
भागलपुर। भागलपुर जिले के सबौर थाना क्षेत्र में सामने आए एआरपीएफ जवान हत्याकांड का पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए मामले के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। कई दिनों तक चले तकनीकी और मानवीय अनुसंधान के बाद पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। गिरफ्तार आरोपी की निशानदेही पर पुलिस को मृतक जवान की वर्दी से जुड़ा सामग्री और जले हुए कपड़ों के अवशेष भी बरामद हुए हैं। पुलिस का दावा है कि हत्या के पीछे ट्रेन में चोरी की घटना का विरोध करना मुख्य वजह थी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार 27 मई 2026 को भागलपुर पुलिस को सूचना मिली थी कि ड्यूटी पर तैनात एक एआरपीएफ जवान संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू की गई। एआरपीएफ इंस्पेक्टर द्वारा दिए गए लिखित आवेदन के आधार पर सबौर थाना में कांड संख्या 183/2026 दर्ज कर पुलिस ने अनुसंधान प्रारंभ किया।
मामले को प्राथमिकता देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष जांच टीम का गठन किया गया। टीम का नेतृत्व पुलिस के वरीय अधिकारियों की निगरानी में किया गया और लापता जवान की तलाश के लिए लगातार अभियान चलाया गया। पुलिस की विभिन्न टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही थीं और तकनीकी साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा था।
जांच के दौरान पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला। सबौर थाना क्षेत्र के शंकरपुर पुल के समीप एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया। शव की पहचान बाद में लापता एआरपीएफ जवान धर्मेंद्र कुमार के रूप में हुई। जवान का शव मिलने के बाद मामला केवल गुमशुदगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हत्या की दिशा में जांच तेज कर दी गई।
पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के साथ-साथ मोबाइल लोकेशन, तकनीकी डेटा और स्थानीय स्तर पर प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण शुरू किया। जांच में धीरे-धीरे ऐसे तथ्य सामने आने लगे, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि जवान की मौत किसी दुर्घटना का परिणाम नहीं बल्कि सुनियोजित आपराधिक घटना थी।
अनुसंधान के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि घटना वाले दिन जवान ट्रेन में ड्यूटी कर रहा था। इसी दौरान कुछ अपराधी ट्रेन में चोरी की वारदात को अंजाम देने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस के अनुसार जवान ने चोरी का विरोध किया और अपराधियों को रोकने का प्रयास किया। इसी बात से नाराज होकर बदमाशों ने जवान को निशाना बनाया।
जांच में सामने आया कि अपराधियों ने पहले जवान को अकेला पाकर उसका अपहरण किया और बाद में उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने की भी कोशिश की गई ताकि पुलिस को घटना की वास्तविक जानकारी न मिल सके। हालांकि लगातार प्रयासों और वैज्ञानिक जांच पद्धति के कारण पुलिस अपराधियों तक पहुंचने में सफल रही।
विशेष जांच टीम को तकनीकी माध्यम से सूचना मिली कि इस हत्याकांड में शामिल मुख्य आरोपी सबौर थाना क्षेत्र के एक गांव में छिपा हुआ है। इसके बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी चिकू यादव को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी सबौर थाना क्षेत्र के लेलबख गांव का रहने वाला है। गिरफ्तारी के बाद जब उससे पूछताछ की गई तो कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने मृतक जवान की वर्दी से संबंधित सामग्री तथा जले हुए कपड़ों के अवशेष बरामद किए हैं। इन बरामद वस्तुओं को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि हत्या के बाद साक्ष्य नष्ट करने की योजना किस स्तर पर बनाई गई थी और इसमें कितने लोग शामिल थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी में पता चला है कि वह पहले भी हत्या से जुड़े एक मामले में जेल जा चुका है। अब पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसका किसी संगठित अपराध गिरोह से संबंध तो नहीं है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई मामले में पहली बड़ी सफलता है, लेकिन जांच अभी जारी है। हत्याकांड में शामिल अन्य संदिग्धों की तलाश के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।
जांच टीम को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर पूरे घटनाक्रम का खुलासा हो सकेगा। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या अपराधियों ने पहले से जवान को निशाना बनाने की योजना बनाई थी या फिर चोरी का विरोध करने के दौरान विवाद बढ़ने पर हत्या की गई।
इस पूरे मामले ने सुरक्षा बलों के जवानों की ड्यूटी के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों को भी उजागर किया है। रेलवे और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में चोरी एवं अन्य आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए तैनात जवान अक्सर अपराधियों के निशाने पर रहते हैं। ऐसे में इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और जवानों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े किए हैं।
पुलिस का कहना है कि सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को एकत्र किया जा रहा है ताकि आरोपियों के खिलाफ मजबूत चार्जशीट दाखिल की जा सके। जांच पूरी होने के बाद मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल मुख्य आरोपी पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है। वहीं अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम लगातार अभियान चला रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही पूरे हत्याकांड का पर्दाफाश कर सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।
इस कार्रवाई को भागलपुर पुलिस की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जवान की हत्या जैसे गंभीर अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।


