
आरा/भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले से उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने आरक्षित टिकट होने के बावजूद सीट उपलब्ध नहीं कराने के मामले में Indian Railways को सेवा में दोषी ठहराया है। आयोग ने रेलवे को टिकट राशि ब्याज सहित लौटाने, मुआवजा देने और मुकदमे का खर्च वहन करने का आदेश दिया है।
मामला कोईलवर प्रखंड के कायमनगर निवासी Ravishankar Pandey और उनके तीन साथियों से जुड़ा है। सभी यात्री विंध्याचल से आरा लौट रहे थे। उन्होंने आईआरसीटीसी के माध्यम से ट्रेन संख्या 13202 एलटीटी-पटना एक्सप्रेस के बी-4 कोच में चार सीटें आरक्षित कराई थीं, जिसके लिए कुल 1,876.80 रुपये का भुगतान किया गया था।
यात्रियों का आरोप था कि ट्रेन में अत्यधिक भीड़ होने के कारण उनकी आरक्षित सीटों पर अन्य लोगों ने कब्जा कर लिया था। सीट खाली कराने की कोशिश करने पर उन्हें दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। उन्होंने टीटीई और रेलवे पुलिस से भी मदद मांगी, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। यहां तक कि रेलवे सेवा और रेल मंत्रालय के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
स्थिति ऐसी हो गई कि चारों यात्रियों को पूरी यात्रा खड़े होकर पूरी करनी पड़ी। मामले की सुनवाई के दौरान रेलवे ने इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला बताते हुए अपना बचाव किया, लेकिन आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
करीब चार वर्षों तक चली सुनवाई के बाद आयोग ने फैसला सुनाते हुए रेलवे और रेल मंत्रालय को टिकट की पूरी राशि 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया। इसके अलावा यात्रियों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक कष्ट के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा तथा 15 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश भी दिया गया है। यह भुगतान 60 दिनों के भीतर करना होगा।
आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि आरक्षित टिकट जारी करने के बाद यात्री को उसकी सीट उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है। यदि ऐसा नहीं होता है तो यह सेवा में गंभीर कमी मानी जाएगी।


