
मोतिहारी: बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री Shailendra 44 साल बाद अपने पुराने इंजीनियरिंग कॉलेज पहुंचे, जहां छात्र जीवन की यादों को ताजा करते हुए वे भावुक नजर आए। कॉलेज परिसर और हॉस्टल का दौरा करने के दौरान उन्होंने अपने पुराने कमरे को नमन किया और कहा कि इसी संस्थान ने उन्हें वह पहचान दी, जिसके बल पर वे आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं।
पुराने हॉस्टल रूम में पहुंचकर हुए भावुक
वर्ष 1982 में इसी इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने वाले मंत्री शैलेन्द्र ने कॉलेज पहुंचकर शिक्षकों और छात्रों से मुलाकात की। इसके बाद वे हॉस्टल पहुंचे और उस कमरे को देखा जहां छात्र जीवन में रहते थे। 44 साल बाद अपने पुराने कमरे में प्रवेश करते ही उन्होंने सिर झुकाकर उसे प्रणाम किया।
मंत्री ने कहा कि कॉलेज की प्रगति देखकर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है और यहां के छात्र देश-दुनिया में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं।
छात्रों से किया संवाद, दिए जरूरी निर्देश
दौरे के दौरान मंत्री ने छात्रों से तकनीकी शिक्षा और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बिहार को कुशल और जिम्मेदार इंजीनियरों की आवश्यकता है। साथ ही कॉलेज प्रशासन को लैब, शोध सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए।
पुल निर्माण में गड़बड़ी पर सख्त संदेश
कॉलेज दौरे के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री ने राज्य में पुल निर्माण की गुणवत्ता को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुल निर्माण में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि राज्य के प्रमुख पुलों की समीक्षा की जा रही है और विशेषज्ञों की टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं। जिन अधिकारियों के कार्यकाल में गुणवत्ताहीन या दोषपूर्ण निर्माण कार्य हुए हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दोषियों पर सस्पेंशन से लेकर FIR तक
पथ निर्माण मंत्री ने कहा कि सरकार निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की गुणवत्ता की जांच थर्ड पार्टी एजेंसियों से कराई जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता के पैसे की बर्बादी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने पर सस्पेंशन से लेकर FIR तक दर्ज की जा सकती है।


