
पटना: बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख Lalu Prasad Yadav और उनके परिवार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। सुरक्षा में कथित कटौती के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi, नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav और परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा सुरक्षा वापस किए जाने के बाद अब इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
इसी कड़ी में Hindustani Awam Morcha (HAM) ने लालू परिवार और राजद पर तीखा हमला बोला है।
HAM का सवाल- लालू परिवार को खतरा किससे है?
HAM के राष्ट्रीय प्रवक्ता Shyam Sundar Sharan ने बयान जारी कर कहा कि लालू परिवार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर उन्हें खतरा किससे है।
उन्होंने दावा किया कि अब तक ऐसा कोई सार्वजनिक मामला सामने नहीं आया है, जिसमें लालू परिवार के किसी सदस्य को गंभीर सुरक्षा खतरा या आपराधिक धमकी मिली हो। ऐसे में सुरक्षा को लेकर पैदा किया जा रहा विवाद राजनीतिक सहानुभूति हासिल करने का प्रयास प्रतीत होता है।
‘सुरक्षा शक्ति प्रदर्शन का माध्यम नहीं’
श्याम सुंदर शरण ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य किसी व्यक्ति के जीवन और संपत्ति की रक्षा करना है, न कि राजनीतिक प्रभाव और ताकत का प्रदर्शन करना।
उनके अनुसार कुछ नेता सुरक्षा व्यवस्था को प्रतिष्ठा का प्रतीक मान लेते हैं और बड़े काफिले तथा सुरक्षाकर्मियों के जरिए अपनी राजनीतिक हैसियत दिखाने की कोशिश करते हैं।
“अगर वास्तव में कोई खतरा नहीं है तो जनता के टैक्स के पैसों से मिलने वाली अतिरिक्त सुरक्षा पर पुनर्विचार होना चाहिए।”
पुलिस बल का उपयोग जनता की सुरक्षा में हो
HAM प्रवक्ता ने कहा कि बिहार पुलिस के जवानों की जरूरत राज्य के कई क्षेत्रों में महसूस की जाती है। ऐसे में सुरक्षा संसाधनों का उपयोग आम नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में होना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि सुरक्षा से जुड़े फैसले राजनीतिक दबाव या प्रतिष्ठा के आधार पर नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के आकलन और वास्तविक खतरे के स्तर के आधार पर किए जाने चाहिए।
राजद ने लगाया राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
वहीं दूसरी ओर, राजद इस पूरे मामले को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देख रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष की आवाज दबाने और राजनीतिक रूप से परेशान करने के उद्देश्य से सुरक्षा व्यवस्था में कटौती की गई है।
राजद का आरोप है कि राज्य सरकार जानबूझकर विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है और सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।
पहले सुरक्षा लौटाई, फिर बढ़ा विवाद
गौरतलब है कि हाल के दिनों में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के बाद राबड़ी आवास से सुरक्षाकर्मियों को वापस भेज दिया गया था। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा टीम के भी वापस लौटने की खबरें सामने आईं, जिससे विवाद और गहरा गया।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे विवाद पर बिहार सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जारी सियासी टकराव ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
अब देखना होगा कि सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट, सरकार का पक्ष और विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला आगे किस दिशा में बढ़ता है।


