भागलपुर में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी पहल, एक दिन में 78 चापाकलों की मरम्मत कर बहाल की गई जलापूर्ति

भागलपुर: भीषण गर्मी और बढ़ती पेयजल आवश्यकता के बीच भागलपुर जिले में ग्रामीण इलाकों की जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। राज्य सरकार के निर्देश पर जिले में खराब पड़े चापाकलों की पहचान, मरम्मत और पुनर्संचालन को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत गुरुवार को जिले के विभिन्न प्रखंडों में व्यापक स्तर पर मरम्मत कार्य करते हुए 78 खराब चापाकलों को फिर से चालू कर दिया गया, जिससे हजारों ग्रामीण परिवारों को राहत मिली है।

गर्मी के मौसम में भूजल पर निर्भर ग्रामीण क्षेत्रों में चापाकल पेयजल का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं। ऐसे में किसी भी चापाकल के खराब होने से स्थानीय लोगों को पानी के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण प्रमंडल, भागलपुर पूर्वी और पश्चिमी द्वारा संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की जल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।

विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, 4 जून 2026 को जिले के अलग-अलग प्रखंडों में कुल 31 मरम्मति दलों को तैनात किया गया था। इन टीमों ने दिनभर विभिन्न गांवों में पहुंचकर खराब चापाकलों की जांच की और आवश्यक तकनीकी सुधार कर उन्हें पुनः चालू किया। अभियान के दौरान कुल 78 चापाकलों को सफलतापूर्वक दुरुस्त किया गया, जिससे कई गांवों में बंद पड़ी पेयजल व्यवस्था फिर से सामान्य हो गई।

अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। गर्मी के मौसम में जलस्तर में गिरावट और उपकरणों के लगातार उपयोग के कारण कई स्थानों पर चापाकल तकनीकी खराबी का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण और त्वरित मरम्मत की व्यवस्था की गई है।

प्रखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें तो शाहकुंड और गोराडीह में सबसे अधिक मरम्मत कार्य किया गया। शाहकुंड प्रखंड में 9 और गोराडीह में 8 चापाकलों को दुरुस्त कर पुनः चालू किया गया। इसके अलावा जगदीशपुर, सुल्तानगंज, कहलगांव, नाथनगर, सबौर, बिहपुर, नवगछिया और अन्य प्रखंडों में भी खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत की गई। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जहां भी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर टीम भेजकर समस्या का समाधान किया जा रहा है।

अभियान के दौरान विभाग को कुछ ऐसे चापाकल भी मिले जो पूरी तरह से अनुपयोगी हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 7 डिफंक्ट चापाकलों की पहचान की गई है। ये ऐसे चापाकल हैं जिनकी सामान्य मरम्मत संभव नहीं है और जिनके लिए प्रतिस्थापन या बड़े तकनीकी सुधार की आवश्यकता है। विभाग ने इनके लिए अलग से कार्य योजना तैयार करनी शुरू कर दी है। जल्द ही इन चापाकलों को बदलने अथवा नए उपकरण लगाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि प्रभावित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति बाधित न हो।

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में चलाया जा रहा यह अभियान केवल मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ग्रामीण जलापूर्ति तंत्र को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाना भी है। इसके लिए नियमित निरीक्षण, शिकायतों की निगरानी और तकनीकी टीमों की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है। विभागीय स्तर पर रोजाना समीक्षा की जा रही है ताकि किसी भी क्षेत्र में जल संकट की स्थिति पैदा न होने पाए।

गर्मी के मौसम में पेयजल की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में यदि जल स्रोतों में खराबी आ जाए तो लोगों को लंबी दूरी तय कर पानी लाना पड़ सकता है। कई गांवों में महिलाओं और बच्चों को इसका सबसे अधिक प्रभाव झेलना पड़ता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि खराब चापाकलों की पहचान कर उन्हें शीघ्र चालू कराया जाए। भागलपुर में इसी दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

विभाग का दावा है कि ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त शिकायतों का त्वरित निष्पादन किया जा रहा है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर भी निगरानी व्यवस्था विकसित की गई है ताकि खराब चापाकलों की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंच सके। सूचना मिलते ही मरम्मति दल को मौके पर भेजा जा रहा है और समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है।

जल विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में चापाकलों की नियमित देखभाल अत्यंत आवश्यक है। समय-समय पर रखरखाव नहीं होने से छोटे तकनीकी दोष भी बड़े नुकसान में बदल सकते हैं। ऐसे में पीएचईडी द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान भविष्य में होने वाली संभावित समस्याओं को भी कम करने में सहायक साबित हो सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और लोगों को पेयजल के लिए अतिरिक्त परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

स्थानीय लोगों ने भी विभाग की इस पहल का स्वागत किया है। कई गांवों में लंबे समय से खराब पड़े चापाकलों के चालू होने से लोगों को राहत मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता सबसे बड़ी आवश्यकता होती है और चापाकलों की मरम्मत से उनकी दैनिक जरूरतें पूरी करने में आसानी होगी।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि जिले में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी कारण मरम्मत कार्य के साथ-साथ जल स्रोतों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। जहां आवश्यकता होगी वहां अतिरिक्त संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

भागलपुर में चलाया जा रहा यह विशेष अभियान आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा। विभाग का लक्ष्य है कि जिले के सभी ग्रामीण इलाकों में प्रत्येक कार्यशील चापाकल सुचारु रूप से संचालित रहे और लोगों को निर्बाध, सुरक्षित तथा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी और ग्रामीण जनता को किसी प्रकार की जल संकट की स्थिति का सामना नहीं करने दिया जाएगा।

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