
पटना। बिहार में न्यायिक, प्रशासनिक, शैक्षणिक और कारा अवसंरचना से जुड़ी महत्वपूर्ण निर्माण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए भवन निर्माण विभाग ने अपनी निगरानी और समीक्षा प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है। विभाग की मंत्री लेशी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों में चल रही निर्माण परियोजनाओं की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विश्वेश्वरैया भवन स्थित विभागीय कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस समीक्षा बैठक में दक्षिण प्रभाग के अंतर्गत आने वाले सभी भवन प्रमंडलों और विद्युत शाखाओं के कार्यों का आकलन किया गया। बैठक में भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार, वरीय पदाधिकारी, अभियंता तथा विभिन्न जिलों के कार्यपालक अभियंता भी शामिल हुए।
न्यायिक अवसंरचना को मजबूत करने पर विशेष जोर
बैठक में राज्य के न्यायिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए चल रही परियोजनाओं की समीक्षा प्रमुख एजेंडा रही। अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न जिलों में न्यायालय परिसरों और न्यायिक अधिकारियों के आवासीय भवनों का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
औरंगाबाद जिले के दाउदनगर में लगभग 12.10 करोड़ रुपये की लागत से 20 न्यायिक अधिकारियों के लिए बहुमंजिला आवासीय परिसर का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना का संरचनात्मक कार्य पूरा हो चुका है और वर्तमान में फिनिशिंग का काम जारी है।
वहीं बक्सर में न्यायिक अधिकारियों के लिए नए आवासीय भवनों का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इसके अलावा भागलपुर और जमुई में विशेष आबकारी न्यायालयों का निर्माण भी किया जा रहा है ताकि संबंधित मामलों का तेजी से निष्पादन सुनिश्चित किया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि जमुई में न्यायालय भवन के भूतल की छत की ढलाई का कार्य पूरा हो चुका है और निर्माण कार्य निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है।
प्रखंड स्तर पर आधुनिक प्रशासनिक भवनों का निर्माण
सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय भवनों के निर्माण कार्य की भी विस्तार से समीक्षा की गई। इन भवनों का उद्देश्य आम लोगों को एक ही परिसर में विभिन्न प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध कराना है।
भोजपुर जिले के तरारी, आरा सदर, पीरो, सहार, उदवंतनगर और कोइलवर प्रखंडों में आधुनिक प्रशासनिक भवनों का निर्माण जारी है। इसके अलावा अरवल जिले के कुर्था और अरवल सदर प्रखंड में भी भवन निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
इन भवनों के निर्माण से आम नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी और सरकारी सेवाओं की पहुंच अधिक सुगम हो सकेगी।
शेखपुरा में 30 करोड़ से अधिक की परियोजना
समीक्षा बैठक में शेखपुरा जिले के चेवाड़ा प्रखंड में बन रहे प्रखंड-सह-अंचल-सह-आवासीय भवन की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
करीब 30.74 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना में प्रशासनिक कार्यालयों के साथ अधिकारियों के आवासीय परिसर का भी निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में भवन की छत से जुड़ा शटरिंग कार्य प्रगति पर है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए और तय समयसीमा के भीतर परियोजना को पूरा किया जाए।
अनुसूचित वर्ग के छात्रों के लिए बन रहे आधुनिक विद्यालय
बैठक में कमजोर और वंचित वर्गों के विद्यार्थियों के लिए बनाए जा रहे आवासीय शिक्षण संस्थानों की भी समीक्षा की गई।
औरंगाबाद जिले के कुटुम्बा और मदनपुर प्रखंड में 720-720 छात्रों की क्षमता वाले डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों का निर्माण लगभग संरचनात्मक स्तर पर पूरा हो चुका है। वर्तमान में भवनों में प्लास्टर और फिनिशिंग का कार्य चल रहा है।
मंत्री ने संबंधित अभियंताओं को निर्देश दिया कि इन परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए ताकि छात्रों को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ मिल सके।
छात्रावास निर्माण परियोजनाओं में तेजी
कैमूर जिले के रामगढ़ और दुर्गावती प्रखंड में 100-100 छात्रों की क्षमता वाले राजकीय कल्याण छात्रावासों के निर्माण कार्य की भी समीक्षा की गई।
अधिकारियों ने बताया कि इन भवनों का संरचनात्मक कार्य पूरा हो चुका है और वर्तमान में अंतिम चरण के फिनिशिंग कार्य चल रहे हैं। सरकार का उद्देश्य सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे छात्रावास ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कारा अवसंरचना में भी हो रहा विस्तार
बैठक में गृह विभाग से जुड़ी कारा परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। अरवल जिले में प्रस्तावित नई मंडल कारा के अंतर्गत विभिन्न प्रशासनिक और आवासीय भवनों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है।
इसके अलावा भागलपुर के कहलगांव में लगभग 42.37 करोड़ रुपये की लागत से उपकारा का निर्माण कराया जा रहा है। इस परियोजना के तहत 198 कैदियों की क्षमता वाले बैरक, चिकित्सालय तथा प्रशासनिक भवन विकसित किए जा रहे हैं।
सरकार का मानना है कि आधुनिक कारा अवसंरचना से सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक दक्षता दोनों में सुधार होगा।
जहानाबाद और नवादा की परियोजनाओं पर भी फोकस
समीक्षा बैठक के दौरान जहानाबाद जिले में निर्माणाधीन 500 क्षमता वाले विशाल सभागार की प्रगति का भी मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सभागार का ट्रस लेवल तक ढलाई कार्य पूरा हो चुका है।
वहीं नवादा में जिला अतिथि गृह परिसर में बनाए जा रहे अतिरिक्त आठ कमरों वाले आधुनिक गेस्ट हाउस का निर्माण लगभग अंतिम चरण में है। वर्तमान में सेनेटरी और फायर फाइटिंग से संबंधित कार्य किए जा रहे हैं।
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रशासनिक और सरकारी कार्यक्रमों के आयोजन में सुविधा होगी।
भूमि उपलब्धता और समन्वय पर जोर
मंत्री लेशी सिंह ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन परियोजनाओं में भूमि संबंधी समस्याएं हैं, वहां संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर जल्द समाधान निकाला जाए।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में भूमि संबंधी विवाद और प्रशासनिक अड़चनें अक्सर देरी का कारण बनती हैं। इसलिए सभी विभागों को मिलकर ऐसी बाधाओं को दूर करना चाहिए।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनहित से जुड़े निर्माण कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और परियोजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
देरी पर संवेदकों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी
बैठक में निर्माण कार्यों में हो रही देरी को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जो संवेदक निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा विकास योजनाओं को तेजी से पूरा करने की है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
अधिकारियों को भी नियमित निरीक्षण और निगरानी के निर्देश दिए गए ताकि निर्माण कार्यों की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके।
गुणवत्ता से समझौता नहीं करने का निर्देश
भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने भी बैठक के दौरान कई परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने सभी वरीय और कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परियोजना में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित संवेदक और जिम्मेदार अभियंता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सचिव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल भवन निर्माण नहीं बल्कि दीर्घकालिक और गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना का विकास करना है।
विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर सरकार का जोर
राज्य सरकार वर्तमान में न्यायिक, प्रशासनिक, शैक्षणिक और कारा अवसंरचना से जुड़ी दर्जनों परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य आम लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना और सरकारी तंत्र को अधिक प्रभावी बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कर लिया जाता है तो इससे बिहार के प्रशासनिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। यही कारण है कि सरकार अब निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा कर रही है और अधिकारियों को परिणाम आधारित कार्यशैली अपनाने के निर्देश दे रही है।


