बीएयू सबौर के ‘खेत बचाओ अभियान’ से किसानों को मिला प्राकृतिक खेती का संदेश, 268 किसानों ने लिया टिकाऊ कृषि का संकल्प

भागलपुर। कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की सेहत को सुरक्षित रखने और पर्यावरण संतुलन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), बाढ़ में सोमवार को ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ किया गया। भारत सरकार की पहल पर शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी संरक्षण, प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों, कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया। अभियान के दौरान किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और बदलते जलवायु परिदृश्य में कृषि की नई चुनौतियों एवं संभावनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ अभियान का शुभारंभ

कृषि विज्ञान केंद्र, बाढ़ परिसर में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उद्घाटन सत्र में उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों का समाधान केवल उत्पादन बढ़ाने में नहीं, बल्कि मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने में भी निहित है।

उन्होंने कहा कि यदि मिट्टी की गुणवत्ता कमजोर होगी तो भविष्य में कृषि उत्पादन भी प्रभावित होगा। इसलिए किसानों को वैज्ञानिक सलाह के आधार पर खेती करनी चाहिए और मिट्टी जांच को खेती का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए।

कुलपति ने किसानों से अपील की कि वे अपनी भूमि की मिट्टी की जांच कराकर उसी के अनुरूप उर्वरकों का प्रयोग करें। इससे न केवल उत्पादन लागत कम होगी बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की अपील

कार्यक्रम के दौरान कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने किसानों को अपनी कुल कृषि योग्य भूमि के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से में जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो रही है। ऐसे में प्राकृतिक खेती भविष्य की आवश्यकता बनती जा रही है।

उन्होंने बताया कि गोबर, गोमूत्र, जैविक खाद और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से तैयार की गई फसलें न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहतर होती हैं बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी बनाए रखती हैं।

कुलपति ने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसानों की लागत घट सकती है और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है।

हरित खाद और जैविक विकल्पों पर जोर

कार्यक्रम में प्रसार शिक्षा के सह निदेशक डॉ. आर.एन. सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए हरित खाद और जैविक उर्वरकों के उपयोग पर विशेष बल दिया।

उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता लंबे समय में कृषि भूमि के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। इसके विपरीत जैविक और जीवाणु खाद मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाती हैं और पौधों को संतुलित पोषण प्रदान करती हैं।

उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे धीरे-धीरे रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करें और जैविक विकल्पों को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाएं।

औषधीय और सुगंधित फसलों में अवसर

कार्यक्रम में कृषि अनुसंधान संस्थान, पटना के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एस.एन. दास ने किसानों को औषधीय और सुगंधित फसलों की खेती के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि इन फसलों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है और कम क्षेत्रफल में भी अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है।

डॉ. दास ने कहा कि पारंपरिक फसलों के साथ-साथ किसानों को वैकल्पिक कृषि मॉडल पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे आय के नए स्रोत विकसित होंगे और कृषि क्षेत्र अधिक लाभकारी बन सकेगा।

किसान हितकारी योजनाओं की दी जानकारी

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र, बाढ़ की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रीता सिंह ने जिले में संचालित विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।

उन्होंने किसानों को बताया कि सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और पोषक अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में किसानों को ऐसी फसलों और तकनीकों को अपनाना होगा जो कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हों।

डॉ. रीता सिंह ने विशेष रूप से मोटे अनाज और पोषक फसलों की खेती को भविष्य की जरूरत बताते हुए किसानों को इसके प्रति जागरूक किया।

मिट्टी जांच और संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष चर्चा

कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक राजीव कुमार ने मिट्टी जांच और संतुलित उर्वरक उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि कई किसान बिना मिट्टी जांच कराए उर्वरकों का उपयोग करते हैं, जिससे लागत बढ़ती है और मिट्टी का पोषण संतुलन बिगड़ जाता है।

उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने से उत्पादन में सुधार होता है और अनावश्यक खर्च भी कम होता है।

साथ ही उन्होंने जैविक और जीवाणु खादों के उपयोग तथा उर्वरक दक्षता बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों की भी जानकारी दी।

कृषि वानिकी को बताया लाभकारी मॉडल

उद्यान वैज्ञानिक डॉ. पुष्पम पटेल ने किसानों को कृषि वानिकी की उपयोगिता के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि कृषि वानिकी अपनाने से किसान एक ही भूमि पर विभिन्न प्रकार की फसलों और वृक्षों का उत्पादन कर सकते हैं। इससे भूमि की उत्पादकता बढ़ती है और अतिरिक्त आय के अवसर भी प्राप्त होते हैं।

उन्होंने समेकित पोषक तत्व प्रबंधन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि संतुलित पोषण ही स्वस्थ मिट्टी और बेहतर उत्पादन की कुंजी है।

268 किसानों ने लिया संकल्प

कार्यक्रम में कुल 268 पुरुष और महिला किसानों ने भाग लिया। सभी किसानों ने टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का संकल्प लिया।

किसानों ने मिट्टी की जांच के आधार पर खेती करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह और प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को अपनाते हैं तो इससे कृषि उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय तीनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

मिट्टी बचाने से सुरक्षित होगा भविष्य

विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में मिट्टी की सेहत को बचाना कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। लगातार रासायनिक उर्वरकों के उपयोग और भूमि के अत्यधिक दोहन से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

‘खेत बचाओ अभियान’ का उद्देश्य किसानों को इस खतरे के प्रति जागरूक करना और उन्हें ऐसे कृषि मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित करना है जो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी करें।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो खेती भी लंबे समय तक लाभकारी बनी रहेगी। इसी सोच के साथ शुरू किया गया यह अभियान किसानों को टिकाऊ कृषि की दिशा में आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

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