
भागलपुर की धरती एक बार फिर अपनी अनोखी कृषि उपलब्धि के कारण चर्चा में है। आम की खेती और दुर्लभ किस्मों के संरक्षण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके ‘मैंगो मैन’ के नाम से मशहूर अशोक चौधरी ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इस बार उन्होंने ऐसा आम का पेड़ विकसित किया है, जिसमें एक-दो नहीं बल्कि 52 अलग-अलग किस्मों के आम फल रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल बागवानी प्रेमियों बल्कि कृषि वैज्ञानिकों का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
भागलपुर में स्थित उनकी नर्सरी पहले से ही देशभर के आम उत्पादकों और कृषि विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय रही है। अब एक ही पेड़ पर 52 किस्म के आम तैयार करने की सफलता ने उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। विशेषज्ञ इसे ग्राफ्टिंग तकनीक और दीर्घकालिक अनुसंधान का शानदार उदाहरण मान रहे हैं।
वर्षों की मेहनत का परिणाम
अशोक चौधरी की यह सफलता एक दिन में हासिल नहीं हुई है। इसके पीछे वर्षों का परिश्रम, प्रयोग और धैर्य छिपा हुआ है। आम की विभिन्न किस्मों को एक ही पेड़ पर विकसित करने के लिए उन्होंने लगातार कई वर्षों तक वैज्ञानिक पद्धतियों और ग्राफ्टिंग तकनीक का उपयोग किया।
ग्राफ्टिंग एक ऐसी तकनीक है जिसमें अलग-अलग पौधों की शाखाओं को एक मुख्य पौधे से जोड़कर विकसित किया जाता है। यदि यह प्रक्रिया सफल हो जाए तो एक ही पेड़ पर कई प्रकार के फल या एक ही फल की विभिन्न किस्में प्राप्त की जा सकती हैं।
अशोक चौधरी ने इसी तकनीक का उपयोग करते हुए अलग-अलग किस्मों के आमों को एक ही वृक्ष पर विकसित किया। आज यह पेड़ उनकी मेहनत और नवाचार का जीवंत उदाहरण बन चुका है।
एक पेड़, 52 स्वाद
इस अनोखे पेड़ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें 52 प्रकार के आम लगते हैं। हर किस्म का रंग, आकार, स्वाद और पकने का समय अलग-अलग होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्यतः एक आम के पेड़ पर केवल एक ही किस्म के फल लगते हैं, लेकिन वैज्ञानिक तरीके से की गई ग्राफ्टिंग के माध्यम से कई किस्मों को एक साथ विकसित किया जा सकता है। हालांकि 52 किस्मों को सफलतापूर्वक एक ही पेड़ पर बनाए रखना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
यह पेड़ न केवल कृषि अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आम प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। लोग यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि एक ही पेड़ पर इतने अलग-अलग प्रकार के आम कैसे फल रहे हैं।
नर्सरी में मौजूद हैं 300 से अधिक किस्में
अशोक चौधरी की पहचान केवल इस एक उपलब्धि तक सीमित नहीं है। उनकी नर्सरी में आम की 300 से अधिक किस्मों का संग्रह मौजूद है। यह संग्रह अपने आप में एक जीवित कृषि विरासत माना जाता है।
उनकी नर्सरी में हजारों आम के पौधे और पेड़ मौजूद हैं। यहां देश के विभिन्न राज्यों से लेकर कई दुर्लभ और पारंपरिक किस्मों तक का संरक्षण किया जा रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में आम की किस्मों का संरक्षण करना आसान कार्य नहीं है। इसके लिए लगातार देखभाल, वैज्ञानिक जानकारी और लंबे समय तक समर्पण की आवश्यकता होती है।
विलुप्त हो रही किस्मों को फिर से जीवित करने का प्रयास
अशोक चौधरी का सबसे महत्वपूर्ण योगदान उन आम की किस्मों को संरक्षित करना है जो धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही थीं।
