भागलपुर-एलटीटी एक्सप्रेस में शराब तस्करों का दुस्साहस: उत्पाद टीम से की झड़प, चेन पुलिंग कर भागे; जीआरपी ने चार को दबोचा

पटना। बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद शराब तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसी बीच भागलपुर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी) एक्सप्रेस में शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। उत्पाद विभाग की टीम जब ट्रेन में जांच कर रही थी, तब कथित शराब तस्करों ने न केवल विरोध किया बल्कि अधिकारियों के साथ झड़प भी कर ली। इतना ही नहीं, कुछ आरोपितों ने ट्रेन की चेन पुलिंग कर उसे बीच रास्ते में रुकवा दिया और मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए। हालांकि घटना के बाद रेल पुलिस ने तकनीकी जांच और विशेष अभियान चलाकर अंतरजिला शराब तस्कर गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना 27 मई को भागलपुर-एलटीटी एक्सप्रेस (12336) में हुई थी। ट्रेन दिलदारनगर से दानापुर की ओर बढ़ रही थी और उसी दौरान उत्पाद विभाग की टीम शराब तस्करी के खिलाफ विशेष जांच अभियान चला रही थी। अधिकारियों को सूचना मिली थी कि ट्रेन के माध्यम से शराब की खेप बिहार के विभिन्न जिलों में पहुंचाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर टीम ने यात्रियों और संदिग्ध व्यक्तियों की जांच शुरू की।

जांच के दौरान उत्पाद विभाग की टीम को एक महिला संदिग्ध मिली, जिसकी गतिविधियां संदेहास्पद थीं। पूछताछ और तलाशी के बाद महिला को हिरासत में ले लिया गया। अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार महिला की पहचान जहाना खातून उर्फ खुशबू के रूप में हुई। महिला की गिरफ्तारी के बाद उसके साथ मौजूद अन्य लोगों ने विरोध शुरू कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के अनुसार, महिला के पकड़े जाने के बाद उसके सहयोगी आक्रामक हो गए और उत्पाद विभाग के कर्मचारियों के साथ बहस करने लगे। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर हाथापाई की स्थिति उत्पन्न हो गई। चलती ट्रेन में अचानक हुए इस हंगामे से यात्रियों के बीच भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई यात्रियों ने अपने कोच बदल लिए, जबकि कुछ लोग पूरी घटना को देखकर स्तब्ध रह गए।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब तस्करों ने ट्रेन की अलार्म चेन पुलिंग कर दी। ट्रेन कुशलपुर हॉल्ट के समीप रुक गई। अधिकारियों के अनुसार ट्रेन के रुकते ही कुछ आरोपित अंधेरे और अफरा-तफरी का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। महिला समेत कई संदिग्ध वहां से निकलने में सफल रहे। घटना के बाद उत्पाद विभाग और रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।

घटना की जानकारी मिलते ही रेल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। रेल पुलिस अधीक्षक अनंत कुमार राय के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। जांच की जिम्मेदारी रेल डीएसपी कंचन राज के नेतृत्व में गठित टीम को सौंपी गई। टीम ने घटना से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच शुरू की।

पुलिस ने केवल प्रत्यक्ष साक्ष्यों पर निर्भर रहने के बजाय तकनीकी जांच को भी प्राथमिकता दी। मोबाइल फोन डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डंप डेटा और विभिन्न खुफिया सूचनाओं का विश्लेषण किया गया। इसके साथ ही ट्रेन में यात्रा कर रहे संदिग्ध लोगों की गतिविधियों का भी अध्ययन किया गया। कई दिनों तक चली जांच के बाद पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे।

जांच के दौरान पुलिस ने एक संगठित अंतरजिला शराब तस्कर गिरोह का खुलासा किया। इसके बाद लगातार छापेमारी कर चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपितों में जहाना खातून उर्फ खुशबू, अंकित कुमार, वीरेंद्र कुमार राय उर्फ लालू और रंजन शर्मा शामिल हैं। पुलिस के अनुसार सभी आरोपित बिहार के अलग-अलग जिलों से जुड़े हुए हैं और कथित रूप से शराब तस्करी के नेटवर्क का हिस्सा हैं।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपितों के पास से कई महत्वपूर्ण सामान भी बरामद किए। इनमें पांच एंड्रॉयड मोबाइल फोन, एक कीपैड मोबाइल, दो मोटरसाइकिल और लगभग 3.270 लीटर अंग्रेजी शराब शामिल है। पुलिस का मानना है कि बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य तस्करी नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के कुछ सदस्यों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस के अनुसार वीरेंद्र कुमार राय के खिलाफ पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र में उत्पाद अधिनियम के तहत मामला दर्ज है। वहीं रंजन शर्मा के खिलाफ भी फुलवारीशरीफ थाना में उत्पाद अधिनियम से संबंधित मामला दर्ज बताया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि गिरफ्तार आरोपित पहले भी अवैध शराब कारोबार से जुड़े रहे हैं।

रेल डीएसपी कंचन राज ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपितों से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब की खेप कहां से लाई जाती थी, किन माध्यमों से विभिन्न जिलों तक पहुंचाई जाती थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं। जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक की भी पड़ताल कर रही हैं।

अधिकारियों का मानना है कि यह केवल कुछ व्यक्तियों का मामला नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इसलिए पुलिस उन लोगों की पहचान करने में जुटी है जो शराब की खरीद, परिवहन, भंडारण और वितरण में भूमिका निभाते हैं। फरार आरोपितों की तलाश के लिए भी लगातार छापेमारी की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद तस्करों ने नए-नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। रेलवे मार्गों का उपयोग भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जाता है। ट्रेनों में भीड़ और लंबी दूरी की यात्रा का फायदा उठाकर तस्कर कई बार अवैध शराब की खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। हालांकि हाल के वर्षों में रेलवे पुलिस और उत्पाद विभाग ने संयुक्त अभियान चलाकर कई बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है।

भागलपुर-एलटीटी एक्सप्रेस में हुई यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि इसमें सरकारी अधिकारियों के साथ कथित झड़प और ट्रेन की चेन पुलिंग जैसी घटनाएं शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियां इसे कानून व्यवस्था के लिए चुनौती मान रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति जांच एजेंसियों के काम में बाधा डालने का साहस न कर सके।

फिलहाल चार आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। जांच जारी है और अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही इस अंतरजिला शराब तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। बिहार में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ चल रहा अभियान आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

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