पूर्वी रेलवे की बड़ी पहल: चंदनपुर-शक्तिगढ़ चौथी रेल लाइन से खत्म होगी भीड़भाड़, माल और यात्री ट्रेनों को मिलेगी नई रफ्तार

कोलकाता: पूर्वी रेलवे के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल हावड़ा-बर्धमान कॉर्ड लाइन पर वर्षों से चली आ रही क्षमता की समस्या को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। चंदनपुर और शक्तिगढ़ के बीच प्रस्तावित चौथी रेल लाइन परियोजना अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। रेलवे ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत कर दी है, जिससे आने वाले वर्षों में इस अत्यधिक व्यस्त रेल खंड पर ट्रेनों की आवाजाही कहीं अधिक सुचारू और तेज होने की उम्मीद है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान समय में चंदनपुर-शक्तिगढ़ खंड अपनी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक दबाव झेल रहा है। यह रेल मार्ग हावड़ा मंडल के अंतर्गत सबसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर में शामिल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री और मालगाड़ियां संचालित होती हैं। लगातार बढ़ते रेल यातायात के कारण इस मार्ग पर ट्रेनों को अक्सर रुकना पड़ता है, जिससे यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ता है और माल ढुलाई संचालन भी प्रभावित होता है।

मौजूदा स्थिति को समझने के लिए यदि इसे सड़क यातायात से तुलना करें तो यह किसी ऐसे राजमार्ग की तरह है जहां वाहनों की संख्या सड़क की क्षमता से कहीं अधिक हो गई हो। परिणामस्वरूप ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है और हर वाहन को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। कुछ ऐसी ही स्थिति इस रेलखंड की भी है, जहां प्रतिदिन 83 यात्री ट्रेनें और 32 मालगाड़ियां गुजरती हैं। ट्रैक की सीमित क्षमता के कारण कई मालगाड़ियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे पूरे नेटवर्क में ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ता है।

रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, इस खंड पर वर्तमान क्षमता उपयोग 113 प्रतिशत से अधिक पहुंच चुका है। इसका सीधा मतलब है कि ट्रैक पर निर्धारित सीमा से कहीं अधिक ट्रेनों का संचालन हो रहा है। ऐसे में छोटी सी तकनीकी बाधा या परिचालन समस्या भी पूरे रेल नेटवर्क में देरी का कारण बन जाती है। कई बार मालगाड़ियों को दोनों दिशाओं में लगभग एक-एक घंटे तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है, जिससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि रेलवे की परिचालन दक्षता भी प्रभावित होती है।

इसी चुनौती को दूर करने के लिए पूर्वी रेलवे ने चंदनपुर से शक्तिगढ़ के बीच चौथी रेल लाइन बिछाने की योजना तैयार की है। यह नई लाइन मौजूदा ट्रैकों और पहले से निर्मित तीसरी लाइन के समानांतर विकसित की जाएगी। परियोजना का उद्देश्य केवल अतिरिक्त ट्रैक जोड़ना नहीं है, बल्कि पूरे कॉरिडोर की क्षमता में व्यापक वृद्धि करना है ताकि भविष्य की आवश्यकताओं को भी आसानी से पूरा किया जा सके।

करीब 42.66 किलोमीटर लंबी इस नई लाइन का कुल परियोजना दायरा लगभग 48.3 किलोमीटर निर्धारित किया गया है। इसके निर्माण पर लगभग 851.74 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह परियोजना भारतीय रेलवे के माल ढुलाई विस्तार कार्यक्रम और राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित कार्गो परिवहन लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश मानी जा रही है।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि 4 जून 2026 को परियोजना ने एक अहम प्रशासनिक उपलब्धि हासिल की, जब रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 20A के अंतर्गत राजपत्र अधिसूचना प्रकाशित की गई। इस अधिसूचना के साथ ही भूमि अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। इसके तहत प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद आगामी चरणों में आगे की अधिसूचनाएं जारी कर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

परियोजना के लिए लगभग 4.38 हेक्टेयर निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, जो हुगली और पूर्व बर्धमान जिलों में स्थित है। रेलवे और पश्चिम बंगाल सरकार इस प्रक्रिया को समन्वित तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की तैयारी की गई है ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो।

इस परियोजना के तहत केवल नई पटरी ही नहीं बिछाई जाएगी, बल्कि आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली, स्टेशन यार्ड पुनर्गठन और विभिन्न इंजीनियरिंग संरचनाओं का भी निर्माण किया जाएगा। रेलवे ने 95 छोटे पुलों और 8 बड़े पुलों की योजना तैयार की है। इन संरचनाओं के डिजाइन और तकनीकी स्वीकृतियों की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। साथ ही कई निर्माण पैकेजों के लिए निविदा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, चंदनपुर से पल्ला रोड खंड तक निर्माण के लिए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल पर निविदा जारी की जा चुकी है। शेष खंड के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा होते ही निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। रेलवे का लक्ष्य है कि परियोजना के विभिन्न चरणों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए।

नई चौथी लाइन कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इनमें पोराबाजार, बेलमुरी, धनियाखली, सिबाईचंडी, चराग्राम, हाजीगढ़, गुराप, झापनडांगा, जौग्राम, नबाग्राम, मस्कराम, चंचई और पल्ला रोड जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी और परिचालन क्षमता में सुधार का सीधा लाभ स्थानीय जनता और उद्योगों को मिलेगा।

रेलवे का अनुमान है कि परियोजना पूरी होने के बाद इस रेलखंड की क्षमता उपयोग दर 113 प्रतिशत से घटकर लगभग 94 प्रतिशत रह जाएगी। इससे ट्रेनों के संचालन में अधिक लचीलापन आएगा और देरी की समस्या में उल्लेखनीय कमी होगी। यात्री ट्रेनों की संख्या 83 से बढ़कर 91 तक पहुंच सकेगी, जबकि मालगाड़ियों का दैनिक संचालन 32 से बढ़कर 37 तक हो जाएगा।

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ माल परिवहन क्षेत्र को मिलने वाला है। पूर्वी भारत के प्रमुख बंदरगाहों जैसे पारादीप, हल्दिया और धामरा से आने वाले कोयला, सीमेंट, उर्वरक और अन्य औद्योगिक उत्पादों की ढुलाई अधिक तेज और सुगम होगी। इसके अलावा भविष्य में विकसित होने वाले नए कार्गो टर्मिनलों और औद्योगिक परियोजनाओं को भी पर्याप्त रेल क्षमता उपलब्ध हो सकेगी।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना केवल एक अतिरिक्त रेल लाइन नहीं बल्कि पूर्वी भारत की आर्थिक गतिविधियों को नई गति देने वाली आधारभूत संरचना साबित होगी। यात्री सेवाओं में सुधार, माल ढुलाई की बढ़ी हुई क्षमता और परिचालन दक्षता में वृद्धि के माध्यम से यह परियोजना आने वाले वर्षों में रेलवे नेटवर्क को अधिक विश्वसनीय और सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

चंदनपुर-शक्तिगढ़ चौथी लाइन परियोजना के पूरा होने के बाद हावड़ा मंडल के सबसे व्यस्त रेलखंडों में से एक को बड़ी राहत मिलेगी। इससे यात्रियों को समय पर ट्रेन सेवाएं उपलब्ध होंगी, माल परिवहन की गति बढ़ेगी और पूर्वी भारत के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास को नई मजबूती मिलेगी। रेलवे को उम्मीद है कि यह परियोजना भविष्य की बढ़ती परिवहन जरूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी।

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