बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की तैयारी, अस्पतालों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध इलाज पर जोर

पटना। बिहार सरकार राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और मरीज केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यभर के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में सभी प्रमंडलों के क्षेत्रीय अपर निदेशक, जिलों के सिविल सर्जन तथा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक के दौरान राज्य के सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं, मरीजों को दी जा रही सुविधाओं, डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली, रेफरल व्यवस्था और स्वास्थ्य अवसंरचना विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों की विस्तार से समीक्षा की गई। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

हर मरीज तक बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना लक्ष्य

बैठक को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले प्रत्येक मरीज को सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य केवल इलाज उपलब्ध कराना नहीं बल्कि मरीजों को एक बेहतर और व्यवस्थित स्वास्थ्य सेवा अनुभव प्रदान करना भी है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अस्पतालों में मरीजों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। इसके लिए सभी स्तरों पर व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पतालों में आने वाले मरीज और उनके परिजन पहले से ही तनाव की स्थिति में रहते हैं, इसलिए उन्हें सरल, सुगम और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

“मे आई हेल्प यू” डेस्क को मजबूत बनाने का निर्देश

मरीजों की सहायता और मार्गदर्शन के लिए अस्पतालों में स्थापित “May I Help You” हेल्प डेस्क को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कई बार मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल की प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं होती, जिससे उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में हेल्प डेस्क उनकी सहायता का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

उन्होंने निर्देश दिया कि सभी अस्पतालों में हेल्प डेस्क सक्रिय रूप से कार्य करें और वहां प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि मरीजों को आवश्यक जानकारी समय पर मिल सके।

ओपीडी व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी

राज्य के विभिन्न अस्पतालों में लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या को देखते हुए ओपीडी सेवाओं को और अधिक व्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पंजीकरण काउंटरों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित की जाए ताकि मरीजों को लंबी कतारों में खड़ा न रहना पड़े। इसके अलावा टोकन डिस्प्ले सिस्टम के माध्यम से कतार प्रबंधन को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी और दवा वितरण केंद्रों पर भी सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हों ताकि मरीजों को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सकें।

15 जुलाई से और मजबूत होगी रेफरल व्यवस्था

बैठक के दौरान जिला अस्पतालों में रेफरल प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष चर्चा हुई।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आगामी 15 जुलाई से राज्य में रेफरल व्यवस्था को और मजबूत तरीके से लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों का इलाज यथासंभव स्थानीय स्तर पर ही हो सके।

उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग किया जाए। केवल उन्हीं मरीजों को उच्च संस्थानों में भेजा जाए जिनका उपचार स्थानीय स्तर पर संभव न हो।

इस व्यवस्था से बड़े अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव कम होगा और मरीजों को अपने जिले में ही बेहतर उपचार मिल सकेगा।

डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति पर सख्ती

स्वास्थ्य मंत्री ने सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि ड्यूटी रोस्टर के अनुसार सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। मरीजों को किसी भी स्थिति में चिकित्सकीय सेवाओं के अभाव का सामना नहीं करना चाहिए।

बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि सभी चिकित्सकों और पारा मेडिकल कर्मियों का हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर) तैयार कर उसे भाव्या पोर्टल से जोड़ा जाए।

अस्पतालों में नियमित औचक निरीक्षण के निर्देश

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी को आवश्यक बताया गया।

स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य और जिला स्तरीय टीमों को निर्देश दिया कि वे अस्पतालों का औचक निरीक्षण करें और वहां उपलब्ध सेवाओं का मूल्यांकन करें।

उन्होंने कहा कि केवल कागजी रिपोर्टों के आधार पर संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता। जमीनी स्तर पर जाकर वास्तविक स्थिति की समीक्षा करना जरूरी है ताकि कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जा सके।

दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर

बैठक में स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पतालों में जरूरी दवाओं की कमी नहीं होनी चाहिए। साथ ही सभी चिकित्सीय उपकरण पूरी तरह कार्यशील अवस्था में रहें ताकि मरीजों को समय पर जांच और उपचार मिल सके।

उन्होंने निर्देश दिया कि यदि किसी अस्पताल में उपकरण खराब हैं तो उन्हें शीघ्र ठीक कराया जाए और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

साफ-सफाई और स्वच्छता पर विशेष ध्यान

स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी सख्त निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि ओपीडी, आईपीडी, वार्ड, शौचालय और अस्पताल परिसर की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। स्वच्छ वातावरण न केवल मरीजों के लिए आवश्यक है बल्कि संक्रमण की रोकथाम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि अस्पताल परिसर में साफ-सफाई की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त न की जाए।

दलालों और बिचौलियों पर होगी सख्त कार्रवाई

बैठक में मरीजों और उनके परिजनों को गुमराह करने वाले दलालों और बिचौलियों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पतालों में किसी भी प्रकार की दलाली या अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि मरीजों को पारदर्शी और निष्पक्ष सेवाएं उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है।

डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा

बैठक में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर भी विशेष जोर दिया गया।

स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिया कि सभी मरीजों का आभा (ABHA) आधारित ओपीडी पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। इससे मरीजों का इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार होगा और भविष्य में उपचार संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

स्वास्थ्य अवसंरचना को मिलेगा नया स्वरूप

सात निश्चय पार्ट-3 के तहत स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत बनाने की दिशा में भी बैठक में चर्चा हुई।

स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिया कि जिला अस्पतालों को अतिविशिष्ट चिकित्सा केंद्र और राज्य के 332 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी ताकि लोगों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।

बैठक के अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने सभी अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य का कोई भी नागरिक बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।

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