विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री का बड़ा संदेश: ‘मां के नाम एक पेड़ लगाएं’, जेपी गंगा पथ पर शुरू हुआ एक लाख पौधारोपण अभियान

पटना। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बिहार में पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को जेपी गंगा पथ पर वृक्षारोपण कर “जेपी गंगा पथ समग्र उद्यान परियोजना” के तहत एक लाख पौधारोपण अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने राज्यवासियों से अपील की कि वे अपनी मां के नाम पर कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाएं और पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करें।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये वाहन राज्य के सभी जिलों में जाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और वृक्षारोपण के महत्व के बारे में जागरूक करेंगे। सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों को हरियाली अभियान से जोड़ना और राज्य में हरित आवरण को बढ़ाना है।

जेपी गंगा पथ बनेगा हरियाली और ऑक्सीजन का नया केंद्र

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जेपी गंगा पथ पर शुरू किया गया एक लाख पौधारोपण अभियान आने वाले वर्षों में राजधानी के पर्यावरणीय स्वरूप को बदल देगा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लगाए जाने वाले पौधे भविष्य में विशाल वृक्ष बनेंगे और यह पूरा क्षेत्र ऑक्सीजन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और बढ़ते प्रदूषण के बीच स्वच्छ हवा सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। ऐसे समय में वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा का आधार भी है। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती और ऑक्सीजन का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत वृक्ष ही हैं।

उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाएं। उन्होंने कहा कि जब समाज के सभी लोग इस दिशा में सक्रिय होंगे, तभी पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकेगा।

‘मां के नाम एक पेड़’ अभियान से जुड़ने की अपील

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से “मां के नाम एक पेड़” लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मां और प्रकृति दोनों ही जीवन देने वाली शक्तियां हैं। इसलिए यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी मां के सम्मान और स्मृति में एक पौधा लगाए, तो यह न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम होगा बल्कि भावनात्मक रूप से भी लोगों को प्रकृति से जोड़ने का कार्य करेगा।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों की माताएं अब इस दुनिया में नहीं हैं, वे उनकी स्मृति में पौधा लगाकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। यह पौधा आने वाले वर्षों तक उनकी यादों को जीवित रखने के साथ-साथ समाज और पर्यावरण को भी लाभ पहुंचाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि राज्य के करोड़ों लोग इस अभियान से जुड़ते हैं तो बिहार में हरियाली का एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।

प्रधानमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के प्रयासों का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को लेकर गंभीर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में पर्यावरण संरक्षण एक महत्वपूर्ण आधार है और इसके लिए सभी नागरिकों को योगदान देना होगा।

उन्होंने बिहार में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के अलग होने के बाद बिहार में वन क्षेत्र काफी कम रह गया था, लेकिन पिछले वर्षों में वृक्षारोपण अभियानों के माध्यम से राज्य में हरित आवरण को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 के बाद से राज्य में करोड़ों पौधे लगाए गए हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन मजबूत हुआ है और हरित क्षेत्र का विस्तार हुआ है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर जोर

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन को भी आवश्यक बताया। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से अपील की कि वे पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक स्कूटी की खरीद को प्राथमिकता दें।

उन्होंने कहा कि सरकार इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदने पर 12 हजार रुपये तक का अनुदान प्रदान कर रही है। इसके अलावा चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर एक लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य प्रदूषण कम करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि बड़ी संख्या में लोग इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करेंगे तो ईंधन पर निर्भरता कम होगी और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

सौर ऊर्जा को लेकर सरकार की बड़ी योजना

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार राज्य के अधिक से अधिक घरों तक सौर ऊर्जा पहुंचाने के लिए तेजी से काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि पहले चरण में पांच लाख घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाने की योजना है। इसके लिए भारत सरकार और राज्य सरकार मिलकर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएंगी। केंद्र सरकार प्रत्येक सोलर यूनिट पर 33 हजार रुपये का सहयोग देगी जबकि शेष राशि राज्य सरकार वहन करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य लोगों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना है। साथ ही बिजली उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ को भी कम करना है।

अतिरिक्त बिजली बेचकर होगी आय

मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा योजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि लोगों के लिए आय का नया स्रोत भी बन सकती है। उन्होंने बताया कि जिन परिवारों के यहां सोलर पैनलों के माध्यम से आवश्यकता से अधिक बिजली का उत्पादन होगा, राज्य सरकार उनसे अतिरिक्त बिजली खरीदेगी।

इस व्यवस्था के तहत अतिरिक्त बिजली की निर्धारित कीमत सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे लोगों को बिजली बिल में राहत मिलने के साथ अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी मिलेगा।

उन्होंने कहा कि इस अभियान से जीविका समूहों को भी जोड़ा जाएगा और उन्हें विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिल सके।

पर्यावरण संरक्षण को बताया सामूहिक जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का कार्य नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और प्रदूषण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे तो आने वाले वर्षों में बिहार पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि हरित बिहार और स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। “मां के नाम एक पेड़” और “एक लाख पौधारोपण अभियान” जैसी पहलें न केवल पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देंगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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