संपूर्ण क्रांति दिवस पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण को श्रद्धांजलि, मुख्यमंत्री बोले- लोकतंत्र और जनभागीदारी के प्रतीक थे जेपी

पटना। संपूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर शुक्रवार को राजधानी पटना में लोकनायक जयप्रकाश नारायण को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए राजकीय समारोह का आयोजन किया गया। गांधी मैदान के दक्षिण-पश्चिम छोर पर स्थापित उनकी आदमकद प्रतिमा स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने माल्यार्पण कर लोकनायक को नमन किया और उनके विचारों को वर्तमान समय में भी अत्यंत प्रासंगिक बताया। इस अवसर पर राज्य सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और जेपी आंदोलन से जुड़े लोग भी उपस्थित रहे।

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जयप्रकाश नारायण ने देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और जनशक्ति को संगठित करने का ऐतिहासिक कार्य किया था। उन्होंने अपने संघर्ष और नेतृत्व क्षमता के माध्यम से ऐसी विचारधारा को जन्म दिया, जिसने भारतीय राजनीति और समाज को नई दिशा प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि संपूर्ण क्रांति का संदेश आज भी समाज और लोकतंत्र को मजबूत बनाने की प्रेरणा देता है।

लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष का प्रतीक थे जयप्रकाश नारायण

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जयप्रकाश नारायण केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वे लोकतांत्रिक चेतना के सबसे प्रभावशाली प्रतीकों में से एक थे। उन्होंने देश में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनकल्याण आधारित शासन व्यवस्था की वकालत की और जीवन भर इन मूल्यों के लिए संघर्ष किया।

उन्होंने कहा कि लोकनायक ने जिस संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया था, उसका उद्देश्य केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं था, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और नैतिक बदलाव भी था। उनकी सोच समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और न्याय पहुंचाने की थी। यही कारण है कि दशकों बाद भी उनके विचार लोगों को प्रेरित करते हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में भी जब शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जनभागीदारी और सामाजिक न्याय की बात होती है, तब जयप्रकाश नारायण के विचार अत्यंत प्रासंगिक दिखाई देते हैं। उनके द्वारा दिखाया गया मार्ग नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

संपूर्ण क्रांति आंदोलन ने बदली थी देश की राजनीति

संपूर्ण क्रांति आंदोलन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है। 1970 के दशक में शुरू हुए इस आंदोलन ने देश की राजनीतिक दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आंदोलन का मूल उद्देश्य भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं और सामाजिक असमानताओं के खिलाफ जनजागरण पैदा करना था।

जयप्रकाश नारायण ने युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों को एकजुट कर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष का आह्वान किया था। उनके नेतृत्व में चले आंदोलन ने पूरे देश में व्यापक प्रभाव डाला और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर नई जागरूकता पैदा की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संपूर्ण क्रांति आंदोलन ने भारत की राजनीति में जनशक्ति की ताकत को स्थापित किया और लोकतंत्र की मजबूती में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यही कारण है कि हर वर्ष 5 जून को संपूर्ण क्रांति दिवस के रूप में मनाया जाता है और लोकनायक के योगदान को याद किया जाता है।

राष्ट्र निर्माण में आज भी प्रासंगिक हैं जेपी के विचार

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जयप्रकाश नारायण का जीवन राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का उदाहरण है। उन्होंने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर देश और समाज के लिए कार्य किया। उनका संपूर्ण जीवन संघर्ष, त्याग, ईमानदारी और लोकतंत्र के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश और समाज जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनमें लोकनायक के विचार मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं। लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना, समाज में समान अवसर सुनिश्चित करना और जनभागीदारी को बढ़ावा देना आज भी उतना ही आवश्यक है जितना उनके समय में था।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है और जयप्रकाश नारायण का जीवन युवाओं को सकारात्मक बदलाव के लिए आगे आने की प्रेरणा देता है।

बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि

राजकीय समारोह में राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने लोकनायक की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।

समारोह में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, भवन निर्माण मंत्री लेसी सिंह, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी, परिवहन मंत्री दामोदर रावत तथा गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इसके अतिरिक्त विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जेपी आंदोलन से जुड़े सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में नागरिक भी समारोह में मौजूद रहे।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बनाया माहौल भावुक

संपूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रगान और बिहार गीत के सामूहिक गायन से हुई। इससे पूरे परिसर में देशभक्ति और सम्मान का वातावरण देखने को मिला।

इसके बाद सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के कलाकारों द्वारा भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से लोकनायक के आदर्शों और उनके संघर्षों को याद किया गया। उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम को गंभीरता और श्रद्धा के साथ देखा तथा लोकनायक के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

नई पीढ़ी को प्रेरित करती है जेपी की विरासत

विशेषज्ञों का मानना है कि जयप्रकाश नारायण की विरासत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और जनसशक्तिकरण को लेकर उनके विचार आज भी नीतिनिर्माताओं और युवाओं के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।

संपूर्ण क्रांति दिवस पर आयोजित यह समारोह केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं था, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनः स्मरण करने और उन्हें मजबूत बनाने का अवसर भी था। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी, पारदर्शिता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पटना में आयोजित इस राजकीय समारोह ने एक बार फिर लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों और उनके योगदान को केंद्र में ला दिया। उनके संघर्ष, त्याग और लोकतंत्र के प्रति समर्पण की गूंज आज भी देश की राजनीतिक और सामाजिक चेतना में स्पष्ट रूप से सुनाई देती है।

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