2026 की रात सबौर थाना क्षेत्र के आर्य टोला, इंजीनियरिंग कॉलेज रोड में एक व्यक्ति को अज्ञात अपराधियों ने गोली मार दी थी। गोली लगने के बाद घायल अवस्था में उसे तत्काल इलाज के लिए जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल, भागलपुर पहुंचाया गया। हालांकि चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान निराला यादव के रूप में हुई, जो औद्योगिक थाना क्षेत्र के गोपालपुर के निवासी थे।
घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी। मृतक के पुत्र रोहित कुमार के बयान के आधार पर सबौर थाना कांड संख्या 199/2026 दर्ज कर अज्ञात अपराधियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने विभिन्न पहलुओं पर जांच को आगे बढ़ाया।
मामले के खुलासे के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम की निगरानी नगर पुलिस अधीक्षक और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी द्वारा की गई। सबौर थाना अध्यक्ष के नेतृत्व में गठित टीम ने वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान का सहारा लिया। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, मानव सूचना तंत्र तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया।
लगातार की गई जांच के बाद पुलिस ने इस हत्या में संलिप्त तीन अपराधियों की पहचान कर ली। सबसे पहले बहादुर कुमार और पांडव कुमार को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं, जिसके आधार पर तीसरे आरोपी अजय मंडल उर्फ छंगुरी मंडल को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उसके पास से एक देसी कट्टा और एक जिंदा कारतूस बरामद किया।
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी बाबूपुर गांव के निवासी बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार बहादुर कुमार लक्ष्मी यादव का पुत्र है, जबकि पांडव कुमार बाबूलाल यादव का पुत्र है। वहीं अजय मंडल उर्फ छंगुरी मंडल सुरेश मंडल का पुत्र है। तीनों सबौर थाना क्षेत्र के बाबूपुर गांव के रहने वाले हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि हत्या के पीछे की वास्तविक वजह क्या थी और क्या इस अपराध में अन्य लोग भी शामिल थे। जांच एजेंसियां इस मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं ताकि किसी भी आरोपी को कानून के शिकंजे से बचने का मौका न मिले।
बरामद देसी कट्टा और जिंदा कारतूस को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि हत्या में इस्तेमाल हथियार यही था या नहीं। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों को भी मजबूत करने में जुटी हुई है ताकि अदालत में आरोपियों के खिलाफ ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए जा सकें।
इस पूरे अभियान में सबौर थाना के कई पुलिस पदाधिकारियों और जवानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छापेमारी टीम में सह-थानाध्यक्ष बिट्टू कुमार कमल, पुलिस पदाधिकारी कुंदन कुमार, बमबम कुमार, पलटू कुमार, पप्पू कुमार तथा अन्य पुलिस बल शामिल थे। टीम ने लगातार मेहनत और रणनीतिक कार्रवाई के जरिए मामले का सफल उद्भेदन किया।
स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है। हत्या की घटना के बाद इलाके में भय और तनाव का माहौल बन गया था। आरोपियों की गिरफ्तारी से लोगों ने राहत की सांस ली है। पुलिस का कहना है कि जिले में अपराध और अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
भागलपुर पुलिस ने एक बार फिर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि गंभीर अपराध करने वाले चाहे कितने भी शातिर क्यों न हों, उन्हें कानून के दायरे में लाकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना कराना पुलिस की प्राथमिकता है। सबौर हत्याकांड के खुलासे ने पुलिस की सक्रियता और तकनीकी जांच क्षमता को भी उजागर किया है।
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सीसीटीवी और तकनीकी जांच से खुला सबौर मर्डर मिस्ट्री, तीन आरोपी गिरफ्तार
भागलपुर: सबौर थाना क्षेत्र में हुई सनसनीखेज हत्या की गुत्थी को भागलपुर पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अपराधियों में एक आरोपी के पास से देसी कट्टा और जिंदा कारतूस भी बरामद किया गया है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी अनुसंधान, सीसीटीवी फुटेज और मानव सूचना तंत्र की मदद से अपराधियों तक पहुंचना संभव हो सका।
जानकारी के अनुसार घटना 6-7 जून 2026 की रात की है। सबौर थाना क्षेत्र के आर्य टोला स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज रोड में अज्ञात अपराधियों ने एक व्यक्ति को गोली मार दी थी। गोली लगने से गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान निराला यादव के रूप में हुई।
हत्या की खबर मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। मृतक के पुत्र रोहित कुमार के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि घटना को अंजाम देने वाले अपराधियों की कोई स्पष्ट पहचान शुरुआती दौर में सामने नहीं आई थी।
इसके बावजूद पुलिस ने हार नहीं मानी। मामले के खुलासे के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया। जांच टीम ने घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला। साथ ही स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को सक्रिय किया गया। वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान की मदद से पुलिस धीरे-धीरे अपराधियों के करीब पहुंचती गई।
जांच के दौरान पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले। इन सुरागों के आधार पर बहादुर कुमार और पांडव कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में मिले तथ्यों के आधार पर अजय मंडल उर्फ छंगुरी मंडल का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय उसके पास से एक देसी कट्टा और एक जिंदा कारतूस बरामद किया गया।
पुलिस का मानना है कि बरामद हथियार इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है। इसलिए हथियार की वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि हत्या में प्रयुक्त हथियार यही था या कोई दूसरा।
गिरफ्तार तीनों आरोपी बाबूपुर गांव के निवासी हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बहादुर कुमार, पांडव कुमार और अजय मंडल उर्फ छंगुरी मंडल लंबे समय से इलाके में सक्रिय थे। हालांकि पुलिस अभी इस मामले में उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि और संभावित नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हत्या पूर्व नियोजित थी या किसी तत्काल विवाद का परिणाम। इसके लिए आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्क सूत्र और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि आगे की पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
इस कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम ने लगातार कई दिनों तक मेहनत की। छापेमारी टीम में शामिल अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यदि समय रहते आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती तो वे फरार भी हो सकते थे।
हत्या के मामले का खुलासा होने के बाद स्थानीय लोगों ने संतोष व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि अपराधियों की गिरफ्तारी से कानून व्यवस्था के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है। वहीं पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
भागलपुर पुलिस का कहना है कि अपराध के खिलाफ उसका अभियान लगातार जारी रहेगा। जिले में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए तकनीकी संसाधनों और आधुनिक जांच पद्धतियों का उपयोग किया जा रहा है। सबौर हत्याकांड के खुलासे को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।