उन्होंने बताया कि कई पारंपरिक आम की किस्में आधुनिक व्यावसायिक खेती के कारण धीरे-धीरे समाप्त हो रही थीं। किसानों ने अधिक उत्पादन और बाजार में मांग वाली किस्मों पर ध्यान देना शुरू कर दिया, जिसके कारण कई स्थानीय और पारंपरिक प्रजातियां लुप्त होने लगीं।
इसी चुनौती को देखते हुए उन्होंने ऐसी दुर्लभ किस्मों को खोजने, संरक्षित करने और फिर से विकसित करने का अभियान शुरू किया। आज उनकी नर्सरी में कई ऐसी किस्में मौजूद हैं जिन्हें लगभग समाप्त माना जा रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्य केवल कृषि के लिए ही नहीं बल्कि जैव विविधता संरक्षण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कृषि वैज्ञानिकों ने की सराहना
अशोक चौधरी की उपलब्धियों को देखने और समझने के लिए समय-समय पर कृषि वैज्ञानिक भी उनकी नर्सरी का दौरा करते हैं। हाल ही में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर से पहुंचे एक वैज्ञानिक ने भी उनके कार्यों की सराहना की।
वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस प्रकार से उन्होंने आम की विभिन्न किस्मों को संरक्षित किया है और नई तकनीकों के माध्यम से उन्हें विकसित किया है, वह कृषि क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे प्रयास कृषि अनुसंधान, पौध संरक्षण और किसानों के प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे नई पीढ़ी के किसानों को भी नवाचार अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
भागलपुर की पहचान बन चुके हैं ‘मैंगो मैन’
समय के साथ अशोक चौधरी केवल एक किसान या बागवानी विशेषज्ञ नहीं रहे, बल्कि ‘मैंगो मैन’ के रूप में एक पहचान बन चुके हैं।
देश के विभिन्न हिस्सों से लोग उनकी नर्सरी देखने आते हैं। कृषि छात्र, शोधकर्ता, वैज्ञानिक और आम उत्पादक यहां पहुंचकर विभिन्न किस्मों की जानकारी प्राप्त करते हैं।
उनकी सफलता ने यह साबित किया है कि यदि खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार के साथ किया जाए तो कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि शोध और उपलब्धियों का माध्यम भी बन सकती है।
किसानों के लिए प्रेरणा
विशेषज्ञों का मानना है कि अशोक चौधरी की उपलब्धि किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच लगातार प्रयोग किए और आम की खेती को एक नई पहचान दी।
आज जब कृषि क्षेत्र नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे नवाचार किसानों को नई दिशा दिखा सकते हैं। फसल विविधीकरण, पौध संरक्षण और वैज्ञानिक खेती के क्षेत्र में उनके प्रयास उल्लेखनीय माने जा रहे हैं।
कृषि और जैव विविधता संरक्षण का अनोखा संगम
एक ही पेड़ पर 52 किस्म के आम विकसित करने की उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड या आकर्षण का विषय नहीं है। यह कृषि विज्ञान, जैव विविधता संरक्षण और नवाचार का अनोखा संगम भी है।
भागलपुर के ‘मैंगो मैन’ अशोक चौधरी ने यह दिखा दिया है कि जुनून, मेहनत और वैज्ञानिक सोच के बल पर असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। उनकी नर्सरी आज न केवल आम की दुर्लभ किस्मों का खजाना है, बल्कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और संरक्षण का एक जीवंत उदाहरण भी बन चुकी है।
उनकी यह नई उपलब्धि भविष्य में कृषि अनुसंधान और फल उत्पादन के क्षेत्र में नए प्रयोगों को प्रेरित कर सकती है। साथ ही यह संदेश भी देती है कि पारंपरिक किस्मों का संरक्षण और आधुनिक तकनीकों का उपयोग साथ-साथ चल सकता है।


