
समस्तीपुर। बिहार में सहकारिता आंदोलन को नई मजबूती देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सहकारिता विभाग ने समस्तीपुर जिले के पूसा स्थित सहकारिता प्रशिक्षण केंद्र को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है। मंगलवार को सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने प्रशिक्षण केंद्र के जीर्णोद्धार कार्यों का उद्घाटन किया और तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए।
इस अवसर पर आयोजित समारोह में मंत्री ने सहकारिता को ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि राज्य सरकार सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाकर गांवों में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करना चाहती है। उन्होंने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में नए आर्थिक अवसर पैदा करने पर विशेष बल दिया।
आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हुआ प्रशिक्षण केंद्र
पूसा स्थित सहकारिता प्रशिक्षण केंद्र लंबे समय से सहकारी क्षेत्र के अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र रहा है। अब इसके जीर्णोद्धार के बाद यहां आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कंप्यूटर कक्ष, पुस्तकालय कक्ष, सभा कक्ष, छात्रावास और प्राचार्य आवास का उद्घाटन किया। इन सुविधाओं के शुरू होने से प्रशिक्षण केंद्र की क्षमता और प्रभावशीलता दोनों में वृद्धि होगी।
अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक तकनीकी संसाधनों और बेहतर अधोसंरचना के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को अधिक व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।
सहकारिता को बताया ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि सहकारिता केवल एक संगठनात्मक व्यवस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम है।
उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाएं किसानों, मजदूरों, छोटे उद्यमियों और ग्रामीण समुदायों को संगठित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बिहार सरकार इसी सोच के साथ सहकारिता आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
मंत्री ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन, विपणन और स्वरोजगार की संभावनाओं को नई दिशा दी जा सकती है।
युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार पर जोर
अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि सहकारिता मॉडल के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि युवा संगठित होकर सहकारी संस्थाओं के माध्यम से विभिन्न व्यवसायों में भागीदारी करें तो उन्हें रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ही ऐसे अवसर विकसित करना है जहां युवा अपने कौशल का उपयोग कर बेहतर आय अर्जित कर सकें।
शहद, मखाना और मत्स्य क्षेत्र में अपार संभावनाएं
मंत्री ने बिहार की पारंपरिक और विशेष उत्पाद आधारित अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में शहद उत्पादन, मखाना, मत्स्य पालन, बुनकर उद्योग तथा कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने इन क्षेत्रों में प्राथमिक सहकारी समितियों के गठन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि संगठित ढंग से कार्य करने पर इन क्षेत्रों से जुड़े लोगों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
विशेष रूप से मखाना और मत्स्य क्षेत्र को बिहार की पहचान बताते हुए उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से इन क्षेत्रों का विस्तार कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाई जा सकती है।
फूड प्रोसेसिंग और ग्रामीण उद्यमों को मिलेगा बढ़ावा
मंत्री ने कहा कि सहकारी संस्थाएं केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। इनके माध्यम से फूड प्रोसेसिंग इकाइयों, जन औषधि केंद्रों, पेट्रोल पंपों और अन्य ग्रामीण उद्यमों का सफल संचालन भी किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सहकारी मॉडल बेहद प्रभावी साबित हो सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में निवेश बढ़ने से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा और कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार होगा।
वेजफेड को और मजबूत बनाने की आवश्यकता
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने वेजफेड की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसानों और उत्पादकों को बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वेजफेड को पंचायत और ग्रामीण स्तर तक और अधिक मजबूत बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि उत्पादकों को उचित बाजार और बेहतर मूल्य मिलेगा तो उनकी आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आएगा।
सरकार इस दिशा में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कार्य कर रही है ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित लाभ मिल सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भूमिका पर जोर
मंत्री ने कहा कि सहकारिता तंत्र को मजबूत बनाने में प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकारियों, कर्मचारियों और सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों की कार्यक्षमता और प्रशासनिक क्षमता में वृद्धि होती है।
उन्होंने प्रतिभागियों से अपील की कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और अनुभव का उपयोग अपने कार्यक्षेत्र में करें तथा सहकारी संस्थाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने में योगदान दें।
उनका कहना था कि प्रशिक्षित मानव संसाधन ही किसी भी संगठन की सफलता का आधार होता है।
मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किए गए प्रतिभागी
सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का पहला चरण 1 जून से 3 जून 2026 तक संचालित किया गया।
इस चरण में प्रतिभागियों को ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। अब ये प्रशिक्षित अधिकारी और प्रतिनिधि राज्य के विभिन्न जिलों में जाकर पैक्स प्रतिनिधियों और अन्य सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारियों को प्रशिक्षण देंगे।
अधिकारियों का मानना है कि इस मॉडल से प्रशिक्षण का लाभ व्यापक स्तर तक पहुंच सकेगा और पूरे राज्य में सहकारी संस्थाओं की कार्यक्षमता में सुधार होगा।
वृक्षारोपण और निर्माण कार्यों का निरीक्षण
कार्यक्रम के दौरान मंत्री राम कृपाल यादव ने प्रशिक्षण केंद्र परिसर में वृक्षारोपण भी किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के महत्व पर जोर देते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की।
इसके अलावा उन्होंने परिसर में चल रही निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण कर उनकी प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता और समय सीमा का पालन करते हुए पूरे किए जाएं।
सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर बिहार की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारिता प्रशिक्षण केंद्रों को मजबूत करना और प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना बिहार के सहकारी आंदोलन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
राज्य सरकार की योजना है कि सहकारिता को केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित न रखकर उसे ग्रामीण उद्योग, विपणन, प्रसंस्करण और सेवा क्षेत्रों से भी जोड़ा जाए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा।
पूसा प्रशिक्षण केंद्र के जीर्णोद्धार और नए प्रशिक्षण मॉडल को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में यह पहल बिहार के ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और सहकारी संस्थाओं की मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


