
पटना/नई दिल्ली: बिहार बीजेपी के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है। साहेबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने हर्ष फायरिंग मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें गैर इरादतन हत्या (Culpable Homicide Not Amounting to Murder) और शस्त्र अधिनियम से जुड़े आरोपों में दोषी पाया है। अब 9 जून को कोर्ट उनकी सजा का ऐलान करेगी।
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि राजू सिंह को कितनी सजा मिलेगी और क्या उनकी विधानसभा सदस्यता बच पाएगी? कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि अदालत उन्हें दो साल या उससे अधिक की सजा सुनाती है, तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के तहत उनकी विधायकी स्वतः समाप्त हो जाएगी।
10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा संभव
पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुसार गैर इरादतन हत्या के मामलों में अपराध की परिस्थितियों के आधार पर 10 साल तक की सजा या आजीवन कारावास का भी प्रावधान है। ऐसे में यदि अदालत कठोर रुख अपनाती है तो राजू सिंह की विधानसभा सदस्यता जाना लगभग तय माना जा रहा है।
पत्नी समेत तीन आरोपी बरी
इस मामले में अदालत ने राजू सिंह को दोषी ठहराया है, जबकि उनकी पत्नी रेणु सिंह और अन्य दो आरोपी राणा राजेश सिंह तथा रामेंद्र सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 31 दिसंबर 2018 का है। नए साल के जश्न के दौरान आयोजित एक पार्टी में कथित हर्ष फायरिंग हुई थी। आरोप है कि राजू सिंह द्वारा चलाई गई गोली आर्किटेक्ट अर्चना गुप्ता को लग गई थी। गंभीर रूप से घायल अर्चना गुप्ता की 3 जनवरी 2019 को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अब अदालत ने राजू सिंह को दोषी करार दिया है।
कौन हैं राजू सिंह?
राजू कुमार सिंह बिहार की राजनीति का चर्चित चेहरा रहे हैं। उन्होंने 2005 में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के टिकट पर चुनाव जीतकर राजनीति में पहचान बनाई। बाद में वे VIP में शामिल हुए और 2020 का चुनाव उसी दल से जीता। वर्ष 2022 में भाजपा में शामिल होने के बाद वे एनडीए के प्रमुख नेताओं में गिने जाने लगे। 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी।
बीजेपी की संख्या पर पड़ सकता है असर
यदि राजू सिंह की सदस्यता समाप्त होती है तो बिहार विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या एक और घट जाएगी। पहले ही बांकीपुर सीट खाली होने के कारण पार्टी की संख्या प्रभावित है। ऐसे में यह फैसला एनडीए के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहले भी जा चुकी हैं कई विधायकों की सदस्यताएं
बिहार में इससे पहले भी कई जनप्रतिनिधियों की सदस्यता अदालत से दो साल से अधिक की सजा मिलने के बाद समाप्त हो चुकी है। इनमें अनंत सिंह, मिश्रीलाल यादव, अनिल कुमार सहनी और मनोज मंजिल जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं।
अब सबकी नजर 9 जून पर टिकी है, जब अदालत राजू सिंह की सजा का ऐलान करेगी। इसी दिन यह भी लगभग तय हो जाएगा कि उनकी राजनीतिक पारी जारी रहेगी या उन्हें विधायकी गंवानी पड़ेगी।


