
भागलपुर/नवगछिया। बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद अवैध शराब की तस्करी के प्रयास लगातार सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में नवगछिया रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब बरामद की है। विशेष जांच अभियान के दौरान ट्रेन से मिले एक लावारिस बैग और प्लास्टिक बोरे की तलाशी लेने पर कुल 25.75 लीटर अंग्रेजी शराब जब्त की गई। हालांकि कार्रवाई के दौरान किसी भी व्यक्ति ने बरामद सामान पर अपना दावा नहीं किया, जिसके बाद इसे लावारिस मानते हुए जब्त कर लिया गया।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि शराब की यह खेप रेल मार्ग के जरिए बिहार के किसी हिस्से में पहुंचाई जाने वाली थी। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस तस्करी के पीछे कौन लोग शामिल हैं।
विशेष अभियान के दौरान मिली सफलता
कटिहार-बरौनी रेलखंड पर रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी द्वारा संयुक्त रूप से विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य रेल मार्ग के माध्यम से शराब, नशीले पदार्थों और अन्य प्रतिबंधित सामानों की तस्करी पर रोक लगाना है।
अभियान के तहत विभिन्न ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर सघन जांच की जा रही थी। इसी क्रम में नवगछिया रेलवे स्टेशन पर पहुंची ट्रेन संख्या 63308 मेमो पैसेंजर की भी गहन तलाशी ली गई। जांच के दौरान सुरक्षा कर्मियों की नजर ट्रेन के शौचालय के समीप रखे एक पिट्ठू बैग और एक सफेद प्लास्टिक बोरे पर पड़ी।
दोनों सामान संदिग्ध स्थिति में पड़े हुए थे और आसपास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। इससे सुरक्षा कर्मियों को शक हुआ और उन्होंने तत्काल दोनों वस्तुओं की जांच शुरू की।
बैग और बोरे से निकली शराब की बोतलें
जब आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम ने संदिग्ध बैग और बोरे को खोलकर देखा तो उसमें बड़ी मात्रा में अंग्रेजी शराब रखी हुई मिली। जांच के दौरान कुल 37 बोतलें बरामद की गईं।
बरामद शराब में 750 मिलीलीटर क्षमता की 29 बोतलें और 500 मिलीलीटर क्षमता की 8 बोतलें शामिल थीं। सभी बोतलों को मिलाकर कुल 25.750 लीटर अंग्रेजी शराब जब्त की गई।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में शराब का एक साथ मिलना यह संकेत देता है कि इसे व्यक्तिगत उपयोग के लिए नहीं बल्कि अवैध तस्करी के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि तस्करों ने सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए शराब को लावारिस छोड़ दिया होगा।
किसी ने नहीं किया सामान पर दावा
कार्रवाई के दौरान सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि जब बरामदगी की गई, तब कोई भी व्यक्ति बैग या बोरे पर अपना दावा करने के लिए सामने नहीं आया। ट्रेन में मौजूद यात्रियों से भी पूछताछ की गई, लेकिन किसी ने सामान से संबंध होने की बात स्वीकार नहीं की।
इसके बाद रेलवे पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत दोनों सामानों को लावारिस घोषित कर जब्त कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि कई बार तस्कर जांच अभियान की भनक लगते ही सामान छोड़कर फरार हो जाते हैं ताकि गिरफ्तारी से बच सकें।
हालांकि सामान छोड़कर भाग जाने के बावजूद जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि शराब वहां तक कैसे पहुंची और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
रेल मार्ग बन रहा तस्करों की पसंद
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद तस्करों ने शराब की आपूर्ति के लिए कई नए तरीके अपनाए हैं। इनमें रेल मार्ग का इस्तेमाल भी प्रमुख रूप से शामिल है। ट्रेनों में बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होने के कारण तस्कर अक्सर सामान को छिपाकर या लावारिस छोड़कर गंतव्य तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे नेटवर्क का विस्तार और लंबी दूरी की ट्रेनों की उपलब्धता तस्करों को आकर्षित करती है। कई मामलों में शराब और नशीले पदार्थों को सामान्य सामान की तरह पैक कर भेजा जाता है ताकि सुरक्षा जांच में आसानी से पकड़े न जा सकें।
इसी वजह से रेलवे सुरक्षा एजेंसियां अब नियमित रूप से ट्रेनों और स्टेशनों पर सघन जांच अभियान चला रही हैं।
आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त रणनीति
रेल मार्ग से हो रही अवैध तस्करी को रोकने के लिए आरपीएफ और जीआरपी ने संयुक्त रणनीति तैयार की है। इसके तहत प्रमुख स्टेशनों, प्लेटफॉर्मों, प्रतीक्षालयों और ट्रेनों में लगातार निगरानी रखी जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध यात्रियों के साथ-साथ लावारिस सामानों पर भी विशेष नजर रख रही हैं। इसके अलावा आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी कैमरों और खुफिया सूचनाओं का भी उपयोग किया जा रहा है ताकि तस्करी के नेटवर्क को समय रहते पकड़ा जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि संयुक्त कार्रवाई के कारण पिछले कुछ समय में कई बड़ी बरामदगियां हुई हैं, जिससे तस्करों के नेटवर्क को झटका लगा है।
सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे
बरामदगी के बाद रेलवे पुलिस ने स्टेशन और ट्रेन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों को उम्मीद है कि फुटेज के माध्यम से उन लोगों की पहचान की जा सकेगी जिन्होंने बैग और बोरा ट्रेन में रखा था।
इसके अलावा ट्रेन में यात्रा करने वाले कुछ संदिग्ध यात्रियों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या शराब किसी विशेष स्थान तक पहुंचाई जानी थी या फिर इसे किसी स्टेशन पर उतारने की योजना थी।
तस्करों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
जीआरपी नवगछिया के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि रेल मार्ग से शराब, नशीले पदार्थों और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं और ऐसे गिरोहों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार तस्करों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी चिन्हित किया जाएगा। जांच एजेंसियों का उद्देश्य केवल शराब बरामद करना नहीं, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे पूरे तस्करी तंत्र को ध्वस्त करना है।
रेलवे सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी उपलब्धि
नवगछिया रेलवे स्टेशन पर हुई यह बरामदगी रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी की सतर्कता का परिणाम मानी जा रही है। समय पर की गई जांच के कारण बड़ी मात्रा में अंग्रेजी शराब पकड़ी गई, जो संभवतः बिहार के किसी क्षेत्र में अवैध रूप से पहुंचाई जानी थी।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की नियमित कार्रवाई न केवल तस्करों के मनोबल को कमजोर करेगी, बल्कि रेल मार्ग के जरिए होने वाली अवैध गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद करेगी। फिलहाल बरामद शराब को जब्त कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और पूरे मामले की जांच जारी है।


