सिविल सर्जन का बोर्ड लगाकर हो रही थी स्मैक तस्करी, पुलिस ने 800 ग्राम नशीला पदार्थ के साथ दो तस्करों को दबोचा

पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया जिले में पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक स्कॉर्पियो वाहन से भारी मात्रा में स्मैक बरामद की है। हैरानी की बात यह है कि जिस वाहन से नशीला पदार्थ बरामद हुआ, उस पर मधेपुरा के सिविल सर्जन का बोर्ड लगा हुआ था। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वाहन किसी सरकारी अधिकारी का है, लेकिन जांच के दौरान मामला पूरी तरह अलग निकला। पुलिस ने इस कार्रवाई में दो कथित तस्करों को गिरफ्तार किया है, जबकि उनके एक अन्य साथी की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।

बरामद स्मैक की मात्रा करीब 800 ग्राम बताई जा रही है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह खेप किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है।

गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई

पूर्णिया पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग जिले के रास्ते नशीले पदार्थों की बड़ी खेप लेकर गुजरने वाले हैं। सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया। इसके बाद संदिग्ध वाहनों की जांच के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया।

वाहन जांच के दौरान पुलिस की नजर एक स्कॉर्पियो वाहन पर पड़ी। वाहन पर एक सरकारी अधिकारी का बोर्ड लगा हुआ था, जिससे सामान्य तौर पर किसी को संदेह नहीं होता। हालांकि पुलिस को पहले से मिली सूचना के आधार पर वाहन को रोकने का प्रयास किया गया।

पुलिस के अनुसार जैसे ही वाहन चालक को रुकने का संकेत दिया गया, उसने वाहन की रफ्तार बढ़ा दी और सर्विस रोड की ओर भागने लगा। इसके बाद पुलिस टीम ने पीछा करना शुरू कर दिया। कुछ दूरी तक पीछा करने के बाद वाहन को घेरकर रोक लिया गया।

वाहन से उतरकर भागने लगे तस्कर

पुलिस द्वारा वाहन रोके जाने के बाद उसमें सवार लोग घबरा गए। अधिकारियों के अनुसार दो लोग वाहन से उतरकर भागने का प्रयास करने लगे। हालांकि पहले से सतर्क पुलिसकर्मियों ने दोनों को कुछ ही दूरी पर पकड़ लिया।

गिरफ्तारी के बाद जब दोनों की तलाशी ली गई और वाहन की जांच शुरू हुई तो पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी। वाहन से आठ अलग-अलग पैकेट बरामद किए गए। प्रत्येक पैकेट में लगभग 100 ग्राम स्मैक रखी गई थी। इस प्रकार कुल 800 ग्राम स्मैक जब्त की गई।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इतनी बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ मिलना यह संकेत देता है कि आरोपी केवल स्थानीय स्तर पर तस्करी नहीं कर रहे थे, बल्कि किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।

सिविल सर्जन का बोर्ड देखकर चौंक गई पुलिस

कार्रवाई के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि स्कॉर्पियो वाहन पर मधेपुरा के सिविल सर्जन का बोर्ड लगा हुआ था। आमतौर पर सरकारी बोर्ड लगे वाहनों को देखकर लोग संदेह नहीं करते और ऐसे वाहन कई जगह आसानी से निकल जाते हैं।

पुलिस ने जब इस संबंध में जानकारी जुटाई तो पता चला कि वाहन और उस पर लगे बोर्ड के बीच कोई वैध संबंध नहीं है। अधिकारियों ने संबंधित विभाग से संपर्क कर जानकारी ली। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि जिस नंबर की गाड़ी पकड़ी गई है, वह संबंधित अधिकारी की अधिकृत सरकारी गाड़ी नहीं है।

इसके बाद यह आशंका और मजबूत हो गई कि तस्करों ने पुलिस और आम लोगों को भ्रमित करने के लिए जानबूझकर सरकारी अधिकारी का बोर्ड लगाया था ताकि जांच से बचा जा सके।

कालियागंज से लाई जा रही थी खेप

पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां पुलिस को दी हैं। प्रारंभिक पूछताछ में उन्होंने बताया कि स्मैक की यह खेप पश्चिम बंगाल के कालियागंज क्षेत्र से लाई जा रही थी। इसे बिहार के विभिन्न इलाकों में पहुंचाने की योजना थी।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि खेप का अंतिम गंतव्य कौन सा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों ने पहले भी इस प्रकार की तस्करी की है या नहीं।

विशेष जांच दल आरोपियों के संपर्कों और उनके नेटवर्क को खंगाल रहा है ताकि पूरे गिरोह तक पहुंचा जा सके।

10 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही कीमत

बरामद स्मैक की कीमत को लेकर भी पुलिस ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। अधिकारियों के अनुसार जब्त नशीले पदार्थ का बाजार मूल्य 10 लाख रुपये से अधिक हो सकता है। हालांकि अंतिम मूल्यांकन जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्मैक जैसे नशीले पदार्थों की कीमत क्षेत्र और मांग के अनुसार बदलती रहती है। कई बार छोटे-छोटे पैकेट बनाकर बेचने पर इसकी कीमत कई गुना तक बढ़ जाती है। यही कारण है कि मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल गिरोह भारी मुनाफा कमाने के लिए इस अवैध कारोबार को अंजाम देते हैं।

मोबाइल डेटा और नेटवर्क की जांच शुरू

पुलिस ने आरोपियों के पास से मिले मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं। अब तकनीकी टीम मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल, चैट रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल जानकारियों की जांच कर रही है।

अधिकारियों को उम्मीद है कि मोबाइल से ऐसे कई सुराग मिल सकते हैं जो पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में मदद करेंगे। यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों का संपर्क बिहार के अलावा अन्य राज्यों के तस्करों से था या नहीं।

तकनीकी जांच के आधार पर कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

फरार आरोपी की तलाश में छापेमारी

पुलिस ने बताया कि इस पूरे मामले में एक अन्य व्यक्ति की भी भूमिका सामने आई है, जो कार्रवाई के दौरान फरार होने में सफल रहा। उसकी गिरफ्तारी के लिए विभिन्न संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद तस्करी नेटवर्क के बारे में और महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इसलिए पुलिस उसे जल्द से जल्द पकड़ने के प्रयास में जुटी हुई है।

नशा तस्करी के खिलाफ अभियान जारी

पूर्णिया पुलिस ने हाल के महीनों में नशा तस्करी के खिलाफ कई अभियान चलाए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों और प्रमुख सड़कों पर लगातार वाहन जांच अभियान चलाया जा रहा है ताकि नशीले पदार्थों की अवैध आवाजाही को रोका जा सके।

सदर एसडीपीओ-1 अभिनव पाराशर ने कहा कि जिले में नशे के कारोबार को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा। पुलिस लगातार सूचना तंत्र को मजबूत कर रही है और मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। साथ ही बरामद स्मैक, वाहन, मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने का प्रयास जारी है। इस कार्रवाई को पूर्णिया पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिसने एक बार फिर नशा तस्करों के खिलाफ सख्त संदेश दिया है।

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